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Do you know that we are a big miracle secret?

Do you know that we are a big miracle secret?
Following the trail of colorful emotions and beautiful divine relationships. Now life Blossoms, beginning to love because it is a vibrant land of love and a beautiful feelings to wander across the heart during the journey of awakening. But here are some of the most stunning moments to witness life in full bloom with divine relationship and divine action like spring...And now thoughts are in bloom

How does it happen when spirit is separated from body?

How does it happen when spirit is separated from body?

For me, life was a thought, a thought in which there was a discovery that death is what I have to live and that I have to live death too. Death has always been important for me.
 Death never let me be fascinated by the world. Death kept him in love with sages and sages. Death remained a very important subject for me.
To live death is to live in life and to live in the world even after seeing death. I only need to experience how I remain in censor after the experience of death and how I think and see life?
 life continued to flow only in death.
I have had many experiences of being out of body, of being out of body, of living without body.
Today, again, my desire to live death on my head encamped, then I went to bed in a room.
The feeling of love with death brought water to my eyes. Death was treated with a feeling of love. Was lying in the thought of death, then today a deep silence was seen coming out of the eyes.
Not through the ears, but through the eyes. It is important to remember this. 
(Talk about it again )
Due to the silence coming from the eyes, the eyes started closing, then someone started waking up within me. The feeling of quiet coming from the eyes was so unique and surprising that it also sealed my ears. As soon as the ears were sealed, all the noise coming from the deepest depths of silence disappeared. The only part I have is eyes. Now I have to see my body through my consciousness, because the work of his eyes is now only to see that there is no sound of any kind in me. Today, the eyes have to see that there should not be any thought in me - there should not be any feeling of emotion.
I have only eyes with deep consciousness.
The experience I had 18 years ago with closed eyes and in depth of meditation was the same experience that I had to do today with open eyes.
I went into the depths of silence through my eyes.
First of all my attention went to the heartbeat and stayed in the heartbeat itself. That is where my journey of a precious experience started today. Experiencing the deep movements of the nerve systems reached the consciousness (meditation) energy cycle.
Say energy level  or life-energy.
How the flow of energy moves in our body is observable. Going to see yourself before dying will be the biggest thing to do. What a Dr. sees as a profession - whether one (doctor) has all the information, but when one sees the body as a God-gift, then the alchemy of seeing changes.
My conscious is in the energy-level, which itself is an energy. One Life Energy and Life itself. The reconciliation of both and now the separation of both.
Life, which I have called consciousness, which we can also call soul - it has to leave the circle of small energy. How does one leave a small thing and take a big form?
   Amazing Chemistry!
Whatever is our understanding, which is our thinking, which is our idea, which is our feeling, which is the depth of all these experiences, that is the huge outline of our soul. We look at life and the world according to our understanding and thoughts.
How vast is our form at the spiritual level!
I saw the circle of my body energy revolve around my heart and consciousness out of the room.
I walked out of the room, across the wall. What is my body energy, that light purple color, how the heart's fodder is spinning. My nerve system is twinkling like the lights in the north-pole. And the energy that is moving near the heart, it is as if the light of the earth rotates from north to south.
When we look at the body with the soul, it seems as if a universe has taken a small size. And particles of body look like stars.
I started learning the Internet after looking at my deep experience and learning the Maya program is so that I can make myself what I see.

 From the spiritual circle, every living being is a universe in itself. Today, the Internet is my modren-guru, through which I have made my experiences to live in a computer without making the world meet the spiritual dimension. This is not to make my experiences like a movie, to create an Alive Dimension, that everyone should have a small experience of how precious we all are. Just keep praying.
amazing life!
wow!
The greatest wonder of life
The deepest secret of life
 The greatest miracle of life
Death and life have to live together
This is such a good experience and beautiful feeling of our existence, that I cannot tell.
Today a lot of people have written books to see before they die, do this, do this, do that.
God bless, let every person die and live death even before one dies! Identification of both such life and death makes a person's life complete.

