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Let's Walk Like a Mystic

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The death of Ego/block-2

My Awakening Path

Thursday, June 23

My Awakening Path


 

Today I did not hold the hand of God, Now God has held my hand

This life is so unmatched, Whatever it gives – It gives amazing.
If life is Wonderful, It is because every living being is Wonderful.
For me I am the first and most precious mystical page.
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We have never seen our incompleteness as a bless, only as a problem. This incompleteness is a method – Which connects us with life – and as a necessity connects us with every living being. It is this scarcity that keeps us all alive, moving, growing, creating and most importantly transforming our lives.
This is the simplicity of change, Which changes from moment to moment, due to Which our life changes.
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Hey, is it love for nature or love for Silence! The beauty of nature and the energy of silence both lead me to the beauty of my existence and the beauty of Silence. By Which my life is opened and I see that only 'Silent' breathes in me and 'Nature' is born.
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I was ignorant of myself – Why?; I did not know Who I am, Why I am, What is this World – What is this Relationship, What is this society? Which was the question for me, How could I walk in it? How could I have been successful by walking unknowingly When I am unaware of myself? The deeper my ignorance was - the more it deepened me in life today. My mysterious smile made my thinking mysterious. Now I have become the path of this mysterious life because I have found myself, my search has become my destination.
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When I gave up on myself, it became Surrender. Then by coming the universe started guiding. In such beautiful times, When the ego starts to drop, a feeling of lightness of deep freedom is created. I have seen then How the great energies of nature flow and give life in abundance.
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What is Silent?
Have you ever wondered Why it is Silent?
Silence is our protection, Which is a natural way of understanding reality. In this Silence is hidden the deep experience of feeling safe from death and in it lies a beautiful way of knowing deeply about existence. As long as I know What is happening to me and to me, then I can understand every incident very well and only then will I be able to accept the incident.
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I really love the truth. I love seeing and understanding the truth. The experience of truth may be bitter, but standing in front of the truth has made my life better. I appreciate truth just for being true, for living in truth. I really love reality, that's Why I've always been in love with love.
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मेरा जागरण पथ




आज मैंने खुदा का हाथ नहीं पकड़ा हुआ, अब खुदा ने मेरे हाथ को पकड़ा है।
 

यह जिंदगी कितनी बेमिसाल है, जो भी यह देती है-लाजावाब ही देती है। 
अगर जीवन अद्भुत है तो यह इस लिए ही है कि हर जीव ही अद्भुत है। 
मेरे लिए मैं ही सब से पहला और सब से कीमती रहस्यमय पन्ना हूँ।
हम ने कभी भी अपने अधूरेपन को दुआ के रूप में नहीं देखा, सिर्फ समस्या के रूप में ही देखा है।  यह अधूरापन एक विधि है -जो हम को जीवन के साथ जोड़ती है- और ज़रुरत बन कर हम को हर जीव के साथ जोड़ती है। यह कमी ही है जो हम सभी को जीवित रखती है, चलती है, बढ़ती है, बनाती है और सबसे महत्वपूर्ण रूप से हमारे जीवन को बदल देती है।
यही बदलाव की सादगी है, जो पल पल बदलती है जिस से हमारा जीना बदलता है।
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हे, यह कुदरत से प्यार है या चुप से प्यार है ! कुदरत की सुंदरता और चुप की ऊर्जा यह दोनों ही मेरे को मेरे अस्तित्व की सुंदरता और चुप की सुंदरता में ले जातें हैं ! जिस से मेरा जीना खुल जाता है और मैं देखती हूँ कि फिर मेरे में 'चुप' ही सांस लेती है और 'कुदरत' ही जन्मती है।
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मैं खुद से ही खुद में अनजान थी- क्यों?; मैं नहीं जानती थी कि मैं कौन हूँ, क्यों हूँ, यह संसार क्या है- यह रिश्तें क्या है, यह समाज क्या है ? जो मेरे लिए सवाल था, मैं उस में चल कैसे सकती थी ? जब मैं ही खुद में खुद से अनजान हूँ, तो मैं अनजाने में ही चल कर कामयाब कैसे हो सकती थी ? मेरा अनजानापनजितना गहरा था- उतना ही आज मेरे को जीवन में गहरा कर गया।  मेरी रहस्यमई मुस्कान ने मेरा सोचना ही रह्सयमई बना दिया।  अब मैं इस रह्सयमई जीवन की राही बन गई क्योंकि मैंने खुद को ढूंढ लिया, मेरा ढूंढ़ना ही मेरी मंज़िल बन गया। 
जब मैंने खुद को छोड़ दिया तो यह छोड़ना ही समर्पण बन गया। तब  आ कर के ब्रह्माण्ड ने  मार्गदर्शन करना शुरू किया। ऐसे सुंदर वक़्त  में जब अहंकार छोड़ के जाने लगता है तो गहरी आज़ादी का हल्कापन अनुभूति बनता है।मैंने देखा है कि फिर कैसे कुदरत की महान ऊर्जाएं प्रवाहित होती हैं और प्रचुर मात्रा में जीवन देती हैं।
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चुप क्या है?
कभी आप ने सोचा कि यह चुप है क्यों?
चुप हमारी सुरक्षा है,  जो वास्तविकता को समझने की कुदरती विधि है।  इस चुप में मौत से अपने आप को सुरक्षित महसूस करने का गहरा अनुभव छुपा हुआ है और इस में अस्तित्व को गहरे से जानने का सुंदर तरीका छुपा हुआ है। जब तक मुझे पता है कि मेरे पास और मेरे साथ क्या हो रहा है तो मैं हर घटना को अच्छे से समझ सकती हूं और तो ही मैं घटना को कबूल करने में समर्थ हो सकती हूं।
मुझे सच में ही सच से प्यार है। सच को देखना और समझना मुझे बहुत ही अच्छा लगता है। सच्चाई का अनुभव चाहे कड़वा ही हो, पर सचाई के आगे खड़े होना मेरे जीने को अच्छा बनाता गया।  मैं सिर्फ सच होने के लिए, सच में जीने के लिए ही सच्चाई की सराहना करती हूं।मुझे सच में ही वास्तविकता से प्यार है इस लिए ही मेरे को सदा प्यार से ही प्यार रहा है। 
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Relationship is meditation in itself

