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Have to walk like a Sanyaasi - No Matter what the Path

Beautiful moment never goes out of life


 Today is not only a day, every moment of my life is a beautiful moment and I have been shining more from inside to outside. My thoughts and feelings are traveling with each other in this universe. Whatever I experience in my journey, how I was in condition and how I took action, or how an incident happens in front of me and what does it teach me, and how do I understand that this learning is right for me Is or is wrong. I share that experience with you all through Blogger, Facebook, twitter, Pinterest, Linkedin and Youtube.
Because we are all just blessings for each other
 blessings
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आज का दिन ही नहीं, मेरे जीवन का हर पल  खूबसूरत पल है  और मैं भीतर से बाहर की और चमकती आ रही हूँ। मेरी सोचें और भावना एक दूसरे के साथ मिल कर इस ब्रह्मण्ड में यात्रा कर रही हैं।  मेरी इस यात्रा में जो भी मुझे अनुभव होता है कि कैसे मेरे हालत थे और कैसे मैंने एक्शन लिया, या फिर कैसे मेरे आगे एक घटना घटती है और वो मेरे को क्या सीख देती है, और मैंने कैसे समझती हूँ कि यह सीख मेरे लिए सही है और या गलत है।उस अनुभव को Blogger, Facebook , twitter , Pinterest, Linkedin  और Youtube  के द्वारा आप सब से साझा करती हूँ।  
क्योंकि हम सब एक दूसरे के लिए सिर्फ ब्लेस्सिंग्स है 
 आशीर्वाद
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Whenever we start connecting with the inner inner self, then we should understand that we have started going towards our own soul. Anything or any part of life: Everything has a purpose in life. Life is a very big and very simple one composition, like our body. When we look at it from our own soul, then nothing wrong appears in life nor any coincidence. It seems that this life is a very big experiment, which we are all completing. The learning that we get from every event of life is just a brick of this experiment. And it is our progress to get closer to that experiment, which is a blessing for us.
* Love you all
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जब भी हम खुद के भीतर की चुप से जुड़ना शुरू हो जातें हैं तो समझ लेना चाहिए कि हम खुद की आत्मा की ओर  जाना शुरू कर दिया है। कोई भी चीज़ हो या कोई भीजीवन का हिस्सा : जीवन में हर चीज का उद्देश्य है।जीवन एक बहुत बड़ा और बहुत गेरा एक ही संघटन  है, जैसे हमारा जिस्म।  जब हम इस को खुद की आत्मा में से देखतें हैं तो जीवन में कुछ भी गलत दिखाई नहीं देता और ना ही कोई संयोग दिखाई देता है।  यह ऐसे लगता है कि यह जीवन कोई बहुत बड़ा प्रयोग है, जिस को हम सब पूरा कर रहे हैं।  जीवन की हर घटना में से जो हम को सीख मिलती है, वो सीख इस प्रयोग की सिर्फ एक ईंट है। और हमारे लिए उस प्रयोग के नज़दीक जाने की हमारी तरक्की है, जो हमारे लिए आशीर्वाद है। 
* आप सभी को प्यार 




Experience gives wings to life

Who is that 


 
Today: I see myself being born in every moment. Then I ask myself that who was born long ago, 'Who is that?'

 A 'piece of meat' was born long ago, I was not.

 I am still being born, every moment produces me. I have no hesitation in saying that Yuga has caused me. It is our 'I', it takes ages for it to be born.

Every moment surprises me and introduces my precious beauty to me. The 'I' that I am living today gives me such lessons every moment that I can become who I am, I can become that person. And I understood that a person does not need to go anywhere to become a human being, life itself makes a human being what a human being has to be.

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वोह कौन है 

आज: मैं खुद को हर पल में पैदा होती देखती हूँ।  तो फिर खुद को सवाल करती हूँ कि कि जो बहुत पहले पैदा हुई थी, 'वोह कौन है ?' 
 बहुत पहले एक 'मांस का टुकड़ा' पैदा हुआ था, मैं नहीं थी। 
 मैं तो अभी भी पैदा ही हो रही हूँ, हर पल मेरे को पैदा करता है।  मेरे को यह कहने में झिझक नहीं है कि मेरे को युग ने पैदा किया है।  यह जो हमारी ' मैं' है , इस को पैदा होने में युग ही लगतें हैं। 
हर पल मेरे को हैरानी देता है और मेरी ही अनमोल शोभा को मेरे से मिलवाता है।  आज जिस 'मैं' को मैं जी रही हूँ , हर पल मेरे को ऐसे सबक देता है कि मैं जो मैं हूँ , मैं वो मैं बन सकूं।  और मैं यह समझ गई कि इंसान को इंसान बनने के लिए कहीं जाने की ज़रुरत नहीं होती, खुद ज़िंदगी ही इंसान को वही बना देती है, जो इंसान ने बनना ही होता है। 
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I am who I am!


We never change because of attachment, when we know that attachment is the cause of our pain. When the fascination increases like a disease, then we do not even know what kind of cases we associate with.

Life is a changing process. It is our nature to change, so we are not late in changing anything. Every day is new, every breath is new, our life is new every day. When we recognize this newness, then our energy will start appearing like shedding water, then we will start living in healthy life.
Whatever has passed, passed away. Living in the past is a pain. Yesterday will not work today.
Let's start living in freshness like dawn from today with openness and newness!
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मैं, जो मैं हूँ!


