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Do you know that we are a big miracle secret?

Do you know that we are a big miracle secret?
Following the trail of colorful emotions and beautiful divine relationships. Now life Blossoms, beginning to love because it is a vibrant land of love and a beautiful feelings to wander across the heart during the journey of awakening. But here are some of the most stunning moments to witness life in full bloom with divine relationship and divine action like spring...And now thoughts are in bloom

incredible questions ? ( We are a unique art )

Those questions, which point to the dimension on the one side, on which the breath stops. Both trust and doubt wear the same veneer. This is the part of our life, which gives a lot of newness to our life, gives freshness full of beauty and gives a full of healthy smile. 
Great form of mysterious life.
Some such amazing and unique questions are presented for all of you.


Have we ever seen the beauty of trees 
when the first rays of the sun emerge?
 And you felt that this was my ray which I gave to the sun?
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Before the sun goes out, 
when the darkness becomes dark on the ground, 
but the aura of light starts to appear in the sky, 
you have ever seen that moment,
 as if that moment describes our state,
 We live in darkness at the time, 
but the aura of trust in our existence brightens our hope.
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Have you ever felt as if, with the sun setting,
your anxiety, pain, tension have all subsided?
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Have you ever felt as if you are the center of the universe,
 and all the universe is revolving around you, 
as if all the galaxy is rotating?


Have you ever felt like trees are looking for you and want to talk to you?
-Like the trees are seeking to see you?
-Like, love for you in the existence of trees today?
-Like trees have to give you some sense or message today?
-Like listening carefully to you?
-Like trees beckon and want to hug you?

As you are walking, suddenly a thorn fell on your sight and you got pierced in your feet, you stopped 
- a big tree fell a short distance at that moment?
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As if you prayed in front of the tree, 
that if you listen to me, you understand, 
give me this response, and the tree gave you the same response?
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Have you ever seen yourself flowing with a running waterfall?
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Ever heard the sound of water flowing from the deep, 
did you think that this voice is
 what I have heard of the blood flowing within me?
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With the rustle of the moving wind,
 when your own particles also rustled, 
you felt that both these rustle were the same. 
This rustle has only happened because the two have just separated?
---
When you looked at the clouds,
 there was a sudden drop of water in the eye.
 You don't know why this drop came, 
so you looked at the clouds again, 
then you smiled with thanks,
 because you came to know that this water drop, 
separated from the clouds, one of the clouds It is a drop.
 When that drop of water flowed out of your eyes,
 as soon as your hands wiped it, it got back into the clouds?
 And you saw it?
---

You wake up in the morning, 30 minutes you looked all around, like a strange place in a stranger, you are also unaware of yourself. Suddenly you asked yourself who am I? And then you passed 30 minutes. You still don't know who you are? Your empty eyes are just looking at things lying around. But you do not know what this item is, what are the names of these goods? You love that stage but you don't know anything, no knowledge and understanding. After 2 hours you said oh my name is this, I am in Canada, I came from India. Then you started remembering everything. This is root-samadhi. We reach unconsciously in the state of samadhi, at that time we do not have mind. Think that you are in the position of a 1-year-old child.
In this root-samadhi, when we go with consciousness, 
we are not children,
 we become universe...

***—***

 वो सवाल ,जो हम को एक ओर डायमेंशन की  ओर ही इशारा करतें हैं, जिन पर साँसें रुक जाती है। भरोसा और शक दोनों ने एक ही लिबास पहना होता है। यही हमारी ज़िंदगी का वो हिस्सा है, जो हमारे जीने को  भरपूर नयापन देता है, सुंदरता से भरा ताज़ापन देता है और मुस्कान से भरी तंदरुस्ती देता है।  रहस्यपूर्ण जीवन का शानदार रूप।
आप सब के लिए कुछ ऐसे ही अद्भुत और अनूठे सवाल पेश हैं। 


