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Let's Walk Like a Mystic

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The death of Ego/block-2

A Spiritual Traveler

Tuesday, April 26

When I stayed in me, I remembered Buddha, Why?




I was seeing and listening to the dominance of religion all around.
 But if religion was not visible in anyone's movement, 
then my eyesight ordered my walking feet to stop.
 This stop of mine took me in the right direction.

Everyone around me was taking part in the race for money 
or was preparing to take part. 
The hunger for money was understood When I saw the rich man running too.
 Something stopped in me again. 
This stay of mine gave me that richness Which never ends.

A false feeling in sweet words; Something on the tongue -
 something else in the character; Carrying out kinship with an empty mind,
 giving up one's existence for a false nose; 
Wow! Couldn't happen to me. Something stopped - 
Something stopped inside me again that 
my auspicious journey has become an auspicious time.

There has to be a very deep Stop, that is called a Pause, 
When it comes
, the person becomes a Spiritual Traveler.

Every step I stopped, always reminded me of Buddha. 
When someone's Death stopped Buddha,
 Buddha left the house in 'Quest to know Death'.
Who stopped me?
1- Understanding, 
2- Soul,
 3- God,    
 4, My past Sanskars,
 5- According to deeds, 
or 
Someone's blessings!
'Pause', How did it start to Stop?
Till date I have seen myself stop in every incident. 
That pause comes from my consciousness. 
'Consciousness' 
- That feeling, Which has been sitting silently inside me in a very deep silence.
 I have always looked towards it and that 
consciousness always gives me happiness, peace, comfort and freedom. 
I have questioned it many times with gestures, 
and consciousness has always given me the right answers for experimentation.
My Pause saved me from every incident and made me successful in living. 
Then I also asked myself that if this thing happens with all human beings,
 then Why don't all Stop then?
Then my question would be to myself that 'How do I Stop,
 And Why do I Stop?
There must be some Thought or some Emotion working behind this?
What is That?
When I ask a question with my eyes closed, 
the answer already bows its head and salutes.
 In my slight smile, love and thanks for the universe blossom.
I don't want to win two days,
 I wanted to live life, not to win any part of World. 
The race of the world was focused on winning, 
and no one would win. 
Even if someone wins for a few years, death defeats.
 I never lose, So I have to Win that Victory, 
Which never loses -
 Which even death cannot defeat. 
Which is that win or that race?
 I wanted to win myself.
 My race went with my every thought;
My competition has always been my Feeling;
I was against me,
 because my opposition was with the world within me, 
Which was imprisoned in pain, suffer, tension, suffocation, helplessness, restlessness  
and diseases.
When I got my freedom from me, I got first position in every race.
Today I am a person full of blessings that no time will defeat me 
but will take me with itself; 
No death will imprison and no bond will limit 
– because today the universe has to maintain friendship.

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जब मेरे में ठहरा आया तो बुद्धा की याद आई, क्यों?




मैं चारों तरफ धर्म का ही बोलबाला देख रही थी और सुन रही थी।  
पर किसी की चाल में धर्म दिखाई दिया ही नहीं 
तो मेरी देखनी ने मेरे चलते पैरों को रुकने का हुक्म दिया।
मेरा यह रुकना मेरे को सही दिशा की ओर ले गया।

मेरे आस-पास सब पैसे की दौड़ में हिस्सा ले रहे थे या हिस्सा लेने की त्यारी कर रहे थे।
पैसे की भूख उस वक़्त समझ में आ गई ,
जब मैंने अमीर व्यक्ति को भी दौड़ते हुए देखा।मेरे में कुछ फिर ठहर गया। 
 मेरा यह ठहरना मेरे को वो अमीरी दे दिया
 -जो कभी भी खत्म नहीं होती। 

मीठे बोलो में झूठी भावना; 
 ज़ुबान पर कुछ- किरदार में कुछ ओर;  खाली मन से रिश्तेदारी को निभाना, 
झूठी नाक केलिए खुद के अस्तित्व को हार देना ; 
वाओ ! मेरे से हो न सका. कुछ रुका - 
मेरे ही भीतर कुछ ऐसा रुका फिर से कि मेरी शुभ-यात्रा का शुभ महूर्त हो गया।

एक बहुत  ही गहरा रुक जाना होता है,उस को पॉज कहतें हैं,
जब वो आता है तो व्यक्ति अधियात्मिक-यात्री बन जाता है।