मोह के कारण हम कभी भी बदल नहीं पाते, जब कि हम जानते हैं कि मोह ही हमारे दर्द का कारण है। मोह जब रोग की तरह बढ़ जाता है तो हम को पता भी नहीं चलता कि हम कैसी कैसी केसों के साथ जुड़ जाते हैं। जीवन एक बदलती हुई पर्किर्या है। बदलना हमारा स्वभाव है, सो हम को कुछ भी बदलने में देर नहीं होती।हर दिन नया होता है , हर सांस नई है , हमारा जीना हर रोज़ नया होता है। जब हम इस नयेपन को पहचान गए तो हमारी ऊर्जा बहा पानी की तरह दिखाई देने लगेगी तो हम तंदरुस्त जीवन में जीने लग जाएंगे। जो बीत गया, बीत गया। बीते में जीना दर्द है। बीता कल आज पर काम नहीं करेगा। चलो आज से खुलेपन और नयेपन से सुबह की तरह ताजेपन में जीने की शुरूआत करें !
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Today


Today: Think of me flows like clear water and emotions fly like fresh air, which gives me healthy life. I speak only from deep experience. When today I have come to know that a part of me is the universe because I am a part of the universe, then when my fitness starts in me, then it will be my first step to make the universe healthy. Love, light and blessings! Let's live a healthy life from today
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आज

आज: मेरी सोचें साफ़ पानी की तरह बहती है और भावनाये, ताज़ी हवा की तरह उड़ती है , जो मेरे को तंदरुस्त जीवन देती हैं।  मैं गहरे अनुभव से ही बात करती हूँ. जब आज मैं यह जान ही गई हूँ कि मेरा ही एक हिस्सा ब्रह्माण्ड है क्योंकि मैं एक हिस्सा ब्रह्माण्ड का ही हूँ तो मेरी तंदरुस्ती  जब मेरे में शुरू हो जायेगी तो यह ब्रह्मण्ड को तंदरुस्त बनाने  का मेरा पहला कदम होगा।
 प्यार, प्रकाश और आशीर्वाद !
चलो आज से तंदरुस्त जीवन को जीयें 


When understood, the senselessness was out!

Whenever we look at life from anywhere, it will seem to be the same, because the quality of life is the same.
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जब भी हम जीवन को कहीं से भी गौर से देखेंगे तो जीवनधारा एक ही प्रतीत होगी, 
क्योंकि जीवन का गुणरूप एक ही है



 Our life is water, water remains good as long as it flows.
हमारा जीवन पानी ही है,  पानी तब तक ही अच्छा रहता है, जब तक यह बहता रहता है। 
 





Sanskrit music of culture with flowing water:
The sounds of this culture along with the slow sound of flowing water always flow by creating moisture in my eyes and taking me to myself. When the moisture of my eyes flows from the particle of existence, it silently takes the mind into a thoughtlessness and unites with life.
https://youtu.be/gX-dC-ygJx0
बहते पानी के साथ संस्कृति का संस्कृत संगीत: 
बहते पानी की धीमी आवाज़ के साथ यह संस्कृति के सुर, मेरी आँखों में नमी पैदा करके सदा ही मुझे खुद के बहा में ले के बहते हैं। जब मेरी आँखों की नमी  वजूद के कण कण में से बहती है तो चुपचाप ही मन को निर्विचारता में ले जा कर जीवन के साथ एक कर देती है। 


Nature is such a book, when we learn to read it, we get the degree to which we can never buy even if we give millions. All this priceless degree gives us the citizenship of the universe.
कुदरत एक ऐसा ग्रन्थ है, जब हम इस को पढ़ना सीख जातें हैं तो हम को वो डिग्री हांसिल होती है, जिस को करोड़ो दे के भी हम कभी ख़रीद नहीं सकते। यह सब से अनमोल डिग्री दिलवा के हम को ब्रह्माण्ड की नागरिकता देती है।



When our life is like flowing water we always enjoy life in freshness.
जब हमारा जीवन बहा पानी की तरह होता है तो हम सदा ताजेपन में जीवन का आनंद लेते हैं






Our emotions are water, which keeps on flowing, when the emotions stop, then the condition of our mind, we call it suffocation.
हमारी भावनाएं पानी होती है, जो बहती ही रहती है , जब भावनाएं रूकती है, तब हमारे मन की जो हालत होती है, उस को हम घुटन कहतें है। 





In the same way, our thinking is also water, whose nature is just to flow. When we make a thought a desire, we become small canals, which are part of a river.
ऐसे ही हमारी सोचें भी पानी है, जिन का स्वभाव है सिर्फ बहते जाना।  जब हम एक सोच को  इच्छा बनातें हैं तो हमछोटी सी कनाल बन जातें हैं, जो किसी दरिया का हिस्सा होती है।



Just like when our idea becomes our search, then we who used to flow like a small canal, suddenly we become a river. When we achieve success, we become as big as the sea.
ऐसे ही जब कोई हमारा विचार हमारी खोज बनता है, तो हम जो छोटी सी कनाल की तरह बहते थे, अचानक ही हम दरिया बन जातें हैं।  जब हम को कामयाबी की प्राप्ति होती है तो हम समुन्दर की तरह बड़े हो जातें हैं।
 

Our life is also flowing water. Whether thinking or feeling. When stopped, algae will be born. We address this kai (algae) in the name of suffocation, infidelity and helplessness.
हमारा जीवन बहा भी बहता पानी है।  चाहे सोच है या भावना। जब रुकेगी तो काई  पैदा होगी।हम इस काई  को घुटन, बेवसी और लाचारी के नाम से सम्बोधन करतें हैं। 


We have always kept flowing, even if we are a small canal.
हम ने सदा बहते ही जाना है, चाहे हम छोटी सी कनाल ही हो।  



Because i'm Worth It

Our life is a rainbow, our experiences fill our lives with colors of art and decorate us with the tones of understanding

