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Do you know that we are a big miracle secret?

Do you know that we are a big miracle secret?
Following the trail of colorful emotions and beautiful divine relationships. Now life Blossoms, beginning to love because it is a vibrant land of love and a beautiful feelings to wander across the heart during the journey of awakening. But here are some of the most stunning moments to witness life in full bloom with divine relationship and divine action like spring...And now thoughts are in bloom

The age of my moment became an Era

I am very busy, because I have nothing to do!
This is not a stupid statement.
 After reading this one line of mine, if you have wrinkles on my forehead,
 then this statement has affected you.
Whenever we have wrinkles on our foreheads,
 that means we have got thinking. If you think, then think you sowed the seeds.
 Today, if not today, this seed will grow.
Today I am standing in that part of life, 
from here attention to life does not go on, nor death.
 Looking at death and life, it seems that it is nothing.
 There is no point in paying attention to these.
 Now, I question myself today,
 'What was that all, Madam,
 when she wanted to live this life happily and wanted to understand death.
 For which, Madam, you have spent 38 years,
 one thought, one seeker and so on?'
It is a lot of fun when we comment our own position on our own state
 and by looking at our own situation, our own state becomes sensible.
Really I am very busy today. 
This is the first time in my life that I forget to take a bath tomorrow.
 I remember my own hair weeks later.
Just like living and dying is nothing,
 doing everything in the same way is nothing.
Am I lazy
No
My image is very agile. 
I said that I am very busy, because there is nothing for me to do.
 Busy?
 My world level is all perfect. All food and drink is complete.
 Sleeping is complete, waking up is also complete. Life is also complete, 
there are only a few steps to die, that work is for life, not mine.
 So I am free.
Because I understood one thing,
 what is true is not visible, what is visible is not true.
 Both life and death are the same.
 It is important to know, understand and recognize both,
 if happiness is needed.
 Because happiness is never to be found without freedom.
Do not be afraid of death and do not be tempted by life,
 then the attitude of living shows the face of life.
I am busy, in what?
 On blogger on facebook
No, it is a test of some unnecessary time.
What do I do?
This question was understood when I put it in front of my position.
 By questioning the situation, one gets an understanding of his condition and by understanding his condition, one gets to know the condition of the situation.
 Both are the same, we make the subject and the object to whom,
 it depends on our thinking of living.
The question is not yet made to think
 that the answer is already ahead of bowing the head.
What is the condition of the child?
And
Now think what is his position?
The state and condition are always of the mind
As the mind develops, these questions begin to arise.
Position, condition, status, personality, mine-yours, distinction, etc.
The child neither has any position nor condition.
I remember how in my childhood I used to look at home,
 it looked beautiful and nice.
 To see everything and to look
 as if I do not know where I am, why I am, what all this is -
 the image is of emptiness -
 out of which this world looks very beautiful and unique.
 Every time there was a unique stranger.
 Everything looked like it is just so deep and sweet.
 I used to be crazy about everything.
It is the same today.
 I am still in my childhood Today,
 my childhood is full of senses, which gives me a drink. 
Everything in the world is beautiful and amazing,
 the same way the heart feels that all this is mine.
 Craziness remains the same for everything.
Today I am standing at the same place, only 6-7 years old.
 Everyone's addict - Loved by all.
Happy to see everything.
 At that time, I did not know that this is the world and this is life. 
Today I know that this is a world and this is life.
With both fun and beauty.
 Friendship to both freedom and unworried. 
There is no feeling of life even in life.
 This is life, or that was life, when life used to seek life itself.
I am today, but do not know that I am.
 Even today I am 6-7 years old.
 What has passed
Thought and discovery passed
Worry and pain are gone
There was a caravan of time, which passed.
Left only for a moment
Don't know how much length and depth of moment
The incident of eternal life is hidden in this moment, 
which I am busy watching,
 because there is nothing to do.