मेरे रुकते हर कदम ने सदा ही मुझे बुद्धा की याद दिलवाई। 
किसी की मौत ने बुद्धा को रोका तो बुद्धा 'मौत को जानने की तलाश' में  घर से चले गए। 
मुझे किस ने रोका?
१- समझ ने 
२- आत्मा ने, 
३- परमात्मा ने, 
४, मेरे बीत चुके संस्कारों ने, 
५- कर्मों के हिसाब ने,
 या 
किसी के आशिर्बाद ने!
'रुकना' , ठहर जाना कैसे चलने लगा?    
आज तक मैंने खुद को हर घटना में रुकते देखा है।
 वो रुकना, मेरी चेतना से आता है। 
 'चेतना'- वो एहसास, जो बहुत ही गहरी चुप में मेरे भीतर चुप कर बैठा है।  
 मैंने सदा उसी ओर देखा है और वो चेतना सदा मेरे को सुख, शांति, ख़ुशी और आज़ादी देती है। 
 मैंने इशारे से बहुत बार उस से सवाल किए हैं, 
और चेतना ने सदा ही मेरे को प्रयोग के राहीं जवाब दिए हैं।  
मेरे रुकने ने मेरे को हर घटना से बचाया 
और मेरे को जीने में सफल किया। 
फिर मैंने खुद को सवाल भी किया
 कि यह तो सब इंसानों के साथ बात घटित होती होगी 
तो सब फिर रुकते क्यों नहीं?  
फिर मेरा सवाल खुद को ही होता कि 'मैं कैसे रुक जाती हूँ,
 और क्यों रुक जाती हूँ ? 
इस के पीछे ज़रूर कोई सोच या कोई भाव काम करता होगा ?
वो क्या है?
जब आँखों को बंद करके सवाल पूछती हूँ 
तो जवाब पहले ही अपना सर झुका कर सलाम कर देता है। 
 मेरी हलकी सी मुस्कान में ब्रह्मण्ड के लिए प्यार, और धन्यवाद खिल जाता है। 
मेरे को दो दिन की जीत नहीं चाहिए, 
मैं ज़िंदगी को जीना चाहती थी, किसी भी हिस्से को जीतना नहीं। 
 संसार की दौड़ जीतने पर लगी हुई थी, और कोई जीतता भी नहीं था। 
 अगर कोई थोड़े से सालों तक जीत भी जाता तो मौत हरा देती है। 
सो मेरे को कभी हारन  नहीं दिया , सो मैंने वो जीत प्राप्त करनी है,
 जो कभी हारती नहीं- जिस को मौत भी नहीं हरा सकती।  
वो जीत  या वो दौड़ कौन सी है ?
 मैं खुद को जीतना चाहती थी। 
 मेरी दौड़ मेरी हर सोच के साथ रही;
मेरी प्रतियोगता सदा मेरी ही भावना रही ;
मैं ही मेरे विरोध में रही, 
क्योंकि मेरा विरोध मेरे भीतर के उस संसार के साथ था, 
जो दुःख-दर्द, तकलीफ, तनाव, घुटन, बेबसी, लाचारी और रोगों की क़ैद में था। 
मेरी मेरे से आज़ादी जब मिली 
तो मैंने हर दौड़ में पहली पोजीशन प्राप्त कर ली। 
आज मैं एक दुआ से भरी हुई एक शख्सियत हूँ
 कि मेरे को कोई भी वक़्त हरायेगा नहीं बलिक साथ ले कर चलेगा;
 कोई भी मौत क़ैद नहीं करेगी और कोई भी बंधन सीमत नहीं करेगा- 
क्योंकि आज ब्रह्मण्ड ने दोस्ती निभानी है।  
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Sound of Moments

Saturday, April 23

 Sound of Moments



What should I say! Today the story of my wonderful life in each of my conversations identifies me with its voice and mystery.





That moment of silence when it is in full depth, which is so wonderful and beautiful - that takes existence to the heights - how does that moment enjoy the journey of the ages - Wow! Then living, alive, learning and growing in it is a wonderful life journey!
Just:I will continue to enjoy my journey, destination and myself forever!
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चुप का वो पल जब पूर्ण गहराई में होता है तो ,जो बहुत ही अद्भुत और खूबसूरत होता है- जो अस्तित्व को उचाई पर ले जाता है - वो पल कैसे युग की यात्रा का आनंद देता है- वाओ ! फिर उस में रहना, जिंदा, सीखना और बढ़ना एक अद्भुत जीवन यात्रा है!
अभी: मैं अपनी यात्रा, गंतव्य और खुद का आनंद सदा ही लेती रहूंगी !
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Today I came to know that even though life opens many doors everyday that we can do a lot, but today I only do what makes my life happy. My silence always becomes my guide. My silence has always explained one thing to me that - 'Whatever you are afraid of doing, you have to do that first', then I surrender myself to the universe and start moving ahead with blessings.
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आज मैं जान गई कि चाहे जीवन हर रोज़ बहुत से दरवाज़े खोलता है कि हम बहुत कुछ कर सकतें हैं, पर आज मैं सिर्फ वो ही करती हूँ, जो मेरे जीने को ख़ुशी दे। मेरी चुप सदा ही मेरा' मार्ग-दर्शक बनती है। मेरी चुप ने सदा ही मेरे को एक बात समझाई है कि -'आप को जो भी करने से डर लगता है, पहले वो ही करना है', फिर मैं खुद को ब्रह्मण्ड के समर्पित करके आशीर्वाद से आगे बढ़ने लगती हूँ। 
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Is it the light of the sun or my dedication?
Today is the day for me to take a leap of faith and fly. I have always had only one principle in life that I should never allow myself to suffer, which has taught me to always be in balance. With the same principle, my life was starting to become free and today I have started flying in love and reverence in the sky of trust that I am free.
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यह रौशनी सूर्य की है या मेरे समर्पण की!
आज मेरे लिए भरोसे में छलांग लगाने का और उड़ने का दिन है। जीवन में  सदा मेरा एक ही सिद्धांत रहा है कि मैंने कभी भी खुद को दुःख नहीं आने देना , जिस ने मुझ को सदा ही संतुलन में रहना सीखा दिया।  एक ही सिद्धांत से मेरा जीना मुक्त  होने लगा था और आज मैं ही आज़ाद हो के भरोसे के आसमान प्यार और श्रद्धा में उड़ने लगी हूँ।
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How successful and wonderful every moment of today is!
I want to gift everyone on such moments. In these moments there is love, reverence, trust, belonging and a very deep gratitude - which will bring happiness and peace to everyone's life. This is the gift I am sending - to accept.
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आज का हर पल कितना सफल और अद्भुत है!
इस तरह के पलों को ही मैं सब को तोहफा देना चाहती हूँ। इन पलों में प्यार, श्रद्धा , भरोसा, अपनापन और बहुत ही गहरा आभारीपन होता है - जो हर एक के जीने को ख़ुशी और शांति ही देगा।आज चलते चलते, हंसते हुए और प्रार्थना करते हुए मैं अपने आप को भी और तमाम ब्रह्मण्ड को भी यही तोहफा भेज रही हूँ - कबूल करना। 
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I myself have always seen every thought, every feeling, and every step while on the journey of awakening. This journey of mine has always shown and explained amazing accidents to me. I wake up everyday, looking for myself and still seeing myself becoming.
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मैंने सदा ही खुद ही हर सोच, हर भावना, और हर कदम को जागृति यात्रा करते ही देखा है। मेरी इस यात्रा ने सदा ही मुझ को आश्चर्यजनक हादसे ही दिखाए और समझाएं  हैं। मैं हर रोज जागती  हूं, खुद की तलाश करते हुए भी खुद को बनता ही देखती हूँ। 


