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My Profession is to always find God in Nature

My Profession is to always find God in Nature
What I knew was that the silence blossomed the heart. When the heart blossomed, there was a feeling of love. The romance started with me. When my romantic-mind took all my stress from me all the time, I could not know. I who I am, I am unknown, today I remembered Buddha in unknown happiness

ॐ and Sound


Do you know that aliveness and Inspiration we get from the sound of water and fire

What is sound?
Do you know that?
If you do not know, then give a little attention,
According to science, we say that sound is a collision of two things.
  Bumped!
Two things! A collision of two things produces a sound, but this is the sound - we have to understand it carefully.
Om, Allah  (hoo) is also called sound, so who is born by hitting it?
That sound is also called anahd nad, it is also called Clap of one hand - so what is the collision of the two things that we call Om and it becomes sound?

Two things collide:
Two things clash with each other.
Those things!
full of life (aliveness) and full of consciousness
When our whole life and our whole conscious collide, then a sound is produced. That sound is called Om and the level at which it collides, it is called God-dimension.
We can also say this that when our consciousness is completely awakened in the feeling of complete emptiness, the comfort we get there is the enjoyment of that rest. When the wave of joy-form arises, its rhythm is called ॐ.

Or we can also say that whatever is our reality, which is our true form, when we stay in it, then what we are in that stagnation is called ॐ. Meaning that we are a wave, a sound, a tone, a light, a thought, a feeling, an emptiness, a sensation, a space or say there is an understanding. Whatever suits us according to our nature - we give it that name. Like I feel that I am an emptiness - like space.
Like any musician, one would feel own-self: like a sound or a tone.

As if there was a scholar, one would feel own-self: like a light or an understanding.
Just like a scientist would feel own-self: one like a thought or a wave.
Just as a sculptor or writing would feel own-self: like a feeling.
As if there was a soldier, one would feel own-self: like a senses. (awareness, alertness)
Then what shall we call the one who feels emptiness?
A soldier or a scholar
No
One is neither a soldier nor a scholar. Just empties

Emptiness is just emptiness, we cannot say emptiness. Such a person is just like air. The wind blows but is not visible. Is felt. There is no definition of life in such a person. Such a person is never a way and not a traveler. There is an empty air, that is why one feels emptiness.
Now such a person will also hear the sound or not?
Does emptiness have a sound?
What will be the form of sound in emptiness?
What is the sound of just being
Which is of space
What is it ?
From whatever part of life we ​​see ourselves, we are the same.
 This is the deepest trick of life, mystery, and miracle


*****——*****

How, we will all know this in the next part?


क्या आप जानते हो कि जिन्दापन और प्रेरणा  हम को पानी और आग की ध्वनि से मिलती है 


ध्वनि क्या है ?
क्या आप जानते हो ?
नहीं जानते तो, तो ज़रा ध्यान फ़रमाना,
हम विज्ञान के अनुसार कह देतें हैं कि ध्वनि ,दो चीज़ों का टकरा है।
  टकरा ! 
दो चीज़ों का ! दो चीज़ों के टकराने से ध्वनि पैदा होती है , पर यह जो ध्वनि है -हम ने इस को गौर से समझना है।  
ओम , अल्लाह  को भी ध्वनि कहा जाता है , तो यह किस के टकराने से पैदा होती है ?
उस ध्वनि को अनहद नाद भी कहतें हैं ,एक हाथ की ताली भी कहतें हैं -तो वो कौन सी दो  चीज़ों का टकरा है कि जिस को हम ओम कहतें हैं और वो, ध्वनि बन जाती है ?
दो चीज़ों का टकरा:
दो चीज़ों का एक दूसरे से ज़ोर से भिड़ जाना। 

वो चीज़एं !
भरपूर जिन्दापन और भरपूर होशमंदी  

जब हमारा सम्पूर्ण जिन्दापन और हमारा सम्पूर्ण चेतनरूप  आपस में टकराते हैं तो ध्वनि पैदा होती है। उस ध्वनि को ॐ कहतें हैं और जिस लेवल पर यह टकराते हैं ,उस को गॉड-डायमेंशन कहतें हैं। 
इस को हम ऐसे भी कह सकतें हैं कि जब सम्पूर्ण खालीपन के एहसास में हमारा चैतन्य -रूप सम्पूर्णता से जगरूप हो जाता है, वहां पर हमारे को जो आराम मिलता है, उस आराम का जो आनंद है वो ॐ है। आनंद-रूप की लहर जब उठती है तो उस की लयबद्धता को ॐ कहतें हैं। 
या हम ऐसे भी कह सकतें हैं कि जो हमारी असलियत है , जो हमारा सच-रूप है , जब हम उस में ठहर जातें हैं तो उस ठहरेपन में जो हम हैं उस को ॐ कहतें हैं।  मतलब कि हम एक लहर है , एक ध्वनि है , एक टोन है , एक रौशनी है, एक सोच है , एक भावना है, एक खालीपन है , एक होश है , एक स्पेस हैं  या कहो कि एक समझ है।  जो भी हम को हमारे स्वभाव के अनुसार फबता है -हम उस को वो नाम दे देतें हैं। जैसे मेरे को फबता है कि मैं एक खालीपन हूँ - स्पेस की तरह।  

जैसे कोई भी संगीतकार होगा तो वो खुद को महसूस करेगा:  एक ध्वनि या एक टोन की तरह। 
जैसे कोई विद्धान होगा तो वो खुद को महसूस करेगा : एक रौशनी की तरह या एक समझ की तरह। 
जैसे एक वैज्ञानिक खुद को महसूस करेगा: एक एक सोच की तरह या एक लहर की तरह। 
जैसे एक मूर्तिकार या लिखारी खुद को महसूस करेगा : एक भावना की तरह।  
जैसे एक योदा होगा  तो वो खुद को महसूस करेगा : एक होश की तरह। 
फिर जो खालीपन को महसूस करता है, उस को हम क्या कहेंगे ?
एक योदा  या एक विद्वान् 
नहीं 

वो ना ही योदा होता है और ना ही विद्वान्।  सिर्फ खाली होता है 
 खालीपन सिर्फ खालीपन होता है, खालीपन को हम कुछ नहीं कह सकते।  ऐसा इंसान सिर्फ हवा की तरह होता है।  हवा बहती है पर दिखाई नहीं देती।  महसूस होती है।  ऐसे इंसान में ज़िंदगी की कोई भी परिभाषा नहीं होती। ऐसा व्यक्ति कभी राह भी नहीं होता और राही भी नहीं होता। एक खाली हवा का एक झोँका होता है, इस लिए ही खालीपन को  महसूस करता है।  
अब ऐसे व्यक्ति को ध्वनि भी सुनाई देगी कि नहीं ?
खालीपन में ध्वनि होती है क्या ?
खालीपन में ध्वनि का रूप क्या होगा ?
सिर्फ होने की क्या ध्वनि है 
जो स्पेस की है 
क्या है ?

ज़िंदगी के किसी भी हिस्से से हम खुद को देखें हम वोही है। 
 यही ज़िंदगी की सब से गहरी चाल है, रहस्य है , और चमत्कार है 

कैसे , यह हम सब जानेंगे अगले हिस्से में ?

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