Do you know that we are a big miracle secret?

Do you know that we are a big miracle secret?
Following the trail of colorful emotions and beautiful divine relationships. Now life Blossoms, beginning to love because it is a vibrant land of love and a beautiful feelings to wander across the heart during the journey of awakening. But here are some of the most stunning moments to witness life in full bloom with divine relationship and divine action like spring...And now thoughts are in bloom

Loneliness is the first step of renunciation

Let's talk about #loneliness today:
When the matter has come to loneliness, why not go to death alone, why not go alone in life, then?
If we are alone at the body level then it does not matter. Have you heard the saying, 'Nothing of the falling berry is spoiled'. If our loneliness has become a disease of the mind, then we say this saying, 'Now what do you regret, when the bird has devoured the field'. If the disease of our mind takes hold of our intelligence, then it is something serious.
What does this loneliness mean?
We have nothing to do.
We do not have anything to be.
What do we do now?
There is no way out.
We are standing on a black point. There is darkness everywhere.
 When our loneliness reaches our intellect, it means that we are empty of surroundings, we are empty of confidence, we are also empty of love. This emptiness is the last stage to go towards suicide. So what should we do?
 Because we have nothing.
 Forget about human beings, even if we are not with us, what to do?
 Determine to take just one more last step.
Before going to death
Death is an unknown area. Unknown area will move towards known area, means that our world. We will walk in an unknown world. Death also has to be separated from family, family, will separate us from our environment, so why do we not separate ourselves from all this? We just separate ourselves from all our identities. We have to die, and we see it by dying like this. Before giving death to oneself, one kill one's own identity. If you have lost yourself  then you have lost yourself through life, not through death. We has to leave everything one day, so why not today. so let's leave ourselves, today. today is important this step for such a person.
While living in the world, leaving the world, when one take a step, one is a 'Sanyasi', now not only life but death also died.
This new direction will create a new condition.
If life is ready for death, then we take death and go towards life. The life that has been agreed to death, we make ourselves death in a new way only by making that death a life partner.
The unknown path, the unknown world, walks in it. Now before death, we also see ourselves wiped out. lets go !
What is #emptiness?
When we have nothing. Empty at mental level. Thinking and emotions, virtues and demerits, the farthest away, like standing in a place like desert.
What is the feeling of emptiness?
Fear, nervousness, disinterestedness,
Is emptiness called loneliness?
Both have the same position. There is a lot of difference in who we begin with.
how ?
If we start to be emptied of loneliness, then generally our thinking will be negative. If emptiness has started, then we will be empty but our behavior towards life will remain positive.
How do we make negative behavior positive?
For our common life too, the best and positive treatment is of natural nature to us, it should be supported. Watching the flow of the river - watching the birds - becoming the companion of flowers and trees. Morning Walking, Evening Walking. Taking a bath 2-3 times a day. Cold drink. Deepest of all, you wrote the matter of mind everyday that today my mood was like this, then what did I think and what did I do. Keep writing all with full honesty. As much as it is important to write, there is more work. Go before the sun rises for walking and go after the sun sets. Abstaining from the sun. Abstaining from heat. If the weather is cold then there is no difference. By doing this, we will not even need a doctor. Silent and nature are the best doctors.
We are completely empty in emptiness. This emptiness is the point here, we begin to become vast. It is difficult to tolerate this emptiness, but we also know what happiness and happiness there is in life? If you have to face sorrow and pain, then why not bear that pain, after which there will never be pain again. This emptiness is the foundation of the spiritual realm. If we take emptiness negatively then we can reach self-murder, if we take positive then we will become saints.
If your life brought you to this point, never panic. Surrender yourself to nature before taking the wrong step. If your environment does not understand you and does not support you and you find it difficult to recover, then get away from the environment for some time.
Emptiness is a very precious stage of life. It introduces the person to a great form.
always be happy

आज बात करतें हैं #अकेलेपन की :
जब बात अकेलेपन पर आ ही गई तो अकेले मौत में ही क्यों जाना, अकेले ज़िंदगी में क्यों नहीं चलते, फिर?
अगर, अब हम अकेले  जिस्मी लेवल पर हैं तो कोई फर्क नहीं।  कहावत सुनी है न , 'अभी गिरते berry  का कुछ नहीं बिगड़ा'.  अगर हमारा अकेलापन मन का रोग बन गया है तो हम यह कहावत कह देतें हैं , ' अब पछताए क्या होत ,जब चिड़िया चुग गई खेत' . अगर  हमारे मन के रोग ने हमारी बुद्धि को पकड़ में ले ले, तो बात  कुछ serious  है।  
यह अकेलापन का मतलब क्या है ?
हमारे करने को कुछ है ही नहीं।
हमारे होने को भी कुछ है नहीं। 
अब हम क्या करें?
कोई भी राह दिखाई नहीं देती। 
हम काले पॉइंट पर खड़े हैं।  हर तरफ अँधेरा ही अँधेरा है।  
 जब हमारा अकेलापन हमारी बुद्धि तीक पहूँच जाता है तो इस का मतलब कि हम आस से भी खाली हैं , हम भरोसे से भी खाली हैं , हम प्यार से भी खाली हो चुक्के हैं ।  यह खालीपन आखरी स्टेज है, खुदकशी की ओर  जाने की। तो हम को क्या करना चाहिए ?
 क्योंकि हमारे पास कुछ है नहीं। 
 इंसान की तो बात छोडो, हम भी हमारे पास नहीं हैं तो क्या करें ?
 सिर्फ एक और आखरी कदम लेने की तयारी करो। 
मौत की और जाने से पहले 
मौत एक अज्ञात -खेत्र है।  अज्ञात खेत्र की और जाने की वजाये ज्ञात खेत्र की और चलेंगे।  हम अनजाने संसार में चलेंगे। मौत ने भी घर-परिवार से अलग करना है,  हमारे माहौल से, हमारे हालातों से अलग ही करेगी तो हम खुद ही इन सब से अलग क्यों नहीं  हो जाते?  हम अपनी सब पहचान से खुद को अभी अलग कर लेते हैं। हम ने मरना तो है ही तो हम ऐसे मर कर भी देख लेते हैं। अपने आप को मौत देने से पहले खुद की पहचान को मौत दे देतें हैं। हम ने आपने आप को गवाना ही है तो मौत के ज़रिये नहीं,  ज़िंदगी के ज़रिये  आज खुद को गवातें हैं।  सब को छोड़ कर ही जाना है , खुद को छोड़ कर ही जाना है , तो चलो खुद को भी छोड़ देतें हैं।  
दुनिआ में रहते ही दुनिआ को छोड़ देना, संन्यास हो गया तो अब ज़िंदगी की ही नहीं मौत की भी मौत हो गई। 
यह नई दिशा ही नई दशा बना देगी। 
अगर मौत के लिए ज़िंदगी राज़ी है तो हम मौत को साथ ले के ज़िंदगी की ओर  रवाना होतें हैं।  जो ज़िंदगी मौत के लिए राज़ी हो गई, उस मौत को ज़िंदगी साथी बना के ही हम खुद  को नए तरीके से मौत देतें हैं 
अन्जानी राह, अनजाना संसार , उस में चलते हैं।  मौत से पहले अब हम खुद को मिटा के भी देखतें हैं। चलो चलते हैं !

#ख़ालीपन क्या है ?
जब हमारे पास कुछ भी ना  हो।  मानसिक लेवल पर खाली।  सोच और भावनाएं , गुण और अवगुण , सब से दूर ख़ाली, मरुथल  जैसी जगह पर जैसे खड़े हुए हैं 
ख़ालीपन की महसूसियत क्या है ?
डर, घबराहट, बेगानापन,  
क्या ख़ालीपन को ही अकेलापन कहतें हैं ?
दोनों की पोजीशन एक ही है।  हमारी शुरूआत किस से होती है, इस में बहुत फ़र्क़ है। 
कैसे ?
अगर हम अकेलेपन से खाली होना शुरू होते हैं तो आम तौर पर हमारी सोच नैगेटिव ही होगी। अगर खालीपन से शुरूआत हुई है तो हम  खाली ही होते जाएंगे पर हमारा ज़िंदगी के प्रति व्य्वहार पॉजिटिव ही रहेगा।  
हम नेगेटिव व्य्वहार को पॉजिटिव कैसे करेंगे ?
हमारी आम ज़िंदगी के लिए भी सब से अच्छा और पॉजिटिव इलाज़, हमारे लिए कुदरत का है, उस का साथ रहना चाहिए।  नदी के बहने को देखना- पक्षिओं को देखना -फूलों और पेड़ों के साथी बन जाना।  मॉर्निंग वाक करनी, इवनिंग वाक करनी।  २-३ बार दिन में नहा लेना।  ठंडा पीना। सब से गहरा, आपने मन की बात को हर रोज़ लिखना कि आज मेरा मूड ऐसा था, फिर मैंने क्या सोचा और क्या किया।  पूरी ईमानदारी से सब लिखते जाना।  जितना ज़रूरी लिखना है उतना ही ज़रूरी एक काम और है।  वाकिंग के लिए सूर्य उदय से पहले जाना कर सूर्य अस्त होने पर जाना।  धुप से परहेज़ करना।  गर्मी से परहेज़ करना।  अगर मौसम ठंडा है तो कोई फ़र्क़ नहीं। ऐसे करने से हम को डॉक्टर की भी ज़रुरत नहीं रहेगी।  चुप और कुदरत सब से अच्छे डॉक्टर हैं। 
खालीपन में हम बिलकुल खाली होतें हैं।  यह