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Have to walk like a Sanyaasi - No Matter what the Path

How is life after Nirvana?

 How is life after Nirvana?



Sometimes it feels like now my head will just explode, as if the bubble is bursting, and I look at the space, which after bursting will just merge into the space, then this one which is 'exploding' event, so what is it?

  Today my life experience is telling me that this life, this worldly life is just a journey of death till the journey to Nirvana. The last step of the journey of death is 'Nirvana'.

Today, when I carefully look at the germ element of the body, I began to feel that every single germ is a squeeze out of the depths of our every single experience, which is traveling with us through eternity.

Germs are not just soil – we have a long journey experience. Disease is our negative energy, which gives us knowledge about the positive energy – which awakens the wellness in our energy.

 I can see how every particle is eager to tell its own story to me, which raises my energy level to a high degree, and how I myself am engulfed in madness, such madness, in which there is a deep sense , and there is a light of deep understanding, which blesses me for peace and patience.

 My understanding, surrounded by such a deep mystery of life, sometimes turns my hands in my head, sometimes gives love to the eyes, sometimes sends a kiss to understanding, sometimes with a deep smile, raises my eyes to the sky, and Mischievous gestures are made through the eyes, as if lovers look at each other in the eyes.


A wonderful, matchless, unique, mysterious game:

- If Nirvana is the last death, then where is life?

If till now we have traveled only to death, then what is the name of life?

- If our journey till today was to wake ourselves up, then what will be the journey after waking up and where will it be?

- What is the journey after Nirvana and how is it?

These are my questions, the answer of which is leading me to an unknown path, which I have neither read nor heard about till date. If I go back to my own childhood and I'm filled with a deeper understanding of myself. Today's time connects me with my childhood, those incidents which I have always seen without understanding, it was such a solved story, which I could not understand. I will also not delay in saying that the journey of all of us is a flowing stream of understanding, which introduces us to us. How our ignorance keeps sleeping under the veil of ignorance, that we do not recognize our ignorance

 This journey of my questions always went on the track of death. Whoever heard, read or saw the experiences of anyone - the correct result of all of them has come in my hands today; When this question arose in me that how Nirvana is the last death and after this 'Nirvana' life will be of life, not of death. And this is the real life.

 This question has opened the door for me again today after 20 years in a new dimension to which I am unaware today; But still, in this question of mine, I have got a glimpse of my answer, which has twisted my existence. This situation is filled with my very deep astonishment and is very strange, unknown. And there is no one to trust at all. But today my nature has supported me, because till today I have very similar supernatural experiences, which are my support, which do not allow me to panic.

 


Now we have to talk in the second part that :-

 What is Black Hole?

What is Big Bang Theory?

 What is after Nirvana, if this is the last question of religion today or this question is the last destination, then why I do not believe in it? This question is for me.

And today's science has also stopped here that what is a big bag, and what is a black hole?

Isn't this the same thing? Only our way of looking is different, as till today religion and science are looking at life from different windows, but when we look carefully, they are saying the same thing, just like Nirvana is one dimension and that The scientific ideology of the dimension itself is the black hole.

 read the second part

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निर्वाना  के बाद का जीवन कैसा है ?


कभी कभी ऐसा लगता है कि जैसे अब बस मेरा सर फट जाएगा, जैसे कि बुलबुला फट जाता है, और मैं उस स्पेस को देखती हूँ, जो फट जाने के बाद बस स्पेस में ही लीन  हो जायेगी, फिर यह जो 'फट' जाने की घटना है, तो यह क्या है ?

  आज मेरा जीवन का अनुभव मेरे को यह कह रहा है कि यह जीवन, यह संसारी जीवन निर्वाना की यात्रा तक सिर्फ मौत की यात्रा है। मौत की यात्रा का आखरी कदम 'निर्वाना' है। 

आज मैं गौर से जब शरीर के कीटाणु तत्त को देखती हूँ तो मुझे यह ऐसा महसूस होने लगा कि एक एक कीटाणु  हमारे एक एक अनुभव की गहराई में से निकला हुआ वो निचोड़ है, जो हमारे साथ अनंत-काल से यात्रा कर रहा है। 

कीटाणु सिर्फ मिटटी ही नहीं- हमारी एक लम्बी यात्रा का अनुभव है। रोग हमारी वो  नकारत्मिक ऊर्जा है, जो हम को सकारत्मिक ऊर्जा के बारे में ज्ञान देती है- जिस से हमारे ऊर्जा में तंदरुस्ती का जागरण होता है। 