क्या कहूँ! आज मेरे हर पलों में अद्भुत जीवन की दास्तान अपनी आवाज़ से 
और रहस्य से मेरी पहचान करवाती है। 

Conversation with the Moment

Friday, April 22

Conversation with the Moment



That small moment of birth and death, in the length of which the ages travel, the wonderful feeling of wanting a point is in this experience.

(What am I doing at this moment?)
0- I am writing...
1 -   Why?
0-My experience is very sweet, I want to share my life with everyone...
 1-Means you want to fill everyone with the feeling of color of beautiful experience?
0-   Absolutely right...
1-Now look at this in such a way that whatever you are doing, you will call this 'here and now'; but this is also a game of the universe. Whatever you think that - 'I am doing this' - it is not you that the whole universe is engaged in this.
0-  How?
1- Now understand this in such a way that when you see that a bubble is being formed on the power of water, is this bubble creating itself or all this is happening in the power of all the water. The temperature of the water, the air in the water, the space in the water and the water, which has also taken the form of matter - all of them were involved in making this bubble on the power of water - right?
0- Get it - Exactly right...
1- Now look deep into this experience again!
0 - What to see?
1- You are writing - this is your moment - ok isn't it?
0 -   Yes...
1- In this moment you are narrating your experience, now look carefully that there is another experience in this experience. What you are talking about - it has passed; And what you are writing - it is now 'the moment of the moment'. What is the reality of this present moment?
0- Write mine
1- What are you writing
0- My experience a while back...
1-means that the experience of the past
0- Yes...
1-This was the first experience, and What is it now?
0- Maybe my understanding, my Trust!
1- When you were having this experience, it seemed real, or does the one who is telling that experience now, does it also seem real?
0- Both look the same...
1-Meaning that from the time this experience of yours started, then like a wave, this experience is passing through your space?
0 -  Yes...
1-Do you think that When you have written this experience, then this experience will be absorbed like a wave, or will it go further?
0- Will move forward, some people will read and some will hear from me....
1- Means whether the wave is absorbed or will it continue to flow?
0- It seems like it now...
1-Now you see how your consciousness is understanding all this and tell me?
0- Now my experience has changed, When I started experiencing it earlier, I was feeling a wave in that experience, Which had risen from the ocean. Now I find myself looking at the ocean, out of which this wave has risen and gone. But it didn't end.
1- Is it over for you?
0- No, because that wave is still in me and is sitting quietly in my being...
1- Means it's no longer functional?
0- It is functional, I see that It will remain functional, as long as the ocean remains.
1- How?
0 - Just like the form, color and shape of everything changes - in the same way... When someone reads - if one likes it, then the beauty of a goodness was born, and if that person would describe it further, then the circle of beauty started expanding. My first few moments of experience took the form of beauty...
1- Come on now tell me how did you come to know this and what is the experience behind which beauty - How is it recognized - tell that?
0- As:
I love changing things - Why? It is only the changing of a changing thing that makes me feel its worth. Changing is a sign of vitality as well as a sense of activity. 'Changing' also makes us experience our vastness, eternity and infinite. It doesn't mean that I love someone's wrong intentions, I love the flow of one's energy. Behind this act of change, the nature of the universe gives me this information that our changing nature is positive. Meaning that change is doing something from which the whole universe's policy is flowing.
1- How?
0- In reality, Today I look at that point, from which it is only visible that this system of the universe is a complete unit, like our body and ocean.
1- Do you think that if you are a universe then you can do anything to anyone?
0- The identity of every living being has started coming to me very deeply. With that comes an understanding in me that this person's policy is like this and this person should do it? If that person keeps on doing the same then one goes towards happiness and if one doesn't then one goes towards trouble. But I can never do anything to anyone. I see that the universe has a deep policy - there is something in that policy that every dimension has its own Law and Discipline. If I am in such a dimension today, then there must be some such persons with me, from whom I have to have something and from me, that will definitely happen.
 1- Does it mean that today everything has changed for you in this world?
0- Exactly right, this world itself is a magic full of mystery - Which changes only by the Thinking of the person. Now a very deep end of my journey is coming. In this time of mine, only that person will clash with me - Whose understanding or thinking will be like mine. When the understanding is the same, it will become very deep and firm – due to which some newness will happen.
1- It is a bit difficult to understand this, how to understand?
0- One has to travel with the rising sun and the other with the setting sun. The rising or setting of the sun - is a system - is not in reality - just like life and death.
1- Then how do you see life and death now?
0 -  Today only one point is absent in me, like everything else is in front of me. The glimpse of that point comes in me but does not stop. That point is very strange, I feel that today's life is making me worthy of that point.
1-  Still, according to today's understanding, What would you call that point?
0 -  I have zero % understanding about that point. I understand that point because all my experiences have come to me like this. I have come to know about how this universe gives me experience and understanding, so I am 100% right to say so.
1- Is that point 'Nirvana'?
0-  I don't think...
1- Why not?
0- As much as religious books have been able to give information to me, according to that I do not understand this. If this point is the stage of 'Nirvana' then I will have to say that till date any religion has openly 'Nirvana' Did not say about it at all. Or today's time could not explain the 'Nirvana' stage.
1- Can you tell that if you get that point then What will be your stage at that point?
0-  I think that point is such a point, which will give my freedom to enter into Death and Birth.
1-Meaning that you can die and take birth of your own choice?
0- I feel this way today...
1- Can We know the reason for this feeling?
0- Today if it was not for this reason, I would have been dead. Because since childhood, I have had a deep desire that I have to live both death and life together forever. Till today God has fulfilled every wish, so it will also do it.
1- I have no words, may God fulfill your wish - Amin!
(In my silent silence, waves of smile and thanks were waving)
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जन्म और मौत का वो छोटा सा पल, जिस की लंम्बाई में युग यात्रा करतें हैं, 
वैसे बिंदु की चाहना का अद्भुत एहसास इस अनुभव में है। 

