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Do you know that we are a big miracle secret?

Do you know that we are a big miracle secret?
Following the trail of colorful emotions and beautiful divine relationships. Now life Blossoms, beginning to love because it is a vibrant land of love and a beautiful feelings to wander across the heart during the journey of awakening. But here are some of the most stunning moments to witness life in full bloom with divine relationship and divine action like spring...And now thoughts are in bloom

The unique story of death

When we told you the bad time, 'I felt as if I was going to die' or to say that 'my bad time was like death'.
It means that I have experienced death. The experience of death is hidden somewhere within me.
Experience of death
Died many times - live again
Still afraid of death, why?
When we have experienced death, why have we not gone beyond death?
The law of the universe is that whatever we feel, we go beyond it. Sometimes he even says that 'my life is worse than death'
Why and how, someone knows about the experience of death. This means that we all experience death.
Today, all our experiences, whether it is of death or the time of birth, remain deposited in our consciousness.
Every door of consciousness opens according to the demand of the time.
Who is Enlightenment called?
When we experience the experience of death and the experience of birth together, and in that experience, on one hand, events happen very deeply. When we are roaming that part of your conscious form, here we experience our moment of death with the moment of birth, then the real truth in the acquittal of that, of our universe, the beginning and the end of it all is visible to us through This window. Which the sages and saints called Enlightenment.
We can never say what we do not experience. If we say something inadvertently, then it is our experience, this is why we say that it is in our consciousness, but we have not yet become its soul. All the actions that we have done today, good or bad, are all bad for us. They are seeds. Now the time will come when this seed will give us fruits. The fruit will be the same as the seed. How we see that fruit, how we experience it, how we believe it and how we know it will be our response. This is the response, it has become our Karma again and has become a seed in our consciousness.
This is how death has been experienced in our consciousness. When we go to death in the dark, then this death will come out of our consciousness and become our experience. Meaning that today I have inadvertently said that 'this time is worse than death' My experience of sleeping has become the experience of waking up today.
This means that I had the experience of death, but my experience was asleep in me. When I lived that death consciously, meaning that even when I was conscious at the time of death, the experience of death became part of my life now. Now, when my death will come again, at the time of that death or while living I live my life with the feeling of that death, then how do I see death dancing above the stage of life, then my present life is surpassed by death Life is to be lived.
Today I see what is death, what is life?
What does my death experience in my life and what does it make me see?
Here the question comes to mind that life also shows us all and gets everyone done.
When life gets everyone done, then we can become doers or not doers, but when we experience death, we become just observers.
When we do something, our karma is our future
When we are the watchers, we stand in the future
When we are not familiar with the experience of death, then our love of life, our trust, our love cannot be true. And we are nothing but a puppet. It is not a puppet of God but a puppet of one's own mind.
A veteran of death is living at the level of life itself. It can also be said that a person experienced in death is very close to life. Life belongs to anyone.
Whatever we understand our intelligence or our intelligence, it is the result of our life experiences. Our experience is our understanding and our wisdom - just like when the experience of death becomes our understanding, our shelter is beyond death. We come to the world only for that experience. The experience that sees life through the window of death.