Thursday, May 26

 What is a relationship and Why are We all in a relationship?


Every event in the journey of life is Spirituality, 

Which explains the life from Sannyasa to Nirvana. For me our relationship is also a method





This is What I have always seen and known in relationships, that relationship is the awareness of the interrelationship between two people. Every relationship works as a natural method of meditation. My relationships have created awareness in me, not any religious book or religious place. When we are awakened through relationships and the awareness with which we see and live life and the world, all that becomes religion.














Relationship means meeting without fear, complete freedom to understand each other and freedom to communicate directly with each other in full form.
















Those who love never talk about responsibility. Love itself knows its duty and its right.











Love in itself is a means to a deeper fulfillment and relationship is self-disclosure.








रिश्ता क्या होता है और क्यों हम सब एक रिश्ते में हैं ?

जीवन यात्रा में हर घटना ही अध्यात्म है, जो संन्यास से ले के निर्वाना तक के जीवन को समझाती है। 

 मेरे लिए हमारे रिश्ते भी एक विधि है।

 







मैंने सदा रिश्तों में से यही देखा और जाना है कि रिश्ता दो लोगों के बीच अंतर्संबंध की जागरूकता है। हर रिश्ता एक ध्यान की कुदरती विधि का ही काम करता है। मेरे रिश्तों ने ही मेरे में जागरूकता पैदा की है, किसी धार्मिक किताब या धार्मिक जगह ने नहीं। जब हम रिश्तों के ज़रिये जाग जातें हैं और जिस जागरूकता से जीवन को और संसार को देखते है और जीते हैं, वो सब धर्म बन जाता है। 













रिश्ते का मतलब होता है कि बिना किसी डर के मिलन होना, एक दूसरे को समझने की पूर्ण आजादी और पूर्ण रूप में ही एक दूसरे के साथ सीधे संवाद करने की आजादी होता है। 















जो प्यार करते हैं वो कभी भी जिम्मेदारी की बात नहीं करते। प्यार खुद में ही खुद के फ़र्ज़ को और हक़ को जानता है। 

















प्यार खुद में ही एक गहरा तृप्ति का साधन नाता है और नाता आत्म-प्रकाशन है। 


Moments of Sanyaas

 Let's Live the Moment of Sanyaas
चलो सन्यास के पल को जीयें!



Sannyasa is an Awareness, 
Which has always awakened me How to see and know every event right. 