***—***


जब रूह जिस्म से अलग होती है तो कैसे होती है ?
 उस वक़्त व्यक्ति को कैसे अनुभव होता है ?
रूह को पहली बार देख कर कैसा अनुभव होता है ?
क्या जिस्म और रूह, हम दोनों को अलग अलग  देख सकतें हैं?
जिस्म से अलग होने बाद क्या रूह फिर जिस्म में आ सकती है ?
मेरे लिए ज़िंदगी  एक सोच रही, वो सोच जिस में एक खोज थी कि मौत क्या है  और मैंने जीते जी मौत को भी जीना है।  मौत मेरे लिए सदा महत्वपूर्ण रही।
 मौत ने ही कभी मेरे को संसार का मोह नहीं होने दिया।  मौत ने ही  ऋषि-मुनिओं के साथ प्रेम-बहा में रखा।  मौत मेरे लिए बहुत ज़रूरी विषय ही बना रहा।
मौत को जीना है- मौत  को देखने के बाद भी जीवन में रहना है और संसार में रहना है।  मेरे को यह अनुभव चाहिए ही कि मौत के अनुभव के बाद मैं कैसे संसार में रहती हूँ और कैसे कैसे जीवन को सोचती और देखती हूँ?
 जीना सिर्फ मौत के बहा  में ही बहता रहा।
मेरे बहुत अनुभव हुए कि जिस्म के पार होने के, जिस्म से बाहर होने के , जिस्म के बिना जिस्म में रहने के।
आज फिर मेरे सर पर मौत को जीने की चाहना ने डेरा डाला तो मैं जा के एक कमरे में bed  पर लेट गई।
मौत के साथ प्यार का एहसास मेरी आँखों में पानी ले आया।  मौत को प्यार की भावना से निहारा।  मौत की सोच में लेटी हुई  थी तो आज आँखों  के झरोखों में से गहरी चुप आती दिखाई दी।
कानों में से नहीं, आँखों में से। यह याद रखना ज़रूरी है। इस के बारे में बात फिर करेंगे 
 आँखों में से आती चुप के कारण आँखों का बंद होना शुरू हो गया तो मेरे ही भीतर कोई जागना भी शुरू हो गया।  आँखों में से आती चुप का एहसास इतना अनूठा और हैरानगी भरा था कि उस ने मेरे कानों  को भी सील कर दिया।  कानों के सील होते ही चुप की गहरी गहराई में से भी आने वाली सब आहट मिट गई। मेरे पास जैसे एक ही अंग है, वो है आंखें।  अब मैंने  अपनी चेतना के ज़रिये अपने जिस्म को देखना है क्योंहके आँखों का काम अब सिर्फ यह देखना है कि  मेरे में किसी भी तरहं की कोई भी आहट तो नहीं। आज आँखों ने देखना है कि मेरे में किसी सोच की भी आहट न हो- भावना की भी आहट न हो।
मेरा गहरी चेतना का साथ सिर्फ आखें हैं।
जो अनुभव मैंने १७ साल पहले बंद आँखों से किया था और मैडिटेशन की गहराई में किया था, वोही अनुभव आज मैंने  फिर खुली आँखों में से करना था।
मैं आँखों के ज़रिये चुप की गहराई में चली गई।
सब से पहले मेरा ध्यान दिल की धड़कन पर गया और मं धड़कन में ही रुक गई। वहीँ से आज मेरे एक अनमोल अनुभव की यात्रा का आगाज़ हुआ। nerve systems की गहरी हिलजुल को अनुभव करती हुई चेतना  ( ध्यान  ) ऊर्जा-चक्र में पुहंची।
ऊर्जा चक्र कहो या लाइफ-एनर्जी कहो। 