***—***


मैं बहुत बिजी हूँ, क्योंकि मेरे करने के लिए कुछ भी नहीं है !
यह कोई बेवकूफी भरी स्टेटमेंट नहीं है। 
 मेरी इस एक लाइन को पढ़  कर के अगर आप के माथे पर सिलवटें पड़ गई 
तो आप पर मेरी इस स्टेटमेंट ने अपना असर कर दिया है।
जब भी हमारे माथे पर सिलवटें पड़ेगी तो मतलब कि हमारे में सोच आ गई।
 सोच आ गई, तो समझो बीज बो दिया।
 आज नहीं तो कल को यह बीज पुंगरेगा ही।
आज ज़िंदगी के उस हिस्से में खड़ी हूँ ,यहाँ से ज़िंदगी की ओर ध्यान जाता ही नहीं, न ही मौत की और। 
 मौत और ज़िंदगी को देख कर ऐसे लगता है कि यह कुछ भी नहीं। 
 इन की ओर ध्यान देने का कोई मतलब नहीं। 
 मेरी ही आज की इस अवस्था को मैं आप ही सवाल करती हूँ कि
 'वो सब क्या था मैडम ,जब इस ज़िंदगी को ख़ुशी से जीना चाहती थी और मौत को समझना चाहती थी। जिस के लिए मैडम जी आप ने 38 साल ,एक सोच ,एक खोजी बन क्र बातीत किये '?
बहुत मज़ा आता है ,जब अपनी ही अवस्था पर अपनी ही स्थिति टिपणी करती है 
और अपनी ही स्थिति को देख कर अपनी ही अवस्था समझदार हो जाती है।
सच में ही आज मैं बहुत बिजी हूँ। 
 मेरी ज़िंदगी का यह पहला मौक़ा है कि मैं आज कल नहाना भूल जाती हूँ। 
 मेरे को मेरे ही बालों की याद हफ्ते बाद आती है।
जैसे जीना और मरना कुछ भी नहीं , वैसे ही सब कुछ करना कुछ भी नहीं।
क्या मैं आलसी हूँ?
नहीं
बहुत ही फुर्तीली इमेज है मेरी।
 मैंने कहा कि मैं बहुत बिजी हूँ ,क्योंकि मेरे करने केलिए कुछ भी नहीं है। बिजी ?
 मेरा संसारी लेवल सब मुकमल है। सब खाना पीना पूरा हो गया।
  सोना पूरा, जागना भी पूरा। 
 जीना भी पूरा , बस थोड़े से कदम रहतें हैं मरने के, वो काम ज़िंदगी का है, मेरा नहीं। 
सो मैं आज़ाद हूँ।
क्योंकि एक बात मेरी समझ में आ गई, जो सच है वो दिखाई नहीं देता, जो दिखाई देता है, वो सच नहीं।
 ज़िंदगी और मौत, दोनों एक ही हैं।  
दोनों को जानना, समझना और पहचाना, ज़रूरी है, अगर ख़ुशी चाहिए।
 क्योंकि आज़ादी के बिन ख़ुशी कभी मिलनी नहीं।
मौत से डर नहीं चाहिए और ज़िंदगी से मोह नहीं चाहिए,
 तब जीने की अदा ज़िंदगी का चेहरा दिखाती है।    
मैंने बिजी हूँ , किस में ?
 फेसबुक पर ब्लॉगर पर 
नहीं, यह थोड़े से फालतू वक़्त का जाईजा है। 
मैं करती क्या हूँ ?
यह सवाल जब मैंने अपनी स्थिति के आगे रखा तो समझ आई। 
 स्थिति को सवाल करने से अपनी अवस्था की समझ आ जाती है 
और अपनी अवस्था को समझ कर स्थिति का हाल-चाल पता लग जाता है। 
 दोनों है एक ही, हम  सब्जेक्ट  बनातें हैं और किस को ऑब्जेक्ट,
 यह हमारी जीने की सोच पर डिपेन्ड होता है। 
सवाल अभी सोच बनता ही नहीं कि जवाब पहले ही सर को झुकाये आगे होता है। 
बच्चे की अवस्था क्या होती है ?
अब सोचो कि उस की स्थति क्या होती है ?
अवस्था और स्थिति सदा मन की होती है 
जैसे जैसे मन विकसित होता जाता है, वैसे ही यह सवाल पैदा होने शुरू हो जातें हैं। 
पोजीशन, कंडीशन, रुतबा, पर्सनालिटी, मेरा-तेरा, भेद-भाव  आदि।  
बच्चे की न ही कोई  स्थिति होती है और न ही अवस्था।
मेरे को याद है कि कैसे बचपन में घरबार को देख, सुन्दर और अच्छा लगता था। 
 हर चीज़ को देखना और ऐसे देखना की जैसे पता नहीं मैं कहाँ हूँ, क्यों हूँ , यह सब क्या है - इमेज खालीपन की ही होती है- जिस में से यह संसार बहुत ही सूंदर और unique दिखाई देता है।
  हर वक़्त एक अनूठा सा अजनबीपन होता था।  
 हर चीज़ ऐसे लगती थी जैसे बस बहुत ही गहरी और प्यारी है। 
 चीज़ के लिए मेरे में दीवानापन होता था।  
आज भी वोही है। आज भी बचपन में हूँ।  
आज का मेरा बचपन ऐसा होश भरा है,  जो मेरे को मदहोशी देता है। 
 संसार सब वैसे ही सूंदर और अच्छा , वैसे ही दिल करता है कि बस यह सब मेरा है।  
हर चीज़ के लिए दीवानापन वैसे ही बरकरार है। 
आज वोही जगह पर खड़ी हूँ,  ६-७ साल की ही हूँ। 
 सब की दीवानी - सब को चाहने वाली।  
हर चीज़ को देख कर खुश  होने वाली ।
 उस वक़्त मेरे को इल्म नहीं था कि यह संसार है और यह है ज़िंदगी। 
आज जानती हूँ कि यह संसारी है और यह ज़िंदगी है। 
मज़ा और ख़ूबसूरती दोनों  का साथ। 
आज़ादी और बेफिक्री दोनों से दोस्ती।
 ज़िंदगी में हो के भी ज़िंदगी का अहसास नहीं।
 यह ज़िंदगी है या वो ज़िंदगी थी,
 जब ज़िंदगी को जीने केलिए ज़िंदगी को ही तलाशती थी। 
आज हूँ, पर पता ही नहीं कि मैं हूँ। 
 आज भी मैं ६-७ साल की हूँ 
 बीत क्या गया ?
सोच और ख़ोज बीत गई 
फ़िक्र और दर्द चले गए
वक़्त का एक कारवां था, जो गुज़र गया। 
छोड़ गया  सिर्फ एक पल को 
पल की लम्बाई और गहराई कितनी है- यह पता नहीं 
इस पल में अनंत जीवन की वारदात छुपी है,
 जिस को देखने में बिजी हूँ,
 क्योंकि करने को कुछ है ही नहीं।  

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