Always understand this understanding that We get knowledge but intelligence is natural with us.
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सदा इस  समझ को समझ लेना कि ज्ञान की हम प्राप्ति करतें हैं पर बुद्धिमानी हमारे पास  स्वाभाविक है।
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Always keep the truth with ourselves that understanding always accompanies us every moment because understanding is in our present, We have it from the present itself; that means as soon as we were born - the same understanding arose - Which is our ' Just like me is timeless. Meaning that 'Understanding and I' is also one -How?
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सदा  ही यह सच खुद के साथ रखना कि समझ सदा ही ,हर पल हमारे साथ देती  है क्योंकि समझ हमारे वर्तमान में है,वर्तमान से ही हमारे पास है ;मतलब कि जैसे ही हम पैदा हुए-वैसे ही समझ पैदा हुई -जो हमारी 'मैं' की तरह ही कालातीत है। मतलब कि 'समझ और मैं' भी एक है -कैसे?
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Wow ! What is life!
There is something new all the time. Why does this happen? It is something that is always undergoing change, Which always introduces us to newness. Sometimes creating a new feeling and sometimes a new thought – that becomes discovery. This is the beautiful journey of life
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वाह ! क्या है ज़िंदगी !
हर समय कुछ न कुछ नया होता है।  यह क्यों होता है ? यह कुछ ऐसा है जो हमेशा परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जो हम को सदा ही नयेपन से मिलवाता है।  कभी एक नई भावना पैदा कर रहा है और कभी एक नई सोच- जो बन जाती है खोज। यही है ज़िंदगी की खूबसूरत यात्रा 
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We all have always seen that life becomes better with the arrival of someone and the passing of someone - be it a person, a Tree, a Bird or a small gust of Wind - Wow!, but Why?
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हम सब ने सदा ही यह देखा है कि किसी के आने से जीवन बेहतर बनता है और किसी के जाने से- चाहे वो कुछ भी हो, व्यक्ति हो, पेड़ हो, पक्षी हो या  छोटा सा हवा का झोँका ही हो - वाओ!, पर क्यों?
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We have never seen anything incomplete till today, just considered it incomplete. This life of ours is completely complete. Perfection means that in Which there is no mistake and no obstruction. The Law of the Whole universe works in an immutable form, this is What We call spiritual life and law.
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हम ने आज तक कभी भी कुछ भी अधूरा नहीं देखा, बस अधूरा समझा है।  हमारा यह जीवन पूर्ण रूप में सम्पूर्ण है। पूर्णता का अर्थ है कि जिस में कोई भी गलती न हो और रुकावट न हो।  तमाम ब्रह्माण्ड का कानून अपरिवर्तनीय रूप में काम करता है,इस को ही हम आध्यात्मिक जीवन और नियम कहतें हैं। 
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Whenever any person thinks about life creatively, the results are creative and harmonious. If anyone thinks destructively, ONE reaps What One sows.
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जब भी कोई भी व्यक्ति जीवन के बारे में रचनात्मक रूप से सोचता है, तो परिणाम रचनात्मक और सामंजस्यपूर्ण होते हैं। यदि कोई भी व्यक्ति विनाशकारी रूप से सोचता है, तो वह वही काटता है जो वह बोता है। 
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It is also to be heard carefully that the Law of the universe works perfectly. We don't see any incomplete results. We can freely choose What We think, but the outcome of our thought is governed by an immutable Law—Which then cannot be changed.
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यह बात भी ध्यान से सुनने की है कि ब्रह्मण्ड का कानून पूरी तरह से काम करता है। हमें कोई भी अपूर्ण परिणाम नहीं दिखता है। हम जो सोचते हैं उसे स्वतंत्र रूप से चुन सकते हैं, लेकिन हमारे विचार का परिणाम एक अपरिवर्तनीय कानून द्वारा ही नियंत्रित होता है- जो फिर बदला नहीं जाता। 
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The brain of every living being is the finest and most alive system in existence. Every time We think We send a design into the formless energy by Which and by Which it spreads in the universe.
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हर जीव का मस्तिष्क अस्तित्व में सबसे बेहतरीन और सबसे जीवंत तंत्र है। हर बार जब हम सोचते हैं कि हम निराकार ऊर्जा में एक डिज़ाईन भेजते हैं जिससे और जिसके द्वारा ब्रह्मण्ड में फैला होता है। 
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There is also a deep beauty of life that whatever We have done or have done cannot be undone. Now We can see it, understand it, learn from it and change. So that every moment of our coming is not spent in every moment, every remorse, guilt, fear and anger, but in knowledge, understanding and love...
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जीवन की यह भी एक ओर गहरी सुंदरता है कि हम ने जो कर लिया या कर दिया, उसे पूर्ववत नहीं किया जा सकता। अब हम इसे देख सकते हैं, इसे समझ सकते हैं, इससे सीख सकते हैं और बदल सकते हैं। ताकि हमारा आने वाला हर वक़्त हर पल, हर पश्चाताप, अपराधबोध, भय और क्रोध में नहीं बल्कि ज्ञान, समझ और प्रेम में व्यतीत हो...
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संन्यास एक जागरूकता है, जिस ने मेरे को सदा ही जगाया है कि हर घटना को कैसे सही देखना और सही जानना है।

A Spiritual Traveler

Tuesday, April 26

When I stayed in me, I remembered Buddha, Why?




I was seeing and listening to the dominance of religion all around.
 But if religion was not visible in anyone's movement, 
then my eyesight ordered my walking feet to stop.
 This stop of mine took me in the right direction.

Everyone around me was taking part in the race for money 
or was preparing to take part. 
The hunger for money was understood When I saw the rich man running too.
 Something stopped in me again. 
This stay of mine gave me that richness Which never ends.

A false feeling in sweet words; Something on the tongue -
 something else in the character; Carrying out kinship with an empty mind,
 giving up one's existence for a false nose; 
Wow! Couldn't happen to me. Something stopped - 
Something stopped inside me again that 
my auspicious journey has become an auspicious time.

There has to be a very deep Stop, that is called a Pause, 
When it comes
, the person becomes a Spiritual Traveler.

Every step I stopped, always reminded me of Buddha. 
When someone's Death stopped Buddha,
 Buddha left the house in 'Quest to know Death'.
Who stopped me?
1- Understanding, 
2- Soul,
 3- God,    
 4, My past Sanskars,
 5- According to deeds, 
or 
Someone's blessings!
'Pause', How did it start to Stop?
Till date I have seen myself stop in every incident. 
That pause comes from my consciousness. 
'Consciousness' 
- That feeling, Which has been sitting silently inside me in a very deep silence.
 I have always looked towards it and that 
consciousness always gives me happiness, peace, comfort and freedom. 
I have questioned it many times with gestures, 
and consciousness has always given me the right answers for experimentation.
My Pause saved me from every incident and made me successful in living. 
Then I also asked myself that if this thing happens with all human beings,
 then Why don't all Stop then?
Then my question would be to myself that 'How do I Stop,
 And Why do I Stop?
There must be some Thought or some Emotion working behind this?
What is That?
When I ask a question with my eyes closed, 
the answer already bows its head and salutes.
 In my slight smile, love and thanks for the universe blossom.
I don't want to win two days,
 I wanted to live life, not to win any part of World. 
The race of the world was focused on winning, 
and no one would win. 
Even if someone wins for a few years, death defeats.
 I never lose, So I have to Win that Victory, 
Which never loses -
 Which even death cannot defeat. 
Which is that win or that race?
 I wanted to win myself.
 My race went with my every thought;
My competition has always been my Feeling;
I was against me,
 because my opposition was with the world within me, 
Which was imprisoned in pain, suffer, tension, suffocation, helplessness, restlessness  
and diseases.
When I got my freedom from me, I got first position in every race.
Today I am a person full of blessings that no time will defeat me 
but will take me with itself; 
No death will imprison and no bond will limit 
– because today the universe has to maintain friendship.

