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Do you know that we are a big miracle secret?

Do you know that we are a big miracle secret?
Following the trail of colorful emotions and beautiful divine relationships. Now life Blossoms, beginning to love because it is a vibrant land of love and a beautiful feelings to wander across the heart during the journey of awakening. But here are some of the most stunning moments to witness life in full bloom with divine relationship and divine action like spring...And now thoughts are in bloom

Let's make loneliness a blessing from today!

                                                 How to make loneliness healthy?


If there is anything to learn in life, then it is that we should never face any situation or face any condition, first of all, do not consider any situation, whatever it may be, to be cursed. Every episode of life has to be considered a blessings only. And this quality is capable of learning. If this ability comes, then all the qualities will automatically come after it. Because it is not only the most precious alchemy, but it is the real leader.

Today, there is talk of loneliness again, how can we see loneliness in a positive way, understand and know?

For that the correct steps of the first few, which will cure 100% condition.

How do we make negative behavior positive?

For our common life too, the best and positive treatment is of natural nature to us, it should be supported. Watching the flow of the river - watching the fly birds - becoming the companion of flowers and trees. Morning Walking, Evening Walking. Taking a bath 2-3 times a day.  always drink something cold. Deepest of all, you wrote the matter of mind everyday that today my mood was like this, then what did I think and what did I do. Keep writing all with full honesty. As much as it is important to write, there is more work. Go before the sun rises for walking and go after the sun sets. Abstaining from the sun. Abstaining from heat. If the weather is cold then there is no difference. By doing this, we will not even need a doctor. Silent and nature are the best doctors.

Now we have to see what is the relation between sun and heat with our loneliness?

Remember, everything is related to everything, we are very close to each other. But we have given a limited size to our existence. The more limited our thinking and living is, the more we go alone. Being alone in a limited form is a negative path.

When our loneliness deepens, it not only affects our mind but also our body. The germs of our body shrink a lot.

You must have seen that in the light of the eyes, the pupil of the eyes becomes small.

You may have also noticed that people who are very stingy have more problem of bathroom.

We do not see any relation in these. Because our intelligence has not yet developed there.

You will not even believe that the family that lives in your neighborhood, you have a very deep bond with them. Why did the neighbors become that, ever thought that the person in your neighborhood is that?

 Never in life, nothing is useless, there is reason behind everything.

In our loneliness, there is a shrink in our body. Sun and heat will not let them normal position. The relation of light is much deeper than wisdom, understanding, knowledge and information. To achieve all this, it is imperative to have thought. The bond of thinking and light is very deep. Our thinking is also a heat, which is related to 'fire element'. We just have to relax this thing, let it rest. So that our germs fall into their natural positions. Because the position of germs is due to the heat of our thinking

Because thinking is a warm feeling. This is very important for body. If you ever see such a position, then notice that the same voice will come out of your soul that I have to eat this food. 90% of your heart wants to eat sweet. Because sweet becomes an anti-dose, which gives strength to our shrunken germs to become normal.

We ironing our clothes, so that the clothes shrink. Sweet works just like this ironing. Eat anything sweet, whatever the heart desires to eat. Have to try that the food is less chili food. All these tips take our body to rest position.

And now, let's talk about writing:

In loneliness, we ourselves are our own companions. So we have to talk to ourselves. When we do not talk to us about anyone, our burden will not be lightened. A person is very strong and weak. It is our nature that we have to talk. If we do not know how to write, then speak with nature in private. Your voice must fall in your ears. We have to hear our own voice to the ears. We have to make all the five senses a companion. This is our beginning, we ourselves have become our partner. When we have adopted this loneliness with love, loneliness will take us into a new dimension.

ahead

Again

Celebration is the one we get while waiting for us.

be happy

Be it loneliness or some other problem, if we solve these in a natural way, then we will also experience an understanding. Nature is a very big school, if we become students of nature then we will make healthy Phd from every side of life.



अकेलेपन को तंदरुस्ती कैसे बनाएं ?


ज़िंदगी में अगर सीखने योग कुछ भी है तो वो यह है कि हम को कभी भी कोई भी स्थिति जाए या कैसी भी हालात का मुक़ाबला करना हो, सब से पहले कि,किसी भी हालात को,कैसा भी हो,श्राप नहीं मानना। ज़िंदगी के हर काण्ड को सिर्फ वरदान ही मानना है।  और यही गुण सीखने के काबिल है। यह योगिता गई तो सब गुण इस के पीछे खुद--खुद जाएंगे।  क्योंकि यह सब से अनमोल कीमिया ही नहीं, बलिक यही असली लीडर है। 

आज फिर बात हो रही है अकेलेपन की , कि कैसे हम अकेलेपन को पॉजिटिव तरीके से देखे ,समझें और जाने ?

उस के लिए पहले  कुछ के सही कदम ,जो १००% शर्तिया इलाज़ करंगे ही। 

हम नेगेटिव व्य्वहार को पॉजिटिव कैसे करेंगे ?

हमारी आम ज़िंदगी के लिए भी सब से अच्छा और पॉजिटिव इलाज़, हमारे लिए कुदरत का है, उस का साथ रहना चाहिए।  नदी के बहने को देखना- पक्षिओं को देखना -फूलों और पेड़ों के साथी बन जाना।  मॉर्निंग वाक करनी, इवनिंग वाक करनी।  - बार दिन में नहा लेना।  ठंडा पीना। सब से गहरा, आपने मन की बात को हर रोज़ लिखना कि आज मेरा मूड ऐसा था, फिर मैंने क्या सोचा और क्या किया।  पूरी ईमानदारी से सब लिखते जाना।  जितना ज़रूरी लिखना है उतना ही ज़रूरी एक काम और है।  वाकिंग के लिए सूर्य उदय से पहले जाना कर सूर्य अस्त होने पर जाना।  धुप से परहेज़ करना।  गर्मी से परहेज़ करना।  अगर मौसम ठंडा है तो कोई फ़र्क़ नहीं। ऐसे करने से हम को डॉक्टर की भी ज़रुरत नहीं रहेगी।  चुप और कुदरत सब से अच्छे डॉक्टर हैं। 

अब हम ने देखना है कि धुप और गर्मी का हमारे अकेलेपन से क्या सम्बन्ध है ?