ऊर्जा का प्रवाह कैसे हमारे जिस्म में चलता है, यह देखने योग्य है। मरने से पहले खुद को देखना सब से बड़ा काम करके जायेंगे। जिस चीज़ को एक डॉ. पेशे के रूप में देखता है- उस को चाहे वो सब जानकारी हो, पर जब कोई बॉडी को गॉड-गिफ्ट के तौर पर देखता है तो देखने का कीमिया बदल जाता है। 
मेरी चेतना  ऊर्जा चक्र में है, जो खुद आप एक ऊर्जा है।  एक लाइफ ऊर्जा और खुद लाइफ। दोनों का मिलाप और अब दोनों का विछोड़ा। 
ज़िंदगी, जिस को मैंने चेतना कहा है, जिस को हम आत्मा भी कह सकतें हैं - इस ने छोटे से  ऊर्जा के घेरे को छोड़ना है। कैसे कोई छोटी सी चीज़ को छोड़ कर बड़ा रूप ले लेता है?
 अद्भुत केमिस्ट्री !
जो हमारी समझ, जो हमारी सोच, जो हमारे आईडिया, जो हमारी भावना, जो हमारे इन सब के अनुभवों की गहराई होती है, वो ही हमारी आत्मा की  विराट रूप-रेखा होती है। हम अपनी समझ और विचार के हिसाब से ही ज़िंदगी को और संसार को देखतें हैं। 
आत्मिक-लेवल पर हमारा रूप कितना विराट है !
 मैंने  देखा कि मेरी जिस्मी-ऊर्जा का चक्र मेरे दिल के पास घेरे में घूमता है और चेतना कमरे से बाहर।  
मैं कमरे से बाहर निकल गई, दीवार के आरपार हो सकती हूँ। जो मेरी जिस्मी-ऊर्जा है , वो लाइट पर्पल रंग की ,कैसे दिल के  चारे-पासे घूम रही है।  मेरा नर्व सिस्टम ऐसे जगमगाहट कर रहा है, जैसे north -pole  की lights। और दिल के पास जो ऊर्जा घूम रही है ,वो ऐसे है जैसे कि धरती के चारे पास north  से south  लाइट घूमती है। 
जब हम आत्मा से जिस्म को देखतें हैं तो ऐसे लगता है कि जैसे कोई ब्रह्माण्ड ने छोटा सा आकार ग्रहण किया हो। और जिस्म का कण कण तारों की तरह नज़र आतें हैं। 
मैंने अपने गहरे अनुभव को देख कर ही इंटरनेट को सीखना शुरू किया और माया प्रोग्राम को सीखना ही इस लिए है कि जो मेरे को दिखाई दे रहा है, मैं उस को आप ही बना सकूं। 
 आत्मिक-मंडल से हर जीव आपने आप में एक ब्रह्मण्ड ही है। आज इंटरनेट मेरा modren- गुरु है, जिस के ज़रिये मैंने अपने अनुभवों को कंप्यूटर के राहीं ज़िंदा बना के संसार की मुलाकात अधियत्मिक डायमेंशन से करवानी है।  यह मेरे अनुभवों का एक मूवी की तरह नहीं, एक अलाइव डायमेंशन बनाना है , तां  जो  सब को एक छोटा सा अनुभव हो जाए कि हम सब कितने अनमोल हैं।  बस दुआ देते रहना।  
amazing life !
wow !
ज़िंदगी का सब से बड़ा अजूबा 
ज़िंदगी का सब से गहरा रहस्या 
 ज़िंदगी का सब से बड़ा चमत्कार 
मौत और ज़िंदगी को साथ साथ जीना है 
इतना अच्छा अनुभव और सुंदर अहसास है यह हमारे वजूद का, कि मैं बता ही नहीं सकती।  
आज तीक  बहुत लोगों ने किताबें लिखी है कि मरने से पहले यह देखो , यह करो , ऐसा करो , वैसा करो। 
खुदा करे, हर व्यक्ति मरने से पहले मर कर मौत को भी जीये! ऐसे ज़िंदगी और मौत दोनों की पहचान, व्यक्ति के जीवन को सम्पूर्ण कर देती है। 
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