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जब मेरे में ठहरा आया तो बुद्धा की याद आई, क्यों?




मैं चारों तरफ धर्म का ही बोलबाला देख रही थी और सुन रही थी।  
पर किसी की चाल में धर्म दिखाई दिया ही नहीं 
तो मेरी देखनी ने मेरे चलते पैरों को रुकने का हुक्म दिया।
मेरा यह रुकना मेरे को सही दिशा की ओर ले गया।

मेरे आस-पास सब पैसे की दौड़ में हिस्सा ले रहे थे या हिस्सा लेने की त्यारी कर रहे थे।
पैसे की भूख उस वक़्त समझ में आ गई ,
जब मैंने अमीर व्यक्ति को भी दौड़ते हुए देखा।मेरे में कुछ फिर ठहर गया। 
 मेरा यह ठहरना मेरे को वो अमीरी दे दिया
 -जो कभी भी खत्म नहीं होती। 

मीठे बोलो में झूठी भावना; 
 ज़ुबान पर कुछ- किरदार में कुछ ओर;  खाली मन से रिश्तेदारी को निभाना, 
झूठी नाक केलिए खुद के अस्तित्व को हार देना ; 
वाओ ! मेरे से हो न सका. कुछ रुका - 
मेरे ही भीतर कुछ ऐसा रुका फिर से कि मेरी शुभ-यात्रा का शुभ महूर्त हो गया।

एक बहुत  ही गहरा रुक जाना होता है,उस को पॉज कहतें हैं,
जब वो आता है तो व्यक्ति अधियात्मिक-यात्री बन जाता है।

मेरे रुकते हर कदम ने सदा ही मुझे बुद्धा की याद दिलवाई। 
किसी की मौत ने बुद्धा को रोका तो बुद्धा 'मौत को जानने की तलाश' में  घर से चले गए। 
मुझे किस ने रोका?
१- समझ ने 
२- आत्मा ने, 
३- परमात्मा ने, 
४, मेरे बीत चुके संस्कारों ने, 
५- कर्मों के हिसाब ने,
 या 
किसी के आशिर्बाद ने!
'रुकना' , ठहर जाना कैसे चलने लगा?    
आज तक मैंने खुद को हर घटना में रुकते देखा है।
 वो रुकना, मेरी चेतना से आता है। 
 'चेतना'- वो एहसास, जो बहुत ही गहरी चुप में मेरे भीतर चुप कर बैठा है।  
 मैंने सदा उसी ओर देखा है और वो चेतना सदा मेरे को सुख, शांति, ख़ुशी और आज़ादी देती है। 
 मैंने इशारे से बहुत बार उस से सवाल किए हैं, 
और चेतना ने सदा ही मेरे को प्रयोग के राहीं जवाब दिए हैं।  
मेरे रुकने ने मेरे को हर घटना से बचाया 
और मेरे को जीने में सफल किया। 
फिर मैंने खुद को सवाल भी किया
 कि यह तो सब इंसानों के साथ बात घटित होती होगी 
तो सब फिर रुकते क्यों नहीं?  
फिर मेरा सवाल खुद को ही होता कि 'मैं कैसे रुक जाती हूँ,
 और क्यों रुक जाती हूँ ? 
इस के पीछे ज़रूर कोई सोच या कोई भाव काम करता होगा ?
वो क्या है?
जब आँखों को बंद करके सवाल पूछती हूँ 
तो जवाब पहले ही अपना सर झुका कर सलाम कर देता है। 
 मेरी हलकी सी मुस्कान में ब्रह्मण्ड के लिए प्यार, और धन्यवाद खिल जाता है। 
मेरे को दो दिन की जीत नहीं चाहिए, 
मैं ज़िंदगी को जीना चाहती थी, किसी भी हिस्से को जीतना नहीं। 
 संसार की दौड़ जीतने पर लगी हुई थी, और कोई जीतता भी नहीं था। 
 अगर कोई थोड़े से सालों तक जीत भी जाता तो मौत हरा देती है। 
सो मेरे को कभी हारन  नहीं दिया , सो मैंने वो जीत प्राप्त करनी है,
 जो कभी हारती नहीं- जिस को मौत भी नहीं हरा सकती।  
वो जीत  या वो दौड़ कौन सी है ?
 मैं खुद को जीतना चाहती थी। 
 मेरी दौड़ मेरी हर सोच के साथ रही;
मेरी प्रतियोगता सदा मेरी ही भावना रही ;
मैं ही मेरे विरोध में रही, 
क्योंकि मेरा विरोध मेरे भीतर के उस संसार के साथ था, 
जो दुःख-दर्द, तकलीफ, तनाव, घुटन, बेबसी, लाचारी और रोगों की क़ैद में था। 
मेरी मेरे से आज़ादी जब मिली 
तो मैंने हर दौड़ में पहली पोजीशन प्राप्त कर ली। 
आज मैं एक दुआ से भरी हुई एक शख्सियत हूँ
 कि मेरे को कोई भी वक़्त हरायेगा नहीं बलिक साथ ले कर चलेगा;
 कोई भी मौत क़ैद नहीं करेगी और कोई भी बंधन सीमत नहीं करेगा- 
क्योंकि आज ब्रह्मण्ड ने दोस्ती निभानी है।  
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Sound of Moments

Saturday, April 23

 Sound of Moments



What should I say! Today the story of my wonderful life in each of my conversations identifies me with its voice and mystery.