याद रखना हर चीज़ का हर चीज़ से नाता है , हम एक दूसरे से बहुत ही करीब हैं। मगर हम ने खुद के वजूद को  सीमित आकार दिया हुआ है।  जितना  सीमित हमारी सोच और रेहनी होती है उतने ही हम अकेले होतें जातें हैं।  सीमित-रूप में अकेले होना नकारात्मिक राह है। 

जब हमारा अकेलापन गहरा हो जाता है तो हमारे मन पर ही नहीं जिस्म पर भी प्रभाव पड़ता है।  हमारे जिस्म के कीटाणु  बहुत सिकोड़ जातें हैं।  

आप ने कभी देखा होगा कि  रौशनी में आँखों की पुतली छोटी हो जाती है। 

आप ने यह भी देखा होगा कि जो लोग बहुत कंजूस होतें हैं , उन को बाथरूम की समस्या ज़्यादा होती है। 

हम को इन में कोई सम्बन्ध दिखाई नहीं देता। क्योंकि अभी हमारी बुद्धि ने वहां तीक विकास नहीं किया। 

आप तो यह भी नहीं मानोगे कि आप के जो पड़ोस में जो रहता है  परिवार, आप का उन के साथ भी बहुत गहरा नाता है।  पडोसी वो क्यों बने , कभी सोचा कि आप के पड़ोस में जो व्यक्ति है , वो क्यों है ?

 ज़िंदगी में कभी भी, कुछ भी फालतू नहीं होता, हर चीज़ के पीछे रीज़न है। 

अकेलेपन में हमारे जिस्म में भी एक सिकोड़ आई होती है।  धुप और गर्मी उस सिकोड़ को दूर नहीं होने देंगे। रौशनी का नाता अक्ल, समझ, ज्ञान ,जानकारी से बहुत गहरा है।  यह सब हांसिल करने केलिए सोच विचार का होना लाज़मी है।  सोच और रौशनी का नाता बहुत गहरा है। हमारी सोच भी एक गर्मी है, जिस का संबंध अग्नि तत्त से है। इस नाते को अभी हम ने रिलैक्स करना है , इस को आराम करने देना है। ता जो हमारे कीटाणु अपनी कुदरती पोजीशन में जाएँ। उन की यह पोजीशन कारण गर्मी है।क्योंकि कीटाणुओं की पोजीशन हमारी सोच की गर्मी से हुई है   

क्योंकि सोच एक गर्म अहसास ही है। जिस्म के केलिए यह बहुत ही ज़रूरी है।  आप आपने कभी भी ऐसी पोजीशन को देखेंगे तो गौर करना कि आप की रूह में से यही आवाज़ आएगी कि मैंने तो यही खाना खाना है।  ९०% आप का दिल की चाहना मीठा खाने को ही होगी।  क्योंकि मीठा एक एंटी-डोज़ बन जाता है , जो हमारे सिकोड़े हुए कीटाणुओं को ताकत देता है कि वो नार्मल हो जाएँ।

हम आपने कपड़ों को इस्त्री  करतें हैं, ता जो कपडे की सिकोड़ दूर हो जाए। मीठा इस इस्त्री की तरह ही काम करता है।   मीठा कोई भी खाओ , जो भी खाने को दिल  करता है।  कोशिश करनी  है कि खाना कम मिर्ची वाला खाना है। यह सब टिप्स हमारे जिस्म को आराम की पोजीशन पर ले आतें हैं। 

और अब बात करतें हैं, लिखने की:

अकेलेपन में हम खुद ही आपने साथी होतें हैं  . सो हम ने अपनी बातचीत खुद से ही करनी है।  जब तीक हम आपने आप की बात किसी से भी करेंगे नहीं, तो हमारा बोझ हल्का नहीं होगा।  व्यक्ति बहुत ताकतवर  और कमज़ोर चीज़ है।  यह हमारा स्वभाव है कि हम को बात करनी ही पड़ेगी। अगर हम को लिखना पड़ना नहीं आता, तो कुदरत के साथ अकेले में बोल कर बात करो।  अपनी आवाज़ ज़रूर आप के कानों में पड़नी ही चाहिए।  कानों को हम ने अपनी खुद की आवाज़ सुनानी ही है।  पाँचों ज्ञान इन्द्रीओं को हम ने आपने साथी बनाना ही है।  यह हमारी शुरूआत है, खुद आपने आप के साथी बनने की।  जब हम ने  इस अकेलेपन को प्यार से अपना लिया तो अकेलापन हम को नए डायमेंशन में ले जाएगा। 

आगे 

फिर 

जश्न ही जश्न हमारा इंतज़ार करता हुआ हम को मिलता है। 

खुश रहो 

अकेलापन हो या कोई ओर समस्या, अगर इन को कुदरती तरीके से हल करेंगे तो हम एक समझदारी को भी अनुभव करेंगे।  कुदरत बहुत बड़ी स्कूल है, अगर हम कुदरत के विद्यार्थी बन गए तो ज़िंदगी के हर पख से तंदरुस्त Phd कर लेंगे 


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