पल के साथ वार्तालाप



(इस पल में 'मैं' क्या कर रही हूँ ?) 
= मैं लिख रही हूँ...
-   क्यों?
= मेरा अनुभव बहुत ही प्यारा है, मेरा जीवन सब के साथ सांझा करना चाहती  है... 
- मतलब कि सब को सुंदर अनुभव की रंगत की महसूसियत से भरना चाहती हो?
=  बिलकुल सही... 
-  अब्ब इस को ऐसे देखो कि आप जो कर रही हो, इस को आप 'यहाँ और अभी' कहोगी ;पर यह सब ब्रह्मण्ड का खेल भी है. यह जो आप सोचती हो कि -'यह मैं कर रही हूँ'- यह आप नहीं पूरा ब्रह्मण्ड ही इस में लगा हुआ है। 
=  कैसे?
-  अब इस को ऐसे समझो कि जब आप देखती हो कि पानी की सत्ता पर बुलबला  बन रहा है , क्या यह बुलबला  खुद में खुद को खड़ा कर रहा है या तमाम पानी की सत्ता  में यह सब हो रहा है।  पानी का तापमान , पानी में हवा , पानी में स्पेस और पानी ,जिस ने पदार्थ का रूप भी लिया हुआ है - वो सब ही पानी की सत्ता पर यह बुलबला बनाने में सलग्न थे- ठीक है न?
=  समझ आती है- बिलकुल सही... 
- अब इस अनुभव को फिर गहरे में से देख!
 =   क्या देखना है ?
- आप लिख रही हो- यह आप का अभी का पल है- ठीक है न?
=   हाँ... 
- इस पल में आप ने अपना अनुभव ब्यान कर रही हो, अब गौर से देखो कि इस अनुभव में एक अनुभव ओर  भी है। जो आप ब्यान कर रही है- वो बीत चूका है ; और जो आप लिख रही हो- यह अब 'अभी का पल' है।  इस अभी के पल की सचाई क्या है ?
=  मेरा लिखना 
- लिख क्या रही हो?
= मेरा कुछ देर पहले का अनुभव... 
- मतलब कि बीत चुके पल का अनुभव 
= हाँ... 
- यह पहले अनुभव था, और अब क्या है ?
=  शयद मेरी समझ , मेरा भरोसा !
- जब आप को यह अनुभव हो रहा था, वो असली लगता था, या जो अब उस अनुभव को बता रही हो, यह भी असली लगता है ?
= दोनों एक जैसे ही लगतें हैं... 
- मतलब कि जब आप का यह अनुभव शुरू हुआ, तब से ले के एक लहर की तरह यह अनुभव आप  की स्पेस में से गुज़र रहा है?
=  हाँ... 
- क्या आप सोचती हो कि यह अनुभव जब आप ने लिख दिया, तो यह अनुभव लहर की तरह लीन  हो जाएगा, या आगे भी बढ़ेगा?
= आगे बढ़ेगा, कुछ व्यक्ति पढ़ेगे और कुछ मेरे से सुनेंगे.... 
- मतलब कि लहर लीन हो कि भी बहती रहेगी?
= अब लगता तो ऐसे ही है... 
- अब आप देखो कि आप की चेतना इस सब को कैसे समझ रही है और मेरे को ब्यान करो?
=  अब मेरा अनुभव बदल गया है, पहले जब अनुभव होने लगा था तो मैं उस अनुभव में खुद को एक लहर महसूस कर रही थी, जो सागर में से उठी थी। अब मैं खुद को सागर देख रही हूँ, जिस में से यह लहर उठी है और चली भी गई। पर यह खत्म नहीं हुई। 
- आप के लिए तो खत्म हो गई है ?
=  नहीं, क्योंकि वो लहर अब भी मेरे में है और मेरी सत्ता में शांत बैठी है... 
- मतलब कि अब किर्याशील नहीं?
=  वो किर्याशील ही है, मैं देख रही हूँ कि वो किर्याशील ही रहेगी, जब तक सागर रहेगा। 
- कैसे?
=  जैसे हर चीज़ का रूप रंग आकार बदलता है- वैसे ही... जब कोई पढ़ेगा - अगर उस को अच्छा लगेगा तो एक अच्छेपन की सुंदरता का जन्म हो गया, और वो व्यक्ति आगे इस को ब्यान करेगा तो सुंदरता का घेरा बढ़ने लगा।  मेरे कुछ देर पहलों के अनुभव ने सुंदरता का रूप धारण कर लिया... 
- चल अब यह बता कि आप को यह कैसे पता चला और कौन सी सुंदरता के पीछे कौन सा अनुभव होता है- उस की पहचान कैसे होती है- वो बताओ?
= जैसे;
मेरे को बदलती चीज़ बहुत पसंद आती है - क्यों? मेरे को बदलती चीज़ का बदलना ही उस की योग्यता को अनुभव करवाता है। बदलना जिन्दापन की निशानी के साथ साथ किर्यशीलता का भी एहसास देता है। 'बदलना', हमारी विशालता, अनंतता और विराटता का भी अनुभव करवाता है।जब व्यक्ति भी बदलता है तो ,चाहे नकारत्मिक ही बदले, मुझे उसी यह प्रकिर्या से प्यार है।  मतलब यह नहीं कि मुझे उस के गलत इरादे से प्यार है, उस की ऊर्जा के बहा से प्यार है। बदलने की इस किर्या के पीछे  ब्रह्मण्ड के स्वाभाव से मुझे यह जानकारी मिलती है कि हमारा बदलता स्वाभाव  सकारत्मिक है। मतलब कि बदलना कुछ ऐसा कर रहा है जिस से पूर्ण ब्रह्माण्ड की नीति बह रही है।  