I am rainbow of natural colors


I am rainbow of natural colors. Every thought of mine creates a color and every emotion of mine becomes a cloud for that. Whenever I look in the light, I see myself a rainbow of feelings, which adorns my life path with colors.
This perfect mixture of mine and nature gives rise to the question in me-
'Who gave birth to whom'?
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मैं कुदरती रंगों की इंद्रधनुष हूं।  मेरी हर सोच एक रंग को पैदा करती है और मेरी हर भावना  उस के लिए बादल  बन जाती है।  जब भी मैं प्रकीर्ति में से देखती हूँ तो मैं खुद को अहसासों की एक इंद्रधनुष देखती हूँ, जो मेरी जीवनमार्ग को रंगों से सजा देती है। मेरा और कुदरत का यह सही मिश्रण मेरे में सवाल को जन्म देता है-
' किस ने किस को जन्म दिया '?
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ਮੈਂ ਕੁਦਰਤੀ ਰੰਗਾਂ ਦਾ ਸਤਰੰਗੀ ਹਾਂ।  ਮੇਰਾ ਹਰ ਵਿਚਾਰ ਇਕ ਰੰਗ ਪੈਦਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਮੇਰੀ ਹਰ ਭਾਵਨਾ ਉਸ ਲਈ ਬੱਦਲ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।  ਜਦੋਂ ਵੀ ਮੈਂ ਕੁਦਰਤ ਵਿਚੋਂ ਦੀ ਖੁਦ ਨੂੰ ਤੱਕਦੀ ਹਾਂ ਤਾਂ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਅਨੁਭਵਾਂ ਦੀ ਸਤਰੰਗੀ ਹੀ ਤੱਕਦੀ ਹਾਂ, 
ਜੋ ਮੇਰੇ ਜੀਵਨ-ਮਾਰਗ ਨੂੰ ਰੰਗਾਂ ਨਾਲ ਸਜਾਂਦੀ ਹੈ।  
ਮੇਰਾ ਅਤੇ ਕੁਦਰਤ ਦਾ ਇਹ ਸੋਹਣਾ ਮਿਸ਼ਰਣ ਮੇਰੇ ਵਿਚ ਸਵਾਲ ਪੈਦਾ ਕਰਦਾ ਹੈ -
'ਕਿਸ ਨੇ ਕਿਸ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦਿੱਤਾ'?

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The best place for me in life is when I am with nature

जीवन में मेरे लिए सब से अच्छी जगह वो है, जब मैं कुदरत के साथ हूँ 

ਮੇਰੇ ਲਈ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਸੋਹਣੀ ਥਾਂ ਉਹ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਦ ਵੀ ਮੈਂ ਕੁਦਰਤ ਦੇ ਨਾਲ ਹੁੰਦੀ ਹਾਂ 




I always want to live the natural age of nature because nature always stays young

मैं सदा कुदरत की हम-आयु रहना चाहती हूँ क्योंकि कुदरत सदा जवान रहती है 

ਮੈਂ ਸਦਾ ਹੀ ਕੁਦਰਤ ਦੀ ਹਮ-ਉਮਰ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹਾਂ , ਕਿਉੰਕਿ ਕੁਦਰਤ ਸਦਾ ਜਵਾਨ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ। 





I am the solid color of the color of nature.

मैं प्रकीर्ति के ही रंग का पक्का रंग हूँ।

ਮੈਂ ਕੁਦਰਤ ਕੇ ਹੀ ਇੱਕ ਰੰਗ ਦਾ ਪੱਕਾ ਰੰਗ ਹਾਂ।  




Nature and I are the perfect blend

कुदरत और मैं एकदम सही मिश्रण हैं 

ਕੁਦਰਤ ਅਤੇ ਮੈਂ ਇੱਕਦਮ ਸਹੀ ਮਿਸ਼ਰਣ ਹਾਂ।  




Oh beautiful nature, you are the best companion for me

ऐ कुदरत, मेरे लिए सिर्फ तू ही सब से अच्छा साथी है 

ਹੇ ਕੁਦਰਤ,  ਤੂੰ ਹੀ ਮੇਰਾ ਸਭ ਤੋਂ ਸੋਹਣਾ ਸਾਥੀ ਹੈ 





O nature, every experience of mine emanates from Thee alone, therefore Thou art also my way and destination.

ऐ कुदरत, मेरा हर अनुभव तुझ में से आता है, इस लिए तू ही मेरी राह और मेरी मंज़िल है।

ਹੇ ਕੁਦਰਤ, ਮੇਰਾ ਹਰ ਅਨੁਭਵ ਤੇਰੇ ਵਿਚੋਂ ਹੀ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਤੂੰ ਮੇਰੀ ਰਾਹ ਵੀ ਹੈਂ ਅਤੇ ਮੰਜ਼ਿਲ ਵੀ। 

 



In life, you are the only companion with whom I can walk for life.

जीवन में तू ही मेरा एकमात्र साथी हैं, जिस के साथ मैं उम्र भर चल सकती हूँ 

ਜੀਵਨ ਵਿਚ ਸਿਰਫ ਤੂੰ ਮੇਰਾ ਉਹ ਸਾਥੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਮੈਂ ਜੀਵਨ ਭਰ ਤੁਰ ਸਕਦੀ ਹਾਂ। 

Good thinking and happy life

 Is there any such dimension?

Life is an infinite form of infinity. The deepest mystery of this infinity is that the journey of this, whether of the era, but understanding also comes in the moment.



Yesterday when I went to the Costco store, I saw the flowering trees in bloom, then the question arose, why does everything seem to me that the pace of life is very fast. Be it experienced in the moment or my everyday thinking: Every moment changes very fast. No attention to body. I see how my life is running away and I am sitting somewhere looking towards this runaway life.

 I am neither tired nor sleepy, but I feel myself awake from the deepest and also feel very deep fitness.

 A sound is falling silently in my ears behind this huge spread. Even though she is silent, she is silently giving a message that 'See where you are sitting'

And I am sitting in a loss of life, from here I am looking at the embrace of life and death.

 In front of me I am seeing both of them together. I am clearly seeing the death born in my life.