That moment of silence when it is in full depth, which is so wonderful and beautiful - that takes existence to the heights - how does that moment enjoy the journey of the ages - Wow! Then living, alive, learning and growing in it is a wonderful life journey!
Just:I will continue to enjoy my journey, destination and myself forever!
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चुप का वो पल जब पूर्ण गहराई में होता है तो ,जो बहुत ही अद्भुत और खूबसूरत होता है- जो अस्तित्व को उचाई पर ले जाता है - वो पल कैसे युग की यात्रा का आनंद देता है- वाओ ! फिर उस में रहना, जिंदा, सीखना और बढ़ना एक अद्भुत जीवन यात्रा है!
अभी: मैं अपनी यात्रा, गंतव्य और खुद का आनंद सदा ही लेती रहूंगी !
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Today I came to know that even though life opens many doors everyday that we can do a lot, but today I only do what makes my life happy. My silence always becomes my guide. My silence has always explained one thing to me that - 'Whatever you are afraid of doing, you have to do that first', then I surrender myself to the universe and start moving ahead with blessings.
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आज मैं जान गई कि चाहे जीवन हर रोज़ बहुत से दरवाज़े खोलता है कि हम बहुत कुछ कर सकतें हैं, पर आज मैं सिर्फ वो ही करती हूँ, जो मेरे जीने को ख़ुशी दे। मेरी चुप सदा ही मेरा' मार्ग-दर्शक बनती है। मेरी चुप ने सदा ही मेरे को एक बात समझाई है कि -'आप को जो भी करने से डर लगता है, पहले वो ही करना है', फिर मैं खुद को ब्रह्मण्ड के समर्पित करके आशीर्वाद से आगे बढ़ने लगती हूँ। 
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Is it the light of the sun or my dedication?
Today is the day for me to take a leap of faith and fly. I have always had only one principle in life that I should never allow myself to suffer, which has taught me to always be in balance. With the same principle, my life was starting to become free and today I have started flying in love and reverence in the sky of trust that I am free.
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यह रौशनी सूर्य की है या मेरे समर्पण की!
आज मेरे लिए भरोसे में छलांग लगाने का और उड़ने का दिन है। जीवन में  सदा मेरा एक ही सिद्धांत रहा है कि मैंने कभी भी खुद को दुःख नहीं आने देना , जिस ने मुझ को सदा ही संतुलन में रहना सीखा दिया।  एक ही सिद्धांत से मेरा जीना मुक्त  होने लगा था और आज मैं ही आज़ाद हो के भरोसे के आसमान प्यार और श्रद्धा में उड़ने लगी हूँ।
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How successful and wonderful every moment of today is!
I want to gift everyone on such moments. In these moments there is love, reverence, trust, belonging and a very deep gratitude - which will bring happiness and peace to everyone's life. This is the gift I am sending - to accept.
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आज का हर पल कितना सफल और अद्भुत है!
इस तरह के पलों को ही मैं सब को तोहफा देना चाहती हूँ। इन पलों में प्यार, श्रद्धा , भरोसा, अपनापन और बहुत ही गहरा आभारीपन होता है - जो हर एक के जीने को ख़ुशी और शांति ही देगा।आज चलते चलते, हंसते हुए और प्रार्थना करते हुए मैं अपने आप को भी और तमाम ब्रह्मण्ड को भी यही तोहफा भेज रही हूँ - कबूल करना। 
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I myself have always seen every thought, every feeling, and every step while on the journey of awakening. This journey of mine has always shown and explained amazing accidents to me. I wake up everyday, looking for myself and still seeing myself becoming.
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मैंने सदा ही खुद ही हर सोच, हर भावना, और हर कदम को जागृति यात्रा करते ही देखा है। मेरी इस यात्रा ने सदा ही मुझ को आश्चर्यजनक हादसे ही दिखाए और समझाएं  हैं। मैं हर रोज जागती  हूं, खुद की तलाश करते हुए भी खुद को बनता ही देखती हूँ। 


क्या कहूँ! आज मेरे हर पलों में अद्भुत जीवन की दास्तान अपनी आवाज़ से 
और रहस्य से मेरी पहचान करवाती है। 

Conversation with the Moment

Friday, April 22

Conversation with the Moment



That small moment of birth and death, in the length of which the ages travel, the wonderful feeling of wanting a point is in this experience.

