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My Profession is to always find God in Nature

My Profession is to always find God in Nature
What I knew was that the silence blossomed the heart. When the heart blossomed, there was a feeling of love. The romance started with me. When my romantic-mind took all my stress from me all the time, I could not know. I who I am, I am unknown, today I remembered Buddha in unknown happiness

My color is love (painting day )

When Monika made Buddha with colors in an hour,
 I wondered how everyone plays with colors,
 so what color is mine and what color can I play with?
 My color is love
 I can play with love
If there is white then it presents the soul
If it is red then it becomes a lover
If green it makes us happy
If there is orange then it becomes a vairaag ( renunciation)
If yellow is friendship
It is blue then it becomes vast
If  purple, you become a wisdom
If pink then becomes divine
I feel that now my love has to be like this, the painting of this color?
Whatever color it is, I have to paint life, not paper with these.
Work is not raw, now we do it for sure.
Whatever be the day of life, any moment, any step; just becomes a circumambulation for me and if the revolution is completed, it becomes my pilgrimage.
Hajj comes after a year for a Muslim, every moment of mine became Hajj for me, because my mind has fallen in love with Hazrat Muhammad, giving my life a deeper color of Hajj.
For Hindus: Everyday there are many goddesses on their day, how will I keep celebrating on whose day? When my heart started beating at the beat of Krishna's flute, I felt the color of Raasleela.
 And how should I go and to which gurughar (Sikh temple), when the color of the simplicity of Baba Nanak has increased in every particle of my body today?
When I have not forgotten Jesus, how can I apply the color of the cross, when the cross color is imprinted on my every emotion.
 Every moment is mine every day - in which universe is a painting. One who dyes itself with new and fresh colors everyday and every moment then wants to make the world healthy by becoming the fragrance of blessings.
Not raw colors, I have to paint my life with that color, on which even the color of death is erased. Death should also become such a color, which merges into the eternal form of life.
All of our emotions are hidden in these colors. Or say that we like color according to our feeling - I have to decorate my feeling with soul-color, and I have to make my life a painting that makes the world beautiful.


***—***


 मोनिका ने बुद्धा को रंगों के साथ जब एक घंटे में ही बना दिया, 
तो मेरे में सोच आई कि हर कोई कैसे रंगों के साथ खेलता है, 
तो मेरा रंग कौन सा है और मैं किस रंग के साथ खेल सकती हूँ?
 मेरा रंग प्यार है।
 मैं प्यार के रंग से खेल सकती हूँ 
अगर सफ़ेदगी है तो आत्मा को पेश करता है 
अगर लाल है तो लवर बन जाता है 
अगर हरा है तो ख़ुशी बन जाता है 
अगर सन्तरी है तो वैराग बन जाता है 
अगर पीला है तो दोस्ती बन जाता है 
नीला है तो विराट बन जाता है 
जामनी है तो विजडम बन जाता है 
गुलाबी है तो divine  बन जाता है 
मैं अनुभव करती हूँ कि अब मेरे प्यार ने ऐसे, इस रंग की मूरत बनना है ?
यह जो रंग है न, मैंने इन से पेपर नहीं, ज़िंदगी को रंगना है। 
काम कच्चा नहीं, अब पक्का ही करते हैं। 
ज़िंदगी का कोई भी दिन हो , कोई भी पल हो , कोई भी कदम हो ;बस मेरे लिए परिकर्मा बन जाता है और परिकर्मा पूरी हुई तो मेरा तीर्थ बन जाता है। 
मुस्लिम के लिए हज साल बाद आता है, मेरे लिए मेरा हर पल ही हज बन गया, क्योंकि मेरे मन ने हज़रत मुहम्मद से प्यार कर लिया है, जिस से मेरी ज़िंदगी को हज का गहरा रंग लग गया। 
हिन्दू के लिए:  हर रोज़ ही बहुत देवी देवतों के दिन आतें हैं , मैं हर रोज़ कैसे किस किस के दिन मनाती रहूंगी ?  जब मेरे दिल ने ही कृष्णा की बंसरी की ताल पर धड़कना शुरू कर दिया, तो मेरे पर रासलीला का रंग लग गया।  
 और मैं कैसे जाऊँ और किस किस गुरु घर में जाऊँ, जब आज मेरे जिस्म के कण कण में बाबा नानक की सादगी का रंग चढ़ गया है। 
जब मैं जीसस को भूल ही नहीं पाई तो कैसे क्रॉस का रंग लगा सकती हूँ कि जब कि मेरी हर भावना पर ही क्रॉस रंग चढ़ा हुआ है। 
 हर पल मेरा हर दिन ही है -जिस में ब्रह्मण्ड ही एक मूरत है।  जो हर रोज़ खुद को नए और ताज़े रंग से रंगता है, फिर दुआ की खशबू बन कर संसार को तंदरुस्त बनाना चाहता है।  
कच्चे रंग नहीं , मैंने अपने जीवन को उस रंग से रंगना है, जिस पर मौत का रंग भी मिट जाए।  मौत भी ऐसा रंग बन जाए, जो जीवन के शाश्वत-रूप में मिल जाए। 
इन सब रंगों में हमारी सब की भावना  ही छुपी होती है। या ऐसे कहो कि हमारी भावना के अनुसार ही हम को रंग पसनद आतें हैं  - मैंने अपनी भावना को रबी-रंग से सजाना है, और मैंने अपनी ज़िंदगी को ऐसी पेंटिंग बनाना है, जिस से संसार सूंदर हो जाए। 
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