 मैं देख रही हूँ कि कैसे हर कण मेरे को अपनी अपनी दास्तान सुनाने को उतावला है, जिस से मेरी ऊर्जा का लेवल हाई डिग्री पर जाता है, और मैं कैसे  खुद में ही पागलपन में घिरी हुई हूँ, ऐसा पागलपन, जिस में गहरा होश है, और गहरी एक समझ की रौशनी है, जो मेरे को शांति और सब्र की दुआ देती है। 

 जीवन के इतने गहरे रहस्य के चक्र में घिरी मेरी समझ, कभी सर में हाथों को फेरती है , कभी आँखों के पानी को प्यार देती है, कभी समझ को kiss भेजती है, कभी गहरी मुस्कान के साथ आँखों को आसमान की ओर उठाती है, और आँखों से ही शरारती इशारा करती है, जैसे कोई प्रेमी एक दूसरे को आँख मारते हैं।


एक अद्भुत, लाजवाब, बेमिसाल, रहस्यमय खेल:  

- अगर निर्वाना आखरी मौत है तो जीवन कहाँ है ?

-  अगर अब तक हम ने सिर्फ मौत की ही यात्रा की है तो ज़िंदगी किस का नाम है?

-  अगर आज तक की हमारी यात्रा खुद को जगाने की ही थी तो अब जागने के बाद की यात्रा कैसी होगी और कहाँ पर होगी ?

- निर्वाना के बाद की यात्रा कौन सी है और कैसी है ?

यह मेरे ऐसे सवाल हैं, जिन का जवाब आज मेरे को एक अज्ञात रास्ते की ओर  ले के जा रहा है, जिस के बारे में आज तक ना ही पढ़ा  है और ना ही सुना है। अगर मैं खुद के बचपन की ओर जाती हूँ और खुद के लिए मैं गहरी समझ से भर जाती हूँ। आज का वक़्त मेरे को मेरे बचपन से मिलाता है, वो घटनाएं जिन को मैंने सदा न-समझी में देखा, वो तो एक ऐसी सुलझी हुई गाथा थी, जो मेरी ही समझ में नहीं आ रही थी। यह कहने में मैं भी अब देरी नहीं करूंगी कि  हम सब की यात्रा एक समझदारी की बहती धारा है, जो हम को हम से ही मिलवाती है। हमारा अनजानापन कैसे अज्ञानता का दुपट्टा ओड कर सोया रहता है, कि हम को आपने ही अनजानपन की पहचान  नहीं होती 

 मेरे सवालों की यह यात्रा सदा ही मौत की पटड़ी पर चलती गई। जितने भी किसी के भी अनुभव सुने,  पढ़े  या देखे- उन सब का सही नतीजा आज मेरे हाथ में आया है; जब मेरे में इस सवाल ने जन्म लिया कि कैसे निर्वाना आखरी मौत है और इस  ' निर्वाना' बाद का जीना ज़िंदगी का होगा, मौत का नहीं।और यही है असली ज़िंदगी। 

 इस सवाल ने मेरे आगे आज २० साल के बाद फिर एक नए आयाम का दरवाज़ा खोला है, जिस के लिए आज मैं अनजान हूँ; पर फिर भी मेरे इस सवाल में ही, मेरे को मेरे जवाब की झलक मिल चुक्की है, जिस ने मेरे वजूद को घुमा दिया है।  यह हालात मेरी बहुत गहरी हैरानी भाव से भरी हुई है और बहुत ही अद्भुत है, अनजानी है। और भरोसे करने वाली तो बिलकुल है ही नहीं। पर आज मेरे स्वभाव ने मेरा साथ दिया है, क्योंकि आज तक मेरे पास बहुत ही ऐसे ही अलौकिक अनुभव है , जो मेरा सहारा हैं, जो मेरे को घबराने नहीं देते। 


  अब हम ने दूसरे हिस्से में बात करनी है कि:-

 ब्लैक होल क्या है?

बिगबैंग थिओरी क्या है ?

 निर्वाना के बाद क्या है, अगर आज धर्म  का भी यही आखरी सवाल है या यही सवाल आखरी मंज़िल है ,तो --- मैं इस को क्यों नहीं मानती? यह सवाल मेरा मेरे लिए है। 

और आज की साइंस भी यहीं पर रुकी हुई है कि बिंगबैग क्या है, और ब्लैक होल क्या है ?