(What am I doing at this moment?)
0- I am writing...
1 -   Why?
0-My experience is very sweet, I want to share my life with everyone...
 1-Means you want to fill everyone with the feeling of color of beautiful experience?
0-   Absolutely right...
1-Now look at this in such a way that whatever you are doing, you will call this 'here and now'; but this is also a game of the universe. Whatever you think that - 'I am doing this' - it is not you that the whole universe is engaged in this.
0-  How?
1- Now understand this in such a way that when you see that a bubble is being formed on the power of water, is this bubble creating itself or all this is happening in the power of all the water. The temperature of the water, the air in the water, the space in the water and the water, which has also taken the form of matter - all of them were involved in making this bubble on the power of water - right?
0- Get it - Exactly right...
1- Now look deep into this experience again!
0 - What to see?
1- You are writing - this is your moment - ok isn't it?
0 -   Yes...
1- In this moment you are narrating your experience, now look carefully that there is another experience in this experience. What you are talking about - it has passed; And what you are writing - it is now 'the moment of the moment'. What is the reality of this present moment?
0- Write mine
1- What are you writing
0- My experience a while back...
1-means that the experience of the past
0- Yes...
1-This was the first experience, and What is it now?
0- Maybe my understanding, my Trust!
1- When you were having this experience, it seemed real, or does the one who is telling that experience now, does it also seem real?
0- Both look the same...
1-Meaning that from the time this experience of yours started, then like a wave, this experience is passing through your space?
0 -  Yes...
1-Do you think that When you have written this experience, then this experience will be absorbed like a wave, or will it go further?
0- Will move forward, some people will read and some will hear from me....
1- Means whether the wave is absorbed or will it continue to flow?
0- It seems like it now...
1-Now you see how your consciousness is understanding all this and tell me?
0- Now my experience has changed, When I started experiencing it earlier, I was feeling a wave in that experience, Which had risen from the ocean. Now I find myself looking at the ocean, out of which this wave has risen and gone. But it didn't end.
1- Is it over for you?
0- No, because that wave is still in me and is sitting quietly in my being...
1- Means it's no longer functional?
0- It is functional, I see that It will remain functional, as long as the ocean remains.
1- How?
0 - Just like the form, color and shape of everything changes - in the same way... When someone reads - if one likes it, then the beauty of a goodness was born, and if that person would describe it further, then the circle of beauty started expanding. My first few moments of experience took the form of beauty...
1- Come on now tell me how did you come to know this and what is the experience behind which beauty - How is it recognized - tell that?
0- As:
I love changing things - Why? It is only the changing of a changing thing that makes me feel its worth. Changing is a sign of vitality as well as a sense of activity. 'Changing' also makes us experience our vastness, eternity and infinite. It doesn't mean that I love someone's wrong intentions, I love the flow of one's energy. Behind this act of change, the nature of the universe gives me this information that our changing nature is positive. Meaning that change is doing something from which the whole universe's policy is flowing.
1- How?
0- In reality, Today I look at that point, from which it is only visible that this system of the universe is a complete unit, like our body and ocean.
1- Do you think that if you are a universe then you can do anything to anyone?
0- The identity of every living being has started coming to me very deeply. With that comes an understanding in me that this person's policy is like this and this person should do it? If that person keeps on doing the same then one goes towards happiness and if one doesn't then one goes towards trouble. But I can never do anything to anyone. I see that the universe has a deep policy - there is something in that policy that every dimension has its own Law and Discipline. If I am in such a dimension today, then there must be some such persons with me, from whom I have to have something and from me, that will definitely happen.
 1- Does it mean that today everything has changed for you in this world?
0- Exactly right, this world itself is a magic full of mystery - Which changes only by the Thinking of the person. Now a very deep end of my journey is coming. In this time of mine, only that person will clash with me - Whose understanding or thinking will be like mine. When the understanding is the same, it will become very deep and firm – due to which some newness will happen.
1- It is a bit difficult to understand this, how to understand?
0- One has to travel with the rising sun and the other with the setting sun. The rising or setting of the sun - is a system - is not in reality - just like life and death.
1- Then how do you see life and death now?
0 -  Today only one point is absent in me, like everything else is in front of me. The glimpse of that point comes in me but does not stop. That point is very strange, I feel that today's life is making me worthy of that point.
1-  Still, according to today's understanding, What would you call that point?
0 -  I have zero % understanding about that point. I understand that point because all my experiences have come to me like this. I have come to know about how this universe gives me experience and understanding, so I am 100% right to say so.
1- Is that point 'Nirvana'?
0-  I don't think...
1- Why not?
0- As much as religious books have been able to give information to me, according to that I do not understand this. If this point is the stage of 'Nirvana' then I will have to say that till date any religion has openly 'Nirvana' Did not say about it at all. Or today's time could not explain the 'Nirvana' stage.
1- Can you tell that if you get that point then What will be your stage at that point?
0-  I think that point is such a point, which will give my freedom to enter into Death and Birth.
1-Meaning that you can die and take birth of your own choice?
0- I feel this way today...
1- Can We know the reason for this feeling?
0- Today if it was not for this reason, I would have been dead. Because since childhood, I have had a deep desire that I have to live both death and life together forever. Till today God has fulfilled every wish, so it will also do it.
1- I have no words, may God fulfill your wish - Amin!
(In my silent silence, waves of smile and thanks were waving)
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जन्म और मौत का वो छोटा सा पल, जिस की लंम्बाई में युग यात्रा करतें हैं, 
वैसे बिंदु की चाहना का अद्भुत एहसास इस अनुभव में है। 

