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Have to walk like a Sanyaasi - No Matter what the Path

Buddha and Nirvana

What is the status of audacity?



What is the status of 'audacity'?

 Do you know who is called 'audacity'?

Have you recognized all of nature that you say that man is the best thing of all?

Now when we have no identity of our own then how can we say that what is God, and the person is of God's image - how?

how ?

How can anyone even think like this, I have not understood this till now?

If a person does something for his family, he does something for his country, or does something for his community, does that person become big by doing this?

Have you ever seen an animal, how do they love their own child?

Have you ever seen a bird, how birds take care of their families and build houses?

What is the greatness of a person in this, I do not understand this?

No one else has ever made the mistake of thinking of oneself as better than everyone else.

What is arrogance - I do not understand this?

If the last step is going to be immortal, then there is some understanding - when the last step is death, then what is the pride and what is the status?

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औकात क्या होती है ? 

क्या पता है कि औकात कहते किस को हैं ?

क्या आप ने पूरी कुदरत को पहचान लिया है कि आप कहते हो कि व्यक्ति सब से बढ़िया चीज़ है?

अभी जब हम को खुद की ही कोई पहचान है नहीं तो हम कैसे कह सकतें हैं कि खुदा क्या है, और व्यक्ति खुदा की इमेज का है - कैसे? 

कैसे ?

कैसे कोई ऐसे सोच भी सकता है , मेरे को तो यही समझ नहीं अब तक आई ?

अगर कोई व्यक्ति अपने परिवार के लिए कुछ करता है, आपने मुल्क के लिए करता है, या फिर अपनी कौम का कुछ करता है तो क्या यह करने से वो  व्यक्ति बड़ा बन जाता है ?

कभी जानवर को देखा है, वो खुद के बच्चे का कैसे प्यार करतें हैं ?

कभी पंछी को देखा है कि पंछी परिवार की देखभाल  कैसे करतें हैं और कैसे घर बनातें हैं ?

इस में व्यक्ति की अलग सी कौन सी महानता हो गई, यही मेरे को समझ नहीं ?

खुद को भी सब से बेहतर समझने की भूल जितनी इंसान ने की है, ऐसी भूल ओर किसी ने कभी नहीं की ?

घमंड किस बात का है - मेरे को यही समझ नहीं आती?

अगर आतिम कदम अमर होने वाला हो तो कुछ समझ है -जब आखिरी कदम मौत ही है तो घमंड किस बात का और औकात किस बात की है?

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Buddha and Nirvana


When the seed explodes, so does the seedling. In the same way today, seeing the environment spread all around, a thing written in the Puranas came to my mind that whenever a person attains Nirvana, then at that time everything in nature is more quantity and better quality. With this statement I fell silent and the moment entered me

 Not only mine, today's time of all of us is passing through such a dimension, here today the group has to attain Nirvana, not any one.

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बुद्धा और निर्वाना 

जब बीज फूटता है, तो अंकुर होता है। ऐसे ही आज चारों तरफ फैले माहौल को देख कर, पुराणों में लिखी एक बात मेरे जेहन में आई  कि जब भी कोई इंसान निर्वाणा प्राप्ति करता है तो उस वक़्त में कुदरत  में हर चीज़ ज़्यादा मात्रा और बेहतर क्वालिटी की होती है।इस स्टेटमेंट के साथ मैं चुप हो गई और पल मेरे भीतर प्रवेश कर गया. मेरा ही नहीं, हम सब का आज का वक़्त एक ऐसे आयाम में से गुज़र रहा है , यहाँ पर आज समूह को निर्वाना प्राप्ति होनी है, किसी एक को नहीं।

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pilgrimage of words

If you start looking at any word of life or start reading it, then the word also becomes a cave. As we go within the word, the word itself becomes manifest taking the character of infinite form. The size of every part of life is very big, which has no end. Then the natural nature of each part spreads by taking a huge form in itself. Whenever I look towards nature, nature pushes me towards my own vast form. I get absorbed in the lap of my own vast form and dissolve in the universe. Here I become one with the natural form of my self.

लफ़्ज़ों का तीर्थ 


ज़िंदगी के किसी भी लफ्ज़ को गौर से देखने लगो या पढ़ने लगो तो लफ्ज़ भी एक गुफा बन जाता है। जैसे जैसे हम लफ्ज़ के भीतर जातें हैं तो लफ्ज़ ही अनंत रूप का किरदार ले के प्रगट हो जाता है। ज़िंदगी के हर हिस्से का आकार बहुत ही बड़ा है, जिस का कोई भी अंत नहीं है। फिर हर हिस्से का कुदरती स्वभाव खुद में विशाल रूप ले के फैला हुआ है। कुदरत की ओर जब भी मैं देखती हूँ तो कुदरत मेरे को मेरे ही विराट रूप की ओर धकेल देती है।  मैं मेरे ही विशाल रूप की गोद में लीन हो के ब्रह्माण्ड में घुल जाती हूँ।  यहाँ पर मैं मेरी मैं के कुदरती रूप के साथ एक हो जाती हूँ।




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रेतली राह का मुसाफ़िर

रेतली राह का मुसाफ़िर
माननीय प्यार , आज मैं खुद को आप के आगे सन्मानित करना चाहती हूँ कि मैं आप की रचना हूँ ; और खुदा के आगे मैं खुद को धन्यवाद का उपहार देना चाहती हूँ कि 'धन्यवाद शहीर ' कि आप ने खुदा से प्यार किया। हर किर्या के लिए धन्यवाद
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