***—***


जब हम आपने बुरे वक़्त को ऐसे कह दिया कि ' मेरे को ऐसे लगता था कि जैसे मैं मौत में जा रही हूँ' या यह कहूँ कि ' मेरा बूरा वक़्त मौत जैसा था '
मतलब यह हुआ कि मैंने मौत का अनुभव किया हुआ है। मौत का अनुभव मेरे ही भीतर कहीं न कहीं छुप्पा हुआ है।
मौत का अनुभव
बहुत बार मरे - फिर जीए
फिर भी मौत से घबराहट है, क्यों ?
जब हम को मौत का अनुभव हो चुक्का है तो हम मौत के पार क्यों नहीं गए ?
ब्रह्माण्ड का कानून है कि जो भी चीज़ को हम अनुभव कर लेते हैं, तो हम उस के पार हो जातें हैं। कभी कभी ऐसे भी कहता है कि 'मेरी ज़िंदगी तो मौत से भी बुरी है '
क्यों और कैसे , कोई जानता है कि मौत के अनुभव के बारे में कह देता है।
मतलब यह हुआ कि हम सब को मौत का अनुभव है।
आज तीक किये गए हमारे सब अनुभव चाहे वो मौत का है या जन्म के वक़्त का है,
वो हमारी चेतना में डिपोसिट हुआ पड़ा रहता है।
चेतना का हर दरवाज़ा वक़्त की मांग अनुसार ही खुलता है।
एनलाइटनमेंट किस को कहतें हैं ?
जब हम आपने मौत का अनुभव और जन्म का अनुभव एक साथ अनुभव करतें हैं और उस अनुभव में एक ओर घटना बहुत गहरे से घटती है। जब हम आपने चेतन-रूप के उस हिस्से को रूह-ब -रूह हो रहें होते हैं , यहाँ पर हम अपने मौत के पल को जन्म के पल के साथ अनुभव करतें हैं तो उस की बरीकी में जो असली सचाई है, हमारी ब्रह्माण्ड के आदि और अंत की वो सब हम को इस झरोखे में से दिखाई देती है। जिस को ऋषि-मुनिओं ने एनलाइटनमेंट कहा है।
जिस चीज़ का हमारा अनुभव ही नहीं , हम उस को कभी कह ही नहीं सकते। अगर हम अनजाने में भी कुछ कहतें हैं तो वो हमारा अनुभव है, इस लिए ही कहतें हैं -वो हमारी चेतना में पड़ा है पर हम अभी उस के रूह-ब -रूह नहीं हुए। आज तीक हम ने जितने भी कर्म किये हैं, अच्छे हो या बुरे , वो सब हमारे भीतीर है। वो बीज हैं। अब ऐसा वक़्त आएगा कि ,जब यह बीज हम को फल देंगे। फल वैसा ही होगा जैसा बीज था। हम उस फल को कैसे देखतें हैं , कैसे अनुभव करतें हैं , कैसे मानते हैं और कैसे जानते हैं , इन सब पर फिर हमारी प्रतिकिर्या होगी। यह जो प्रतिकिर्या है ,यह हमारा फिर कर्मा बन गई और बीज बन कर हमारी चेतना में पड़ी है।
ऐसे ही मौत का अनुभव हमारी चेतना में पड़ा है। जब हम होशमंदी में मौत में जाएंगे तो यही मौत हमारी चेतना से निकल कर हमारा अनुभव बन जायेगी . मतलब कि जो आज मैंने अनजाने में कह दिया कि ' यह वक़्त तो मौत से भी बूरा है ' मेरा वोह सोई हुई का अनुभव आज जागती हुई का अनुभव बन गए।
मतलब यह कि मेरे पास मौत का अनुभव था, पर मेरा अनुभव मेरे में ही सोया हुआ था। जब मैंने उस मौत को होश से जीया ,मतलब कि मौत के वक़्त भी जब मैं होशमंद रही तो मौत का अनुभव मेरे अब के जीने का हिस्सा बन गया। अब ,जब मेरी फिर मौत आएगी, उस मौत के वक़्त या जीते जी होशमंद रह कर उस मौत के अनुभूति के साथ ही जीवन जीती हूँ तो मौत को मैं कैसे ज़िंदगी की रंगमंच ऊपर नाचते देखती हूँ तो यह मेरा अब का जीना मौत से पार हुई ज़िंदगी का ही जीना है।
आज मैं देख रही हूँ कि मौत क्या है ज़िंदगी क्या है ?
आज के मेरे जीने में मेरा मौत का अनुभव मेरे से क्या क्या करवाता है और क्या क्या मेरे को दिखता है ?
यहाँ पर यह सवाल दिमाग में आता है कि ज़िंदगी भी तो हम को सब दिखाती है और सब करवाती है।
ज़िंदगी जब सब करवाती है तो हम करने वाले और या न करने वाले बन सकतें हैं पर जब हमारे पास मौत का अनुभव होता है ,हम सिर्फ देखने वाले बन जातें हैं।
जब हम कुछ करतें हैं तो हमारे कर्मा हमारा भविष्य होता है
जब हम देखने वाले होतें हैं तो हम भविष्य में ही खड़े होतें हैं
जब तीक हम मौत के अनुभव से परिचत नहीं होते, तब तीक ज़िंदगी के प्रीत, हमारा भरोसा, हमारा प्यार सच्चा नहीं हो सकता। और हम सिर्फ कठपुतली के इलावा कुछ नहीं। परमातम की कठपुतली नहीं, खुद के मन की ही कठपुतली होतें हैं।
मौत का अनुभवी इंसान ज़िंदगी के ओर ही लेवल पर जी रहा होता है। यह भी कह सकतें हैं कि मौत का अनुभवी इंसान ज़िंदगी के बहुत करीब होता है। ज़िंदगी किसी की भी हो।
जो भी हम अपनी अक्ल समझतें हैं या अपनी समझदारी ,यह सब हमारी ज़िंदगी के अनुभवों का फल है। हमारे अनुभव ही हमारी समझ और हमारी अक्ल बनतें हैं -वैसे ही मौत का अनुभव जब हमारी समझ बन जाता है तो हमारा बसेरा मौत के पार का होता है। हम संसार में सिर्फ आपने उस अनुभव केलिए आएं होतें हैं। वो अनुभव जो मौत के झरोखे में से ज़िंदगी को देखता है।
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