Then I see myself sitting in this deep silent dimension.

 I am who I am, who is sitting in a distance far away, who I have been far away from my body. I question myself, why don't I leave this body?

I saw today for the first time that this is a different kind of dimension - in which my 'I' is living. Which is looking at both death and life. Who neither has attachment to death nor life. I remain the traveler of only such life, from which sees the blossoming life and the dying life.

 Be it me or a flower.

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जीवन अनंतता का अनंत रूप है।  इस अनंतता का सब से गहरा रहस्या  यही है कि इस की यात्रा चाहे युग की है पर समझ पल में भी आ जाती है 

क्या ऐसा आयाम भी कोई है ? 


कल जब मैंने Costco  स्टोर में गई तो मैंने खिले हुए फूलों के पेड़ों को देखा, तो  सवाल पैदा हुआ तो मेरे को क्यों सब कुछ ऐसे प्रतीत होता है कि जीवन की स्पीड बहुत तेज़ है। पल पल में अनुभवीं की गती  हो या मेरी हर रोज़ की सोच: हर पल बहुत तेज़ी से बदलता है।  जिस्म की ओर  तो ध्यान ही नहीं। देखती हूँ कि कैसे मेरा जीना भागता चला जा रहा है और मैं कहीं बेथ कर इस भागते जीवन की ओर  देख रही हूँ। 

 मैंने जो न ही थकी हुई हूँ और ना ही सोई हुई हूँ,  बलिक  मैं बहुत गहरे में से खुद को जागा  हुआ महसूस करती हूँ और  बहुत गहरी तंदरुस्ती  को भी महसूस करती हूँ।  

 इस विराट फैला की गती  के पीछे एक आहट चुपचाप मेरे कानों में पड़ रही है।  चाहे वो  चुप है पर वो चुप चुपचाप एक संदेसा दे रही है कि 'देख तू कहाँ पर बैठी है ' 

और  मैं जीवन की एक नुकर में बैठी हूँ, यहाँ से मैं  जीवन और मौत  का आलिंगन  देख रही हूँ। 

 मेरे ही आगे मैं दोनों को एक साथ देख रही हूँ।  पैदा होते जीवन में पैदा होती मौत को साफ़ साफ़ देख रही हूँ। 

तब मैं खुद को जो इस गहरे चुप-आयाम में बैठी है, उस की तरफ देखती हूँ। 

 मैं जो मैं हूँ,  जो बहुत दूर किसी नुकर में बैठी हूँ , जो मैं खुद के जिस्म से बहुत दूर निकल चुक्की हूँ।  खुद को सवाल करती हूँ तो कि फिर इस जिस्म को छोड़ क्यों नहीं देती ?

मैंने देखा आज पहली बार कि यह तो एक अलग ही किस्म का आयाम है- जिस में  मेरी 'मैं' जी रही है।  जो मौत को और जीवन को दोनों को देख रही है।  जिस को न ही मौत से लगाव है और ना ही जीवन से।मैं सिर्फ ऐसे जीवन की यात्री बनी हुई है, जिस में से खिलते जीवन को और मुरझाते जीवन को देखती है।

 वो चाहे मैं हूँ या कोई फूल। 


  

Do not waste energy and bloom

 Have you ever seen your own thoughts blossom in yourself?


When I saw thinking and feeling sprouting in itself,
I saw the same feeling when a seed sprouted. 
Then I realized that life is the same in every direction
 



The day I saw my thinking being born, after that day I always saw countless thoughts, feelings and experiences blossom in myself. I myself have become such a flower garden - in which every moment, thoughts and feelings like flowers start blooming,

 - So how do I not feel refreshed?

 - Then how do I not feel newness?

 - Then how do I not feel well?

 I began to see that my body has become a fertile land - in which every seed will sprout. Then I came to know that the real purpose of this body starts only when its sterility ceases completely.

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मैंने खुद में ही जब सोच और भावना को अंकुर होते देखा 
तो वोही अहसास एक बीज को अंकुर होते देखा, तो मिला। 
 तब जान गई  कि जीवन  हर दिशा में एक जैसा ही है 

 क्या आप ने कभी खुद की सोच को खुद में खिलते हुए देखा है ?

 

जिस दिन मैंने खुद में सोच को पैदा होते देखातो उस दिन के बाद मैंने सदा ही खुद में अनगिनत सोच, भावना और अनुभवों को खिलते देखा।  मैं तो खुद में ही एक ऐसी फुलवाड़ी बन गई- जिस में हर पल फूलों की तरह सोच और भावनाएं खिलने लगी, 



 -  तो मैं कैसे नहीं ताज़ा महसूस करती ?

 -  फिर मैं कैसे नहीं नयापन महसूस करती ?

 - फिर मैं कैसे नहीं तंदरुस्ती महसूस करती?  

 मैंने देखने लगी कि मेरा यह जिस्म एक उपजाऊ ज़मीन बन गया है - जिस में हर बीज अंकुर होवेगा।  तब मैंने जाना कि इस जिस्म का असली मक़सद उस वक़्त ही  शुरू होता है, जब इस का बाँझपना सम्पूर्ण रूप में ख़त्म हो जाता है। 

Life is journey of feelings

 Life is journey of feelings 


Life is not just travel, life is everything - 
whatever is seen through life, life is the same.


My feelings were the holy book for me, it is a holy book, there will always be a holy book! That is why I have lived with so much connection to everything and every part in my life.

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My life is my religious book.

Whose first chapter became this world, which made the identification of both negative and positive true and real.

Whose second chapter opened again, that is nature. Whatever was learned or understood from the world: whether it was really true and real, it was tested by nature.

Whose third chapter is - 'I'

Now I am reading this 'I', whose circle is space and whose length and width are infinite. Sometimes this chapter takes me to such a place, that I feel that the center of all this vast spread is 'I'. And what is this 'I'?