- कैसे?
= असलियत में आज उस बिंदु पर नज़र जाती है, जिस में से सिर्फ यही दिखाई देता है कि यह ब्रह्मण्ड का सिस्टम एक सम्पूर्ण इकाई है, जैसे हमारा जिस्म और सागर। 
-  क्या आप को लगता है कि अगर आप ब्रह्मण्ड हो तो आप किसी को भी कुछ भी कर सकती हो?
= हर जीव की पहचान मेरे को बहुत गहराई से आने लगी है। उस के साथ ही मेरे में एक समझ जन्म लेती है कि इस व्यक्ति की नीति ऐसी है और इस व्यक्ति को यह करना चाहिए? अगर वो व्यक्ति वोही करता जा रहा है तो वो सुख की ओर जाता है और जो नहीं करता तो वो तकलीफ की ओर जाता है। पर मैं किसी को कुछ कभी नहीं कर पाऊँगी।  मैं देखती हूँ कि ब्रह्मण्ड की एक गहरी नीति  है- उस नीति  में कुछ ऐसा भी है कि हर आयाम का अपना  ही कानून और अनुशाशन होता है।  अगर मैं आज एक ऐसे आयाम में हूँ तो वहां पर मेरे साथ कुछ तो ऐसे व्यक्ति होंगे ही, जिन से मेरा और मेरे से जिन का कुछ न कुछ तो होना ही है- वो ज़रूर होगा। 
 - मतलब कि आज आप का इस संसार में ही सब बदल गया?
=  बिलकुल सही, यह संसार ही एक एक रहस्य से भरा जादू है- जो व्यक्ति की सोच से ही बदल जाता है। अब मेरी यात्रा का एक बहुत गहरा अंत आ रहा है। मेरे इस वक़्त में मेरे साथ वोही व्यक्ति टकराएगा - जिस की समझ या सोच मेरे जैसी होगी।  जब समझ एक जैसी होगी तो बहुत गहरी और पक्की हो जायेगी- जिस से कुछ ओर नयापन घटित होगा। 
-  इस को समझने में थोड़ी सी मुश्किल महसूस होती है, कैसे समझूँ?
=  एक ने उदय होते सूर्य के साथ यात्रा करनी है और दूसरे ने अस्त होते सूर्य के साथ।सूर्य का उदय होना या अस्त होना- एक सिस्टम है - असलियत में है नहीं- ठीक वैसे ही जैसे जीवन और मौत।
- फिर आप अब जीवन और मौत को कैसे देखती हो?
= आज मेरे में सिर्फ एक बिंदु गैरहाज़िर होता है , बाकी सब जैसे मेरे आगे ही है। उस बिंदु की झलक मेरे में आती है पर ठहरती नहीं। वो बिंदु बहुत ही अजीब सा है, मेरे को यह लगता है कि मेरा आज का जीवन मेरे को उस बिंदु के काबिल बना रहा है। 
- फिर भी आज की समझ अनुसार आप उस को क्या कहोगी?
=  मेरे में उस बिंदु के बारे में जीरो % समझ है।  मैं समझती उस बिंदु को इस लिए हूँ कि मेरे सब अनुभव ऐसी ही मेरे पास आएं हैं।  मैं यह जान गई हूँ कि मेरे को यह ब्रह्माण्ड कैसे अनुभव और समझ देता है, इस लिए मेरा कहना मेरे लिए १००% ठीक है। 
- क्या वो बिंदु 'निर्वाना' है ?
= मेरे को नहीं लगता... 
- क्यों नहीं?
= जितना भी मेरे को धार्मिक किताबें जानकारी दे पाई हैं, उस हिसाब से मेरी यह समझ नहीं है।अगर यह बिंदु 'निर्वाना' की ही स्टेज है तो फिर मेरे को यह कहना पड़ेगा कि आज तक किसी भी धर्म ने खुल कर 'निर्वाना' के बारे में कहा ही नहीं।या आज का वक़्त 'निर्वाना' स्टेज को ब्यान ही नहीं कर पाया।
- क्या आप यह बता सकती हो कि अगर आप को वो बिंदु मिल जाएगा तो उस बिंदु पर आप की स्टेज क्या होगी?
= मेरे को लगता है कि वो बिंदु एक ऐसा बिंदु है, जो मेरे को मौत और जन्म में दाखिल होने की आज़ादी देगा। 
- मतलब कि आप अपनी मर्ज़ी से मर सकती हो और जन्म ले सकती हो ?
= मेरे को आज यही लगता है
- ऐसे लगने की वजह को क्या हम जान सकते हैं?
= आज अगर यह वजह न होती तो मैं मर चुक्की होती।क्योंकि बचपन से ही मेरे में यह चाहना गहरी रही है कि मैंने मौत और जीवन दोनों को सदा साथ जीना है।  आज तक परमात्मा ने हर चाहना पूर्ण की है, तो यह भी करेगा। 
- मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं, परमात्मा आप की चाहना पूर्ण करे - अमीन !
(मेरी चुप में घुली शान्ति में मुस्कान और धन्यवाद की तरंगें लहरा रही थी।)   