क्या यह एक ही चीज़ तो नहीं? सिर्फ हमारे देखने का तरीका अलग सा है, जैसे आज तक धर्म और विज्ञान जीवन को अलग अलग खिड़की में से देख रहें हैं, पर जब गौर से देखेंगे तो  यह दोनों बात एक ही कह रहें हैं,  ठीक वैसे ही निर्वाना एक आयाम है और उस आयाम की ही विज्ञानक विचारधारा, ब्लैक होल है। 

 पढ़िए दूसरे हिस्से में  

Buddha and Nirvana

What is the status of audacity?



What is the status of 'audacity'?

 Do you know who is called 'audacity'?

Have you recognized all of nature that you say that man is the best thing of all?

Now when we have no identity of our own then how can we say that what is God, and the person is of God's image - how?

how ?

How can anyone even think like this, I have not understood this till now?

If a person does something for his family, he does something for his country, or does something for his community, does that person become big by doing this?

Have you ever seen an animal, how do they love their own child?

Have you ever seen a bird, how birds take care of their families and build houses?

What is the greatness of a person in this, I do not understand this?

No one else has ever made the mistake of thinking of oneself as better than everyone else.

What is arrogance - I do not understand this?

If the last step is going to be immortal, then there is some understanding - when the last step is death, then what is the pride and what is the status?

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औकात क्या होती है ? 

क्या पता है कि औकात कहते किस को हैं ?

क्या आप ने पूरी कुदरत को पहचान लिया है कि आप कहते हो कि व्यक्ति सब से बढ़िया चीज़ है?

अभी जब हम को खुद की ही कोई पहचान है नहीं तो हम कैसे कह सकतें हैं कि खुदा क्या है, और व्यक्ति खुदा की इमेज का है - कैसे? 

कैसे ?

कैसे कोई ऐसे सोच भी सकता है , मेरे को तो यही समझ नहीं अब तक आई ?

अगर कोई व्यक्ति अपने परिवार के लिए कुछ करता है, आपने मुल्क के लिए करता है, या फिर अपनी कौम का कुछ करता है तो क्या यह करने से वो  व्यक्ति बड़ा बन जाता है ?

कभी जानवर को देखा है, वो खुद के बच्चे का कैसे प्यार करतें हैं ?

कभी पंछी को देखा है कि पंछी परिवार की देखभाल  कैसे करतें हैं और कैसे घर बनातें हैं ?

इस में व्यक्ति की अलग सी कौन सी महानता हो गई, यही मेरे को समझ नहीं ?

खुद को भी सब से बेहतर समझने की भूल जितनी इंसान ने की है, ऐसी भूल ओर किसी ने कभी नहीं की ?

घमंड किस बात का है - मेरे को यही समझ नहीं आती?

अगर आतिम कदम अमर होने वाला हो तो कुछ समझ है -जब आखिरी कदम मौत ही है तो घमंड किस बात का और औकात किस बात की है?

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Buddha and Nirvana


When the seed explodes, so does the seedling. In the same way today, seeing the environment spread all around, a thing written in the Puranas came to my mind that whenever a person attains Nirvana, then at that time everything in nature is more quantity and better quality. With this statement I fell silent and the moment entered me

 Not only mine, today's time of all of us is passing through such a dimension, here today the group has to attain Nirvana, not any one.

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बुद्धा और निर्वाना 

जब बीज फूटता है, तो अंकुर होता है। ऐसे ही आज चारों तरफ फैले माहौल को देख कर, पुराणों में लिखी एक बात मेरे जेहन में आई  कि जब भी कोई इंसान निर्वाणा प्राप्ति करता है तो उस वक़्त में कुदरत  में हर चीज़ ज़्यादा मात्रा और बेहतर क्वालिटी की होती है।इस स्टेटमेंट के साथ मैं चुप हो गई और पल मेरे भीतर प्रवेश कर गया. मेरा ही नहीं, हम सब का आज का वक़्त एक ऐसे आयाम में से गुज़र रहा है , यहाँ पर आज समूह को निर्वाना प्राप्ति होनी है, किसी एक को नहीं।

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pilgrimage of words

If you start looking at any word of life or start reading it, then the word also becomes a cave. As we go within the word, the word itself becomes manifest taking the character of infinite form. The size of every part of life is very big, which has no end. Then the natural nature of each part spreads by taking a huge form in itself. Whenever I look towards nature, nature pushes me towards my own vast form. I get absorbed in the lap of my own vast form and dissolve in the universe. Here I become one with the natural form of my self.