Is it individual or group?

Now I am  reading this paragraph.

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This universe is the real university.

This world is a class room.

Life is a student.

Which has only one subject - 'Relationship'

Our experience is our result.

Our trust is our test.

We know with joy and sadness that we passed the test or failed.

Then freedom is our 1st grade.

Prudence is our stipend.

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How can I call myself wealthy, if a creature is hungry, how?

How can I consider myself a human being, if there is a worm of discrimination in my mind, how?

How did I become religious, when I did not understand me yet, how?

Till today I do not understand myself, how can I understand the world, how?

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1-) If we want to know the greatness of a person, then we have to see that -

- How and what does that person use money on?

- How does that person make his own idea his own action?

And to see the understanding of a person, one has to look at his life and how happy and calm he is?

2-) If we have to identify a bad person, then we should just go to his shelter. If the behavior of such a person would be imprisoned, Aura would never be a liar. Aura is a symbol of human thinking and feeling.

3-) The identity of a good person is always reflected in his life.

 Is there any flow in life?

 How will it be recognized?

 The aura of such a person is always fresh and new. In that we see some understanding, but we will stand in question. The question is proof that such a person sees life even from a particular place, which we do not know yet. Whether this person is positive or negative, these waves have to be captured by our mind.

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जीवन भावनाओं की यात्रा है 

ज़िंदगी सिर्फ यात्रा नहीं, ज़िंदगी सब कुछ है - 

जिस भी चीज़ में  से ज़िंदगी को देखेंगे, ज़िंदगी वोही है। 


मेरी भावनाएँ ही मेरे लिए पवित्र ग्रंथ थीं, पवित्र ग्रंथ है, हमेशा पवित्र ग्रंथ रहेगा! इसलिए मैंने अपने जीवन में हर चीज़ को और हर हिस्से को इतनी सलग्नता से जीया है। 

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मेरी ज़िंदगी मेरी धार्मिक किताब है।

जिस का पहला चैप्टर यह संसार बना, जिस ने नकारत्मिक और सकारत्मिक दोनों की पहचान सही और असली करवाई।

जिस का फिर दूसरा चैप्टर खुला, वो है कुदरत। जो संसार से सीखा या समझा: क्या वो सब सच में ही सच और असली था, इस का टेस्ट कुदरत ने लिया। 

जिस का तीसरा चैप्टर है,-  'मैं' 

अब मैं इस 'मैं' को पढ़  रही हूँ, जिस का घेरा स्पेस है और  जिस की लम्बाई और चौड़ाई का अनंत फैला है।  यह चैप्टर कभी कभी मेरे को ऐसी जगह पर ले जाता है, कि मेरे को यह लगने लगता है कि यह सब विराट फैला का केंद्र 'मैं' है।  और यह 'मैं' है क्या ?

क्या यह व्यक्तिगत है या समूहगत है ?

अब  मैं इस पैराग्राफ को पढ़ रही हूँ।  

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यह ब्रह्मण्ड ही असली यूनिवर्सिटी  है। 

यह संसार एक क्लास-रूम है। 

जीवन एक विद्यर्थी है। 

जिस में एक ही विषय है -'रिश्तेदारी'

हमारा अनुभव, हमारा नतीजा है।  

हमारा भरोसा हमारा टेस्ट है। 

खुशी और उदासी से हम जाने जाते हैं कि हम ने टेस्ट पास किया या फेल।

फिर आज़ादी हमारी १स्ट ग्रेड है। 

समझदारी हमारा वज़ीफ़ा है।   

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मैं कैसे खुद को दौलतमंद कह सकती हूँ, अगर कोई जीव भूखा है, कैसे? 

मैंने कैसे खुद को इंसान मान लूं, अगर मेरे दिमाग़ में भेदभाव का कीड़ा रींगता है , कैसे ?

मैं कैसे धार्मिक हो गई, जब मेरे को मेरी तो अभी तक समझ नहीं आई, कैसे ?

जब आज तक मैं खुद को ही समझ नहीं स्की तो मैं कैसे संसार को समझ सकती हूँ, कैसे?

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१-) अगर हम ने किसी इंसान की महानता को जानना हो तो हम ने यह देखना है कि -

- वो इंसान पैसे को कैसे और किस पर उपयोग करता है ?

- वो इंसान आपने खुद के विचार को कैसे खुद  का एक्शन बनाता है ? 

और किसी इंसान की समझ को देखने केलिए उस के जीवन को देखना पड़ेगा कि वो कितना खुश और शांत  है ?

२-) अगर हम ने बुरे इंसान की पहचान करनी है तो बस उस की शरण में चले जाना चाहिए।  अगर ऐसे व्यक्ति का व्यवहार ढोँगी होगा, औरा  कभी झूठा नहीं होता।  औरा  इंसान की सोच और भावना का प्रतीक होता है। 

३-) अचे इंसान की पहचान सदा ही उस के जीने से झलकती है। 

 क्या जीने में बहा है ?

 यह पहचान कैसे आएगी ? 

 ऐसे इंसान का औरा  सदा ताज़ा और नया होता है।  उस में  हम को कोई समझ दिखाई देती है पर हम सवाल में खड़े हो जाएंगे।  सवाल इस बात का सबूत है कि ऐसा इंसान किसी ख़ास जगह से भी जीवन को देखता है , जिस का अभी हम को पता नहीं।  यह इंसान पॉजिटिव है या नेगेटिव,  यह तरंगें हमारे मन ने पकड़ ही लेनी है। 


Rosary of experiences

Life is the garland of countless experiences, 

served in a thread of understanding, 

which further brightens the beauty of humanism.