Infinite Paths of understanding

Sunday, April 10

Infinite Paths of understanding



 I had never imagined that there are infinite paths of understanding of life, 

Which make the living entity conscious.





Knowing oneself is the hardest part.

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 स्वयं को जानना सबसे ज़्यादा कठिन है।









Can you believe today that the past and the future are real illusions, that they exist in the present, that today is the tomorrow and the past exists - do you understand?

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क्या आज आप ऐसा मान सकते हो कि अतीत और भविष्य वास्तविक भ्रम हैं, कि वे वर्तमान में मौजूद हैं,मतलब कि आज में ही आने वाला कल और बीता हुआ कल मजूद है - क्या आप समझ सकते हो?







The most dangerous person in life is the one who is very intelligent. Why? Because the more profound the understanding, the more difficult it is. Stay tuned forever to know How!

-

जीवन में सब से खतरनाक व्यक्ति वो है, जो बहुत समझदार है।  क्यों? क्योंकि बहुत ही गहरी समझ जितनी कठोर होती है- उतनी ही नाज़ुक होती है।  कैसे?यह जानने  के लिए  सदा साथ बने रहिएगा!







We are all an action of the universe, just as a wave is an action of the ocean.

-

हम सब ब्रह्मण्ड का एक एक्शन ही है, जैसे लहर समुन्दर का एक एक्शन है।

 







When we learn something at any moment, we are 'scholar', just like when we leave something in a moment we are 'sannyasi'.

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जब हम किसी भी पल में कुछ सीखतें हैं तो हम 'विद्वान' होतें हैं, ठीक वैसे ही जब हम किसी पल में कुछ छोड़ देतें हैं तो हम 'सन्यासी' होतें हैं। 







Every solid thing becomes as lifeless as it is solid.

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हर ठोस वस्तु उतनी ही बेजान हो जाती है, जितनी ठोस होती है।









Today you go to sleep thinking that you did not wake up yesterday.

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आज आप यह सोच ले के सो जाना कि कल को आप  ने जागना नहीं। 








I have always loved the hospital environment because I learned that being sick is also a means of deeper recovery, so being sick can be a beautiful experience.

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मुझे सदा ही हस्पताल का माहौल अच्छा लगा क्योंकि मैंने जान लिया था कि बीमार होना भी गहरी तंदरुस्ती का साधन है, सो बीमार होना एक सुंदर अनुभव हो।






I have experienced very deeply that we are not born in the world as we have thought till today. We all emerge from the universe, like a leaf sprouts from a tree. Every living being and everything is an expression of nature, which is a unique action of the whole universe.