लफ़्ज़ों का तीर्थ 


ज़िंदगी के किसी भी लफ्ज़ को गौर से देखने लगो या पढ़ने लगो तो लफ्ज़ भी एक गुफा बन जाता है। जैसे जैसे हम लफ्ज़ के भीतर जातें हैं तो लफ्ज़ ही अनंत रूप का किरदार ले के प्रगट हो जाता है। ज़िंदगी के हर हिस्से का आकार बहुत ही बड़ा है, जिस का कोई भी अंत नहीं है। फिर हर हिस्से का कुदरती स्वभाव खुद में विशाल रूप ले के फैला हुआ है। कुदरत की ओर जब भी मैं देखती हूँ तो कुदरत मेरे को मेरे ही विराट रूप की ओर धकेल देती है।  मैं मेरे ही विशाल रूप की गोद में लीन हो के ब्रह्माण्ड में घुल जाती हूँ।  यहाँ पर मैं मेरी मैं के कुदरती रूप के साथ एक हो जाती हूँ।




Traces of Delicate Experiences

 Traces of Tender Experiences

नाज़ुक अनुभवों के निशान


Loving myself became the first step in loving the universe

मेरा खुद को प्यार करना ही ब्रह्माण्ड को प्यार करने का पहला कदम बन गया 



Whatever I learned, I learned from giving love. Then I came to know that whenever we learn something, how our learning removes our limited sense from us and our limited bondage and makes us always citizens of the open sky. There is such a unique art in every learning, which always connects us with the limitless.

मैंने जो भी सीखा प्यार देने से ही सीखा। तब मैंने जाना कि जब भी हम कुछ सीखते हैं तो हमारी यह सीख कैसे हमारे में से हमारे सीमित भाव को और हमारी सीमित बंधन से निकाल देती है और हम को सदा ही खुले आसमान का नागरिक  बनाती है। हर सीख में एक ऐसी ही अनोखी कलाकारी होती है, जो हम को सदा असीमितता  के साथ ही जोड़ती है। 



Whenever I look at life with an untouchable feeling, I get absorbed in the feeling of this untouchable feeling and become moisture in myself. Ever since my journey to this emotional state has started, from that moment my life has become an invaluable pilgrimage for me.

जब भी मैं जीवन को अछूती भावना से देखती हूँ तो मैं खुद में ही इस अछूती भावना के भाव में लथपथ हो कर खुद में ही नमी बन जाती हूँ। जब से मेरी यह भावपूर्ण स्थिति की यात्रा शुरू हुई है, उस पल से ही मेरा जीना मेरे लिए अमूल्य तीर्थ बन गया।



Today, as much as I am deep in the experience of my merits and demerits, on the contrary, the flow of life has started flowing smoothly and easily in me. And the more I feel this flowing life of myself - then the more an unknown openness blossoms within me, which makes me aware of the universe.

आज जितनी ही मैं अपने गुण  और अवगुणों के अनुभव में गहरी हूँ, उल्टा ही जीवन-बहा  मेरे में सहज और सरल बहने लगा है।  और जितना ही मैं खुद के इस बहते जीवन बहा  को अनुभव करती हूँ- फिर उतना ही मेरे भीतर से कोई अंजना खुलापन खिलता है, जो मुझ को ब्रह्माण्ड के प्रति जागरूक करता है। 



The day I stopped wanting to be something, the day I stumbled trying to get something and the day I refused to know anything, that day my journey began.

जिस दिन मैंने कुछ होने की चाहना को रोक दिया, जिस दिन मैंने कुछ पाने की कोशिश को ठोकर मार दी और जिस दिन मैंने कुछ जान्ने को ही इंकार कर दिया, उस दिन ही मेरी वो सब यात्रा शुरू हो गई। 


रेतली राह का मुसाफ़िर

रेतली राह का मुसाफ़िर
माननीय प्यार , आज मैं खुद को आप के आगे सन्मानित करना चाहती हूँ कि मैं आप की रचना हूँ ; और खुदा के आगे मैं खुद को धन्यवाद का उपहार देना चाहती हूँ कि 'धन्यवाद शहीर ' कि आप ने खुदा से प्यार किया। हर किर्या के लिए धन्यवाद
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