Rosary of experiences 

 


Beautiful sky filled with amazing clouds, rising sun and hidden sun, the song of a bird in the morning and the sound of flowing water; Today when I was in the silent dimension, I had only one space, out of which when I looked at the world for a moment, I saw myself as a space for all this; Birds used to fly in me, water flowed in me, clouds of clouds were flying in me. It is neither my belief nor I have any illusion, I am living in it. To see and understand how I describe my own life, this is my action and my true description.

Time Traveler


Our conscious form is that which is actually the real 'time traveler'. Which has such power that it can move freely in both front and back directions. Whenever one of the layers of the era sits in the lap of any moment, that moment is such a moment, which shows itself to me by making itself an era.

 What is the time?

 How many forms of time are there?

 What is the power of time?

 What is the original form of time?

 How can we cross the time?

 What does time travel mean?

 What is the power in the moment that makes itself an era?

 What is the ability in the era that gives shape to the moment itself?

 Time?

 Where is the time taken in the moment of happiness?

 How do you stand naked while in pain?

 What is the length of this time?

 What is the width of this time?

 What is the pure form of time, which is the same as conscious in every direction?

What we know by the name of time, when I wanted to find this time in the center of myself, it was the time there - it was not 'time'.

Time and consciousness:

Our pure consciousness wears time. Neither do we know the time till today nor the consciousness. Time and consciousness are just space. When we look through the space, towards all that life, then it is just one particle. Then all our belief systems fly away in the storm of the moment. And we live as eras in just a moment's fire.


Web of desires


Look at any part of life, out of that we will see our shape, our nature and our life. As the spider makes webs, so are we, our webs are our desires. Each of us wishes takes the form of thinking, then takes us deeper. If any of the thoughts becomes our idea, then we become incarcerated in our own idea. We do not know how deep we fall. Which we are huge like space, and light like air, we forget to walk on the ground too, leave it to fly. This is the star circle, which is Galaxy, it is also our web. Now, we ask ourselves and looking at one question that, -

When we cannot get out of our own non-visible mind, then how will we be able to be a player of space?

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जीवन अनगिनत अनुभवों की माला है, जो समझ के धागे में परोई हुई  है, जो इंसानीयत की खूबसूरती को ओर भी चमका देती है

अनुभवों की माला 


अद्भुत बादलों के साथ भरा सुंदर आकाश, उगता हुआ सूरज और छिपता  हुआ सूर्य,  भोर में एक पक्षी का गीत और बहते हुए पानी की आवाज़; आज जब मैं चुप आयाम में थी तो मैंने सिर्फ एक स्पेस थी, जिस में से जब मैंने संसार की ओर  पल के लिए देखा तो मैंने खुद को इन सब के लिए खुद को भी स्पेस के रूप में देखा; पक्षी मेरे में उड़ता था, पानी मेरे में बहता था, बादलों के झुण्ड मेरे में उड़ रहे थे।यह न ही मेरा विश्वास है और न ही मेरा कोई भ्र्म है, मैं इस में जी रही हूँ।  मैं आपने खुद के जीने को कैसे ब्यान करती हूँ, यह देखने और समझने के लिए यह मेरा एक एक्शन है और मेरा सच्चा वर्णन है। 

वक़्त में यात्रा


हमारा चेतनरूप ऐसा है कि जो असल में  असली 'time traveler ' है।  जिस में ऐसी  शक्ति है कि यह आगे और पीछे दोनों दिशों में आराम से घूम सकता है। जब कभी भी युग की परतों  में से किसी पल की आगोश में मुझे बैठता है तो वो पल ऐसा पल होता है ,जो खुद को युग बना कर मेरे को दिखाता है।  

 वक़्त क्या है ?

 वक़्त के कितने रूप हैं?

 वक़्त की शक्ति क्या है ?

 वक़्त का असली रूप क्या है ?

 वक़्त को हम कैसे पार कर सकतें हैं?

 वक़्त की यात्रा का मतलब क्या है ?

 पल में ऐसे कौन सी शक्ति है कि खुद को युग बना देती है ?

 युग में ऐसी कौन सी योग्यता है ,जो खुद को पल जितना आकार दे देता है ?

 वक़्त ?

 ख़ुशी के पल में वक़्त कहां  लीं हो जाता है ?

 दर्द में वक़्त में वक़्त कैसे नंगा हो के खड़ा रहता है ?

 यह वक़्त की लम्बाई क्या है ?

 इस वक़्त की चौड़ाई क्या है ?

 वक़्त का शुद्ध रूप है क्या, जो कि हर दिशा में चेतनरूप जैसा ही है ?

हम जिस को वक़्त के नाम से जानते हैं, जब इस वक़्त को मैंने खुद के केंद्र में ढूँढ़ना चाहा तो वहां पर यह जो वक़्त है- यह 'वक़्त' नहीं था। 

वक़्त और चेतना:

हमारी शुद्ध चेतना ही वक़्त का लिबास पहन लेती है।  ना ही हम वक़्त को आज तक जानते हैं और ना ही चेतना को।  वक़्त और चेतना सिर्फ स्पेस है।  स्पेस में से जब हम देख्नेगे ,उस तमाम जीवन की ओर, तो यह सिर्फ एक कण है।  तब हमारे सब विश्वास सिस्टम पल के तूफानी बहा में उड़ जातें हैं। और हम सिर्फ एक पल की आगोश में युग बन कर जीते हैं।  

कामनाओं का जाल 


ज़िंदगी के किसी भी हिस्से में से देख लो, उस में से हम को हमारा ही आकार , हमारा ही स्वभाव और  हमारा ही जीवन दिखाई देगा।  जैसे मकड़ी जाल बनाती है, वैसे ही हम हैं, हमारा जाल हमारी कामनाएं हैं। हम प्रत्येक की कामनाएं सोच का रूप ले कर, फिर हम को ओर  गहरा फसा लेती है।  सोचों में से कोई सोच हमारा विचार बन जाती है , तो हम खुद के idea  में क़ैद हो जातें हैं। हम को पता ही नहीं चलता कि कितनी गहरी खाई में हम गिर जातें हैं।  जो हम स्पेस की तरह विशाल हैं, और हवा की तरह हल्के हैं, हम ज़मीन पर भी चलना भूल जातें हैं, उड़ने की तो बात ही छोड़ो  दो। यह तो तारा मंडल है, यह जो गैलक्सी है, यह भी हमारा ही जाला बना हुआ है।  अब हम खुद की और देखते हुए एक सवाल खुद को करतें हैं कि, -

जब हम खुद के दिखाई न देने वाले मन से बाहर  नहीं हो सकते, तो हम कैसे स्पेस के खिड़ारी हो सकेंगे ?