पल के साथ वार्तालाप



(इस पल में 'मैं' क्या कर रही हूँ ?) 
= मैं लिख रही हूँ...
-   क्यों?
= मेरा अनुभव बहुत ही प्यारा है, मेरा जीवन सब के साथ सांझा करना चाहती  है... 
- मतलब कि सब को सुंदर अनुभव की रंगत की महसूसियत से भरना चाहती हो?
=  बिलकुल सही... 
-  अब्ब इस को ऐसे देखो कि आप जो कर रही हो, इस को आप 'यहाँ और अभी' कहोगी ;पर यह सब ब्रह्मण्ड का खेल भी है. यह जो आप सोचती हो कि -'यह मैं कर रही हूँ'- यह आप नहीं पूरा ब्रह्मण्ड ही इस में लगा हुआ है। 
=  कैसे?
-  अब इस को ऐसे समझो कि जब आप देखती हो कि पानी की सत्ता पर बुलबला  बन रहा है , क्या यह बुलबला  खुद में खुद को खड़ा कर रहा है या तमाम पानी की सत्ता  में यह सब हो रहा है।  पानी का तापमान , पानी में हवा , पानी में स्पेस और पानी ,जिस ने पदार्थ का रूप भी लिया हुआ है - वो सब ही पानी की सत्ता पर यह बुलबला बनाने में सलग्न थे- ठीक है न?
=  समझ आती है- बिलकुल सही... 
- अब इस अनुभव को फिर गहरे में से देख!
 =   क्या देखना है ?
- आप लिख रही हो- यह आप का अभी का पल है- ठीक है न?
=   हाँ... 
- इस पल में आप ने अपना अनुभव ब्यान कर रही हो, अब गौर से देखो कि इस अनुभव में एक अनुभव ओर  भी है। जो आप ब्यान कर रही है- वो बीत चूका है ; और जो आप लिख रही हो- यह अब 'अभी का पल' है।  इस अभी के पल की सचाई क्या है ?
=  मेरा लिखना 
- लिख क्या रही हो?
= मेरा कुछ देर पहले का अनुभव... 
- मतलब कि बीत चुके पल का अनुभव 
= हाँ... 
- यह पहले अनुभव था, और अब क्या है ?
=  शयद मेरी समझ , मेरा भरोसा !
- जब आप को यह अनुभव हो रहा था, वो असली लगता था, या जो अब उस अनुभव को बता रही हो, यह भी असली लगता है ?
= दोनों एक जैसे ही लगतें हैं... 
- मतलब कि जब आप का यह अनुभव शुरू हुआ, तब से ले के एक लहर की तरह यह अनुभव आप  की स्पेस में से गुज़र रहा है?
=  हाँ... 
- क्या आप सोचती हो कि यह अनुभव जब आप ने लिख दिया, तो यह अनुभव लहर की तरह लीन  हो जाएगा, या आगे भी बढ़ेगा?
= आगे बढ़ेगा, कुछ व्यक्ति पढ़ेगे और कुछ मेरे से सुनेंगे.... 
- मतलब कि लहर लीन हो कि भी बहती रहेगी?
= अब लगता तो ऐसे ही है... 
- अब आप देखो कि आप की चेतना इस सब को कैसे समझ रही है और मेरे को ब्यान करो?
=  अब मेरा अनुभव बदल गया है, पहले जब अनुभव होने लगा था तो मैं उस अनुभव में खुद को एक लहर महसूस कर रही थी, जो सागर में से उठी थी। अब मैं खुद को सागर देख रही हूँ, जिस में से यह लहर उठी है और चली भी गई। पर यह खत्म नहीं हुई। 
- आप के लिए तो खत्म हो गई है ?
=  नहीं, क्योंकि वो लहर अब भी मेरे में है और मेरी सत्ता में शांत बैठी है... 
- मतलब कि अब किर्याशील नहीं?
=  वो किर्याशील ही है, मैं देख रही हूँ कि वो किर्याशील ही रहेगी, जब तक सागर रहेगा। 
- कैसे?
=  जैसे हर चीज़ का रूप रंग आकार बदलता है- वैसे ही... जब कोई पढ़ेगा - अगर उस को अच्छा लगेगा तो एक अच्छेपन की सुंदरता का जन्म हो गया, और वो व्यक्ति आगे इस को ब्यान करेगा तो सुंदरता का घेरा बढ़ने लगा।  मेरे कुछ देर पहलों के अनुभव ने सुंदरता का रूप धारण कर लिया... 
- चल अब यह बता कि आप को यह कैसे पता चला और कौन सी सुंदरता के पीछे कौन सा अनुभव होता है- उस की पहचान कैसे होती है- वो बताओ?
= जैसे;
मेरे को बदलती चीज़ बहुत पसंद आती है - क्यों? मेरे को बदलती चीज़ का बदलना ही उस की योग्यता को अनुभव करवाता है। बदलना जिन्दापन की निशानी के साथ साथ किर्यशीलता का भी एहसास देता है। 'बदलना', हमारी विशालता, अनंतता और विराटता का भी अनुभव करवाता है।जब व्यक्ति भी बदलता है तो ,चाहे नकारत्मिक ही बदले, मुझे उसी यह प्रकिर्या से प्यार है।  मतलब यह नहीं कि मुझे उस के गलत इरादे से प्यार है, उस की ऊर्जा के बहा से प्यार है। बदलने की इस किर्या के पीछे  ब्रह्मण्ड के स्वाभाव से मुझे यह जानकारी मिलती है कि हमारा बदलता स्वाभाव  सकारत्मिक है। मतलब कि बदलना कुछ ऐसा कर रहा है जिस से पूर्ण ब्रह्माण्ड की नीति बह रही है।  
- कैसे?
= असलियत में आज उस बिंदु पर नज़र जाती है, जिस में से सिर्फ यही दिखाई देता है कि यह ब्रह्मण्ड का सिस्टम एक सम्पूर्ण इकाई है, जैसे हमारा जिस्म और सागर। 