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मैंने बहुत गहरे में से अनुभव किया है कि हम संसार में ऐसे नहीं जन्मते, जैसे आज तक हम ने सोचा है। हम सब ब्रह्मण्ड में से निकलते हैं, जैसे पेड़ में से पत्ता अंकुर होता है। हर जीव और हर चीज़ कुदरत की अभिव्यक्ति है,  जो तमाम ब्रह्मांड की एक अनूठी क्रिया है।




What is the art of living called?

 When a living being recklessly lives a life in which there is no fear of the karma-cycle but is sensitive to each moment in which there is an open receptive space of all newness and uniqueness.

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जीने की कला किस को कहतें हैं?

 जब कोई भी जीव बेपरवाही से ऐसे जीवन को जीता है- जिस में कर्मा -चक्र का कोई डर नहीं होता बलिक प्रत्येक पल के प्रति संवेदनशील होता है जिस में बिल्कुल नयापन  और  अनूठेपन का खुला ग्रहणशील स्पेस होता है। 




मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि जीवन की समझ के अनंत रास्ते हैं,  जो जीव को चेतन-स्वरूप बना देतें हैं। 

The Thrill of Life

Saturday, March 19

The Thrill of Life is Learning



 
When we wake up, how does life wake us up from moment to moment, 
such an experience that this awakening never ends

Many years ago I gave myself a way to sit on one side and watch not only the flow of Life, but also the flow of Water and Time. This flowing flow of all THREE did not teach me to flow - taught me to stop - Why? Do you understand Why?
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मैंने बहुत साल पहलों खुद  को एक रास्ता दिया कि एक किनारे बैठ कर जीवन के बहा को ही नहीं देखना, पानी और वक़्त के बहा  को भी देखना है। यह तीनों के बहते बहा ने मेरे को बहना नहीं सिखाया- रुकना सीखा दिया- क्यों? क्या आप समझते हो, क्यों?
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It was a matter of many years ago When I told myself that one has to walk on the path of life as if there is no way. That place: Which is unpaved - on which no one has walked, it has to be walked on it in such a way that the path is not the way but the destination is also there. I kept on walking; One day it reached such a point that there was neither a path nor a destination, - Do you understand?
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बहुत साल पहल की बात है जब मैंने खुद को कहा कि जीवन की राह पर ऐसे ही चलना है कि जैसे कोई राह है ही नहीं।  वो जगह: जो कच्ची है- जिस पर कोई चला नहीं, उस पर ऐसे ही चलना है कि वो राह राह नहीं मंज़िल भी है।मैं चलती ही गई; एक दिन ऐसे बिंदु पर पहुंच गई कि न ही वहां पर राह थी और न ही मंज़िल, - क्या आप समझ गए ?
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One day a moment came to me and said -
 'Can you live such a life that you have nothing?'
I told the moment that -
'I will never live like this, because if I have no one, but 'I' will be with me.'
Moment said -
'Then live such that from today there is no Religious book, nor has there been any Sage till today'
It was difficult for ME, but I wanted to know life, it did and it happened. What?
Life is happy that I am happy - I don't know, something happened - but What? Do you understand?
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एक दिन एक पल ने मुझ को आ कर कहा कि -
 'क्या तू ऐसे जीवन को जी सकती हैं कि तेरे पास कुछ भी न हो?' 
मैंने पल को कहा कि -
'ऐसे कभी मेरे से जीया नहीं जाएगा, क्योंकि अगर मेरे पास कोई नहीं होगा, पर 'मैं' मेरे पास होगी।'
पल ने कहा कि -
'फिर ऐसे जी कि आज से कोई भी धार्मिक किताब नहीं और ना ही आज तक कोई ऋषि हुआ है'
मेरे लिए कठिन था, पर मैंने जीवन को जानना था, सो किया और हुआ भी। क्या?
ज़िंदगी खुश हुई कि मैं खुश हुई - पता नहीं, कुछ हुआ- पर क्या? क्या आप समझते हो?
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जब हम जाग जातें हैं तो जीवन कैसे पल पल हम को ओर  गहरा जगाता जाता है,
 ऐसा अनुभव कि यह जागना कभी खत्म नहीं होता।
 

Let's Go to God

Monday, January 24

Let's Go to God



Why do we seek God? What is God? Is God light, virtue or knowledge? How can we know that this is God!


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That thing is natural - Which is common with every living being?

This means that our common Nature is God. What is Our common Nature? - What is that Nature Which is the same in every living being?

For Which We do not fight, We have got it only naturally. What is that? Let's see today and understand that!






2

Who are we all influenced by the most?

By beauty: Whatever the beauty, We are bound to be impressed.

Why?

Beauty consists in the general form of many of our qualities. In beauty lies the flow of our qualities. Note and Rhythm are born out of every flow. There will be rhythm here too, where there is flow. There is melodiousness and fervor in the music. What is the source of identification of the attribute? One Who has that quality, means that the qualities make the matter to be identified. So How will We identify the world and with Whom? Who is with us, Who gives us the identity of the World or Nature, gives knowledge, has named that source as God, Rabb, Parmatma and Allah. 

So our living till God and our thinking are all mental dimensions.