Person's race on beauty

Every person's journey begins with what the eye sees


To make life beautiful, 
a child has to first give a beautiful environment, 
which we will give according to our own understanding,
 from which the journey of life begins.
My seeing:
I noticed that as a relationship, friends go to all religious places, but the beautiful beauty never appeared in anyone, neither in thinking nor in behavior - it was my sight that tied my feet and I never Religion could not be adopted. When I started looking at myself, then I realized that it is necessary to believe in yourself before I believe anything; So it is important to see everything before sure.
After that I got to deal with religious people, who used to show righteousness in debate. But there was no such thing seen anywhere in life, seeing whom one would like to be religious just like them. Not only saw Hindus, Sikhs, Muslims, Christians, they also saw an atheist; Those who never lost in debate, but looking at my face, I understood that all these arrows are moving in the dark, they have nothing to do with light; So I first thought of crossing myself over that bridge, which would make my life better, rather than teaching me logic. So my journey turned to religious texts; Whether it is the Bible or the Gita, or the Quran, or the Puranas.

Religious Text:

 When I read religious texts, all of them started to look the same to me, I had read Guru Granth since childhood. As soon as I read the texts, I started getting bored. If I chant anyone, whether it is Oum, Allah is, Waheguru; To my surprise, my existence used to run away from all these names. I used to feel that no sound of the world should fall in my ears. My ears refused to listen to every voice, be it social or religious: the voice only got away. Once when I chanted Waheguru for 2 months continuously, then I was surprised that if I had the word Waheguru in my throat, my throat would start hurting. Words cause pain, there was no other way than silence for me. So life gave me the refuge of nature. When I got natural nature started understanding life. When my journey started with nature, Osho was the first chapter of my journey. When I looked at Osho from nature, Osho was the first person who appeared religious to me. Then my look looked at an understanding. I saw that the world, be it society, God or religion, they are all chapters of life, who teach a person 'What is a person?' It gives the person identity of one-self. When the identity of one-self was made, the dimension of humanity started. Now this dimension itself has to produce the Mahatma - Dharmatma, Sadhu, Fakir, Scholar, Saint and Paigmber. Then I recognized that there is only one knowledge, which has been designed to give understanding. Which is the eternal unity of all life,
 it has only this connection with this creation.
 That eternal unity is what we call consciousness.

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आँख क्या देखती है, इस से ही हर व्यक्ति की यात्रा शुरू होती है 

जीवन को सुन्दर  बनाने के लिए
 एक बच्चे को सब से पहले सुन्दर  वातावरण देना पड़ेगा,
 जो हम खुद की समझ के अनुसार ही देंगे, 
जिस से जीवन-यात्रा शुरू होती है  

मेरी देखनी:
मैंने देखा कि रिश्ते नाते, दोस्त सब  के सब धार्मिक स्थानों पर जाते हैं, पर गहरा सुन्दर  एहसास किसी में भी कभी दिखाई नहीं दिया, न ही सोच में और न ही व्यहार में- यह मेरी देखनी ने मेरे पैरों को बांध दिया और मैं कभी किसी धर्म को अपना न सकी।जब मैंने खुद को देखना शुरू किया, तब यह समझ आ गई कि किसी भी चीज़ पर यकीन करने से पहले खुद पर यकीन होना ज़रूरी है; सो यकीन से पहले हर चीज़ को देखना ज़रूरी है। 
उस के बाद मेरा वास्ता धार्मिक लोगों से पड़ा, जो बहसबाज़ी में ही धार्मिकता दिखाते थे।  पर ज़िंदगी में कहीं भी ऐसी कोई हरकत दिखाई नहीं देती थी, जिस को देख कर उन की तरह ही धार्मिक होने को दिल करे।  हिन्दू, सिख, मुस्लिम, ईसाई को ही नहीं देखा, एक नास्तिक को भी देखा ; जो बहस-बाज़ी में कभी हारते नहीं थे, पर मेरी देखनी उन के चेहरे को देख कर समझ गई कि यह सब तीर अँधेरे में ही चल रहें हैं, इन का वास्ता कोई रौशनी से नहीं; सो मैंने पहले खुद  उस पुल  के ऊपर से पार होने की सोची, जो मेरे जीवन को बेहतर बनाये, न कि मेरे को तर्क-बाजी सिखाये।  
सो मेरी यात्रा  धार्मिक ग्रंथों की हो गई; चाहे बाइबिल ही या गीता, या क़ुरान हो या पुराण। 
धार्मिक ग्रन्थ: 