क्या हम ने कभी सूर्य की पहली किरण से जब पेड़ों की सुंदरता उभरती है, उस को कभी देखा है ?
 और आप को ऐसे लगा कि यह तो मेरी ही किरण थी जो मैंने सूर्य को दी थी ?
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सूर्य के निकलने से पहले, जब  ज़मीन पर अँधेरा घना हो जाता है पर आसमान में  रौशनी की आभा दिखाई देने लगती है, उस पल को आप ने कभी ऐसी सोच से देखा है, जैसे कि वो पल हमारी उस अवस्था को ब्यान करता है ,जिस वक़्त हमारा जीना अंधेरे में होता है,
पर हमारे वजूद में भरोसे की आभा हमारी उम्मीद  को रोशन करती है। 
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कभी आप ने ऐसा महसूस किया है, 
जैसे कि ढलते सूर्य के साथ ही ,
आप के भी फ़िक्र, दर्द, तनाव सब ढल गए ?
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आप ने कभी यह अनुभव किया है जैसे कि आप ब्रह्माण्ड के केंद्र हो, 
और सब ब्रह्मण्ड आप के ही चारों तरफ घूम रहा है, 
जैसे  कि सब गैलेक्सी घूम रही है ?
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कभी आप ने ऐसा भी अनुभव किया, जैसे कि पेड़ आप की राह देखतें हैं, और आप से बात करनी चाहतें हैं ?
जैसे कि पेड़ आप को देखने केलिए तरसतें हैं ?
जैसे कि आज पेड़ों के वजूद में आप के लिए प्यार है ?
जैसे कि आज पेड़ों ने आप को कुछ समझ देनी है ?
जैसे कि आप को पूरे ध्यान से सुन रहें हैं ?
जैसे कि  आप को इशारे से बुलातें हैं और hug करनी चाहतें हैं ?

जैसे कि आप चलते जा रहे हो, 
अचानक आप के देखते देखते ही काँटा गिरा 
और आप के पाव में चुभ गया, आप रुके - 
उसी पल में थोड़ी सी दूरी पर एक बड़ा पेड़ गिर गया?
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जैसे कि आप ने पेड़ के आगे प्रार्थना की, 
कि अगर आप मेरी बात सुनते हो, समझते हो , 
तो मेरे को यह रेस्पॉन्स दो, और पेड़ ने आप को वोही रेस्पॉन्स दिया ?
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कभी आप ने बहते झरने के साथ, खुद को भी बहते देखा ?
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कभी आप ने गहरे से जब बहते पानी की आवाज़ को सुना
 तो आप को लगा कि यह आवाज़ वोही है जो मैंने मेरे भीतर खून के बहने की सुनी है ?
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चलती हवा की सरसराहट से, जब आप के खुद के  कणों में भी सरसराहट हुई 
तो आप को यह लगा कि यह दोनों सरसराहट एक ही थी।
 यह सरसराहट हुई ही इस लिए है कि यह दोनों अभी अलग हुई है ?
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जब आप ने बादलों  की ओर देखा तो आँख में अचानक पानी की बूँद आ गई। 
 क्यों यह बूँद  आई, आप को पता भी नहीं, तो आप ने फिर से बादलों को देखा, 
तो आप में थैंक्स के साथ ही मुस्कान आई, 
क्योंकि आप को पता लगा कि यह पानी की बूँद, बादलों से विछड़ी हुई, बादलों की ही एक बूँद है। 
 जब वो पानी की बूँद आप की आँखों में से बह कर बाहर हुई 
तो जैसे ही आप के हाथों ने उस को पोंछा, तो वो वापस बादलों  में मिल गई ?
 और आप ने यह देखा ?

आप सवेर को जागे, ३० मिनट्स आप ने आपने चारों तरफ देखा,
एक अनजानी सी देखनी में अनजानी जगह की तरह ,
आप अपने आप से भी अनजान।  
अचानक आप ने खुद से पूछा कि मैं कौन हूँ? और फिर आप के ३० मिनट्स बीत गए।
  आप को अभी तक पता नहीं लगा कि आप कौन हो ? 
बस आप की खाली आँखों  चारों तरफ पड़ी चीज़ों  देख रही है ।  
पर आप को पता ही नहीं कि यह सामान क्या है, इन सामान के नाम क्या है? 
आप को वो अवस्था बहुत प्यारी लगती है पर आप को कुछ भी जानकारी नहीं, कुछ भी ज्ञान और समझ नहीं।
  २ घंटे कि बाद आप ने कहा कि ओह, मेरा नाम तो यह है , मैं कनाडा में हूँ, मैं इंडिया से आई थी।
  फिर आप को सब याद आने लगा। यह होती है जड़-समाधि। 
 हम समाधि की अवस्था में अनजाने-रूप से पुहंच जातें हैं, 
उस वक़्त हमारे पास मन नहीं होता। 
 ऐसे सोच लो कि  १ साल के बच्चे की पोजीशन में आ जातें हैं। 
यही जड़-समाधि में जब हम होश से जातें हैं तो हम बच्चे नहीं, 
हम ब्रह्मण्ड बने होतें हैं। 



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