So our knowledge of the nature of nature and the quality of matter's natural form is deep but limited. Very deep but still limited. This limited feeling experience does not satisfy the mind. The mind fails in itself. Now let's talk about God's transcendence and God's Nature.

3


Whenever the mind of any person goes to that highest state of perfection of 'mind' in the pursuit of knowledge that is available to him, then from that attainment begins to flow a force in living. Religion calls this 'Ananda' and the mind, thinking, feeling of a person become active in such a speed that we can also call that flow as 'spiritual knowledge' - which we simply call love.

This is called 'Heart-Chakra', and this is called 'Khuda-Pyaar', because this love is also called 'Ishwariya love'. It is innocent, selfless and reckless. There is nothing in the universe against this. This is the state that we can say that 'God loves himself' or we can say that 'clapping with one hand has started'.

And this stithi is glorious because it is a symbol of knowledge and this state makes a person full of good fortune. Now from here begins the true and real spiritual journey, the journey of deep knowledge begins.


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चलो खुदा की ओर चलें

 खुदा की हम क्यों तलाश करतें हैं? खुदा क्या है? खुदा रौशनी है, गुण है या ज्ञान है ? हम कैसे जान पाएंगे कि यह है खुदा !

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वो चीज़ कुदरती होती है- जो हर जीव के पास समान होती है?

मतलब यह हुआ कि हमारा जो आम स्वभाव है, वोही खुदा है।  आम स्वभाव हमारा क्या है?- वो स्वभाव क्या है जो हर जीव में एक जैसा है?

जिस के लिए हम सघर्ष नहीं करते बस स्वाभाविक रूप में ही हम को प्राप्त है। वो क्या है? चलो आज हम देखें और उस को समझे !

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2

हम सब से ज़्यादा प्रभावित किस से होतें हैं?

सुंदरता से: सुंदरता कोई भी हो, हम प्रभावित होंगे ही। 

क्यों?

सुंदरता में हमारे बहुत गुणों का सामान्य रूप होता है।  सुंदरता में हमारे गुणों का बहा  होता है। हर बहा में से ही सुर और ताल का जन्म  होता है।  यहाँ पर भी लयबद्धता होगी, वहीँ पर संगीत होता है. संगीत में मधुरता और रैवानगी होती है। गुण की पहचान का स्रोत क्या होता है ? जिस में वह गुण होता है, मतलब कि गुण पदार्थ की पहचान करवातें हैं।तो हम संसार की पहचान कैसे करेंगे और किस से करेंगे? कौन है हमारे पास , जो हमे संसार या कुदरत की पहचान दे, ज्ञान दे, उस स्रोत को नाम दिया है खुदा, रब्ब, परमात्मा। ... 

सो परमात्मा तक हमारा जीना और हमारा सोचना सब  मानसिक आयाम है।

सो  हमारा स्वाभाविक रूप और पदार्थ का स्वाभविक रूप का गुणरूप  का ज्ञान  गहरा है पर सीमित है।  बहुत ही गहरा पर फिर भी सीमित है। यह सीमित एहसास का अनुभव मन को संतुष्टि नहीं देता। मन खुद में विफल ही रहता है।  अब बात करतें हैं खुदा के पार की और  खुदा के स्वभाव की। 

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जब भी किसी भी व्यक्ति का मन ज्ञान को प्राप्त करने में 'मन' की  पूर्णता की उस उच्चतम अवस्था में चला जाता है जो उसे उपलब्ध होती है तो उस प्राप्ति से जीने में एक सकिर्या बहा बहना शुरू होता है।  धर्म इस को 'आनंद' कहता है  और व्यक्ति का दिमाग, सोच,  भावना एक ऐसी गति में सकिर्या  हो जातें हैं कि उस बहा को हम 'भावात्मिक ज्ञान' भी कह सकतें हैं -जिस को हम साधारण रूप में प्यार कहतें हैं। 

इस को ही 'दिल-चक्रा' कहतें हैं, और इस को ही खुदा-प्यार कहतें हैं, क्योंकि यह प्यार ईश्वरारिया प्रेम भी कहतें हैं।  यह निर्दोष, निरस्वार्थी और निर्विकार होता है।  इस के विरोध में ब्रह्माण्ड की  कोई भी वस्तु नहीं होती। यह वो अवस्था है जिस को हम कह सकतें हैं कि 'खुदा खुद को ही प्यार करता है' या फिर कह सकते हैं कि 'ताली एक हाथ से बजने लगी है '

और यह स्तीथी गौरवशाली होती है क्योंकि यह ज्ञान का प्रतीक है और यह अवस्था व्यक्ति को सौभाग्य भरपूर बना देती है। अब यहाँ से शुरू होती है सही और असली आध्यत्मिक यात्रा शुरू, गहरे ज्ञान की यात्रा शुरू।  

Amazing Nature

Amazing Nature
When following the Trail of Colorful Emotions and Beautiful Divine Connection, Then Life blossoms, Love begins to flow because True and Pure feeling is the living land of Love and a more beautiful abode to live in the Heart during the JOURNEY OF LOVE Creating is a priceless feeling. But in Those moments there are some of the most amazing Moments too, Which become functional to see Life in full Bloom with Divine Connection and Divine Action like SPRING. When Our Thoughts also Blossom in our Life. It is these Moments that make us Aware and make OUR life an ART OF JOY...