जब धार्मिक ग्रंथों को पढ़ा तो सब के सब मेरे को एक जैसे ही दिखाई देने  लगे, मैंने बचपन से गुरु ग्रन्थ पढ़ा था।  ग्रंथों को पढ़ते पढ़ते  ही मेरे में ऊब आने लगी।  अगर मैंने किसी का भी जाप करना, चाहे ओउम है, अल्लाह है, वाहेगुरु है ; मेरे लिए हैरानी थी कि मेरा वजूद इन सब नाम से दूर भागता था।  मेरा दिल करता था कि संसार की कोई भी आवाज़ मेरे कानों में न पड़े।  मेरे कानों ने हर आवाज़ को सुनने से इंकार कर दिया , समाजिक हो या धार्मिक: आवाज़ से दूर ही होती गई।  एक बार जब मैंने वाहेगुरु का जाप २ महीने लगातार किया , तो मैं फिर हैरान कि अगर मेरे गले में वाहेगुरु शब्द भी आता तो मेरा गला दर्द करने लगता।  शब्द भी दर्द का कारण बन जातें हैं, मेरे लिए खामोशी के इलावा और कोई राह नहीं थी।  तो मेरे को ज़िंदगी ने कुदरत की शरण दे दी।जब कुदरत मिली तो जीवन की समझ आने लगी। जब मेरी यात्रा कुदरत के साथ शुरू हुई तो 'ओशो' मेरी इस यात्रा का पहला चैप्टर था। कुदरत में से जब मैंने ओशो की ओर देखा तो ओशो पहले इंसान थे, जो मेरे को धार्मिक दिखाई दिए। तब मेरी देखनी ने एक समझ को ओर देखा।मैंने देखा कि संसार को, समाज हो, रब्ब हो या धर्म हो; यह सब ज़िंदगी के चैप्टर हैं, जो व्यक्ति को सीख देतें हैं कि 
 'व्यक्ति है क्या ?' यह व्यक्ति को खुद की पहचान देती है।
  जब खुद की पहचान हो गई तो इंसानियत का आयाम शुरू हो गया।  अब इस आयाम ने ही महात्मा- धर्मात्मा, साधु, फ़क़ीर, विद्वान को पैदा करना है । तब मैंने पहचान लिया कि ज्ञान सिर्फ एक ही है, जिस की समझ देने के लिए यह सब रचना को रच्या गया है। जो इस तमाम जीवन की शाश्वत एकता है, 
उस का इस रचना के साथ सिर्फ यही नाता है। 
 उस शाश्वत एकता को ही हम चेतना कहतें हैं। 

Most precious topic: "What am I"

Only when a person searches for own-self

 is one on the path of real 

and right learning

 Most precious topic: "What am I"



The most precious book is only one, 
which is not according to anyone's thoughts or thinking,
 nor according to the condition of time, 
it is only nature


A person can never understand someone's answer as his own, unless that answer becomes a question for him/her. Because we are never able to learn from any answer, until those answers become a question for us and bring it ahead of us
.

One thing I learned best from history was that no matter what the field was; Religious or social; Be it a religious teacher or a politician; Until I understand myself, my life, my circumstances, all these matters are of no use to me. Only one topic will take me forward, that is 'I'. All these topics can be helpful, but they cannot take me further.

 




Bible - Quran-Puran are just religious scriptures, but genuine spiritual writings; This is nature. This tree, this flower, this bird, this cloud, this star, this human and this animal, all these are chapters of this spiritual article. This book has been written - only on five pages - 'five elements'. The name of the book is - 'Nature'. The name of writer is - 'God'. When I started reading this book, this book failed all my journey till date. Whether my journey was about religion or relationships. Everything fails

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जब व्यक्ति खुद की तलाश करता है 
तब ही असली और सही सीख की राह पर पड़ता है 

सब से अनमोल विषय: 'मैं क्या हूँ'



सब से अनमोल किताब  सिर्फ एक ही है, 
जो किसी के विचार या सोच के अनुसार नहीं 
और ना ही वक़्त के हालत के मुताबिक है,
 वो है  सिर्फ कुदरत 






व्यक्ति कभी भी किसी के जवाब को खुद की समझ बना ही नहीं सकता, जब तक वो जवाब उस के लिए सवाल न बने। क्योंकि  हम कभी भी किसी भी जवाब से कभी नहीं  सीख पाते, जब तक  वो जवाब हमारे लिए सवाल बन कर हमारे आगे न लाये।









मैंने एक बात इतहास से जो सब से अच्छी सीखी,  वो यह थी कि चाहे कोई  भी क्षेत्र हो; धार्मिक हो या समाजिक ; कोई धार्मिक गुरु हो या राजनेता; जब तक मैं खुद को, खुद की ज़िंदगी को, खुद के हालात को न समझू, तब तक यह सब विषय मेरे किसी भी काम के नहीं।  मेरे को सिर्फ एक ही विषय आगे  ले जाएगा , वो है- 'मैं' .  यह  सब विषय मददगार हो सकतें हैं पर मेरे को आपने आप आगे नहीं ले जा सकते। 
 







बाइबिल - क़ुरान -पुराण  सिर्फ धार्मिक  स्क्रिप्टुरेस  हैं, पर असली आत्मिक लेख; यह कुदरत है।  यह पेड़ , यह फूल, यह पक्षी, यह बादल, यह सितारे, यह इंसान और यह जानवर, यह सब इस आत्मिक लेख के चैप्टर हैं। इस किताब को लिखा गया है- सिर्फ पांच पेज पर- 'पांच तत्त '. किताब का नाम है - 'कुदरत'. लिखारी का नाम है,- 'रब्ब'.  जब मैंने यह किताब को पड़ना शुरू किया तो इस किताब ने मेरी आज तक की सब यात्रा को फेल कर दिया। चाहे मेरी यात्रा धर्म की थी या रिश्तों की थी। सब कुछ फेल। 




रेतली राह का मुसाफ़िर

रेतली राह का मुसाफ़िर
माननीय प्यार , आज मैं खुद को आप के आगे सन्मानित करना चाहती हूँ कि मैं आप की रचना हूँ ; और खुदा के आगे मैं खुद को धन्यवाद का उपहार देना चाहती हूँ कि 'धन्यवाद शहीर ' कि आप ने खुदा से प्यार किया। हर किर्या के लिए धन्यवाद
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