-  क्या आप को लगता है कि अगर आप ब्रह्मण्ड हो तो आप किसी को भी कुछ भी कर सकती हो?
= हर जीव की पहचान मेरे को बहुत गहराई से आने लगी है। उस के साथ ही मेरे में एक समझ जन्म लेती है कि इस व्यक्ति की नीति ऐसी है और इस व्यक्ति को यह करना चाहिए? अगर वो व्यक्ति वोही करता जा रहा है तो वो सुख की ओर जाता है और जो नहीं करता तो वो तकलीफ की ओर जाता है। पर मैं किसी को कुछ कभी नहीं कर पाऊँगी।  मैं देखती हूँ कि ब्रह्मण्ड की एक गहरी नीति  है- उस नीति  में कुछ ऐसा भी है कि हर आयाम का अपना  ही कानून और अनुशाशन होता है।  अगर मैं आज एक ऐसे आयाम में हूँ तो वहां पर मेरे साथ कुछ तो ऐसे व्यक्ति होंगे ही, जिन से मेरा और मेरे से जिन का कुछ न कुछ तो होना ही है- वो ज़रूर होगा। 
 - मतलब कि आज आप का इस संसार में ही सब बदल गया?
=  बिलकुल सही, यह संसार ही एक एक रहस्य से भरा जादू है- जो व्यक्ति की सोच से ही बदल जाता है। अब मेरी यात्रा का एक बहुत गहरा अंत आ रहा है। मेरे इस वक़्त में मेरे साथ वोही व्यक्ति टकराएगा - जिस की समझ या सोच मेरे जैसी होगी।  जब समझ एक जैसी होगी तो बहुत गहरी और पक्की हो जायेगी- जिस से कुछ ओर नयापन घटित होगा। 
-  इस को समझने में थोड़ी सी मुश्किल महसूस होती है, कैसे समझूँ?
=  एक ने उदय होते सूर्य के साथ यात्रा करनी है और दूसरे ने अस्त होते सूर्य के साथ।सूर्य का उदय होना या अस्त होना- एक सिस्टम है - असलियत में है नहीं- ठीक वैसे ही जैसे जीवन और मौत।
- फिर आप अब जीवन और मौत को कैसे देखती हो?
= आज मेरे में सिर्फ एक बिंदु गैरहाज़िर होता है , बाकी सब जैसे मेरे आगे ही है। उस बिंदु की झलक मेरे में आती है पर ठहरती नहीं। वो बिंदु बहुत ही अजीब सा है, मेरे को यह लगता है कि मेरा आज का जीवन मेरे को उस बिंदु के काबिल बना रहा है। 
- फिर भी आज की समझ अनुसार आप उस को क्या कहोगी?
=  मेरे में उस बिंदु के बारे में जीरो % समझ है।  मैं समझती उस बिंदु को इस लिए हूँ कि मेरे सब अनुभव ऐसी ही मेरे पास आएं हैं।  मैं यह जान गई हूँ कि मेरे को यह ब्रह्माण्ड कैसे अनुभव और समझ देता है, इस लिए मेरा कहना मेरे लिए १००% ठीक है। 
- क्या वो बिंदु 'निर्वाना' है ?
= मेरे को नहीं लगता... 
- क्यों नहीं?
= जितना भी मेरे को धार्मिक किताबें जानकारी दे पाई हैं, उस हिसाब से मेरी यह समझ नहीं है।अगर यह बिंदु 'निर्वाना' की ही स्टेज है तो फिर मेरे को यह कहना पड़ेगा कि आज तक किसी भी धर्म ने खुल कर 'निर्वाना' के बारे में कहा ही नहीं।या आज का वक़्त 'निर्वाना' स्टेज को ब्यान ही नहीं कर पाया।
- क्या आप यह बता सकती हो कि अगर आप को वो बिंदु मिल जाएगा तो उस बिंदु पर आप की स्टेज क्या होगी?
= मेरे को लगता है कि वो बिंदु एक ऐसा बिंदु है, जो मेरे को मौत और जन्म में दाखिल होने की आज़ादी देगा। 
- मतलब कि आप अपनी मर्ज़ी से मर सकती हो और जन्म ले सकती हो ?
= मेरे को आज यही लगता है
- ऐसे लगने की वजह को क्या हम जान सकते हैं?
= आज अगर यह वजह न होती तो मैं मर चुक्की होती।क्योंकि बचपन से ही मेरे में यह चाहना गहरी रही है कि मैंने मौत और जीवन दोनों को सदा साथ जीना है।  आज तक परमात्मा ने हर चाहना पूर्ण की है, तो यह भी करेगा। 
- मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं, परमात्मा आप की चाहना पूर्ण करे - अमीन !
(मेरी चुप में घुली शान्ति में मुस्कान और धन्यवाद की तरंगें लहरा रही थी।)   

Amazing Nature

Amazing Nature
When following the Trail of Colorful Emotions and Beautiful Divine Connection, Then Life blossoms, Love begins to flow because True and Pure feeling is the living land of Love and a more beautiful abode to live in the Heart during the JOURNEY OF LOVE Creating is a priceless feeling. But in Those moments there are some of the most amazing Moments too, Which become functional to see Life in full Bloom with Divine Connection and Divine Action like SPRING. When Our Thoughts also Blossom in our Life. It is these Moments that make us Aware and make OUR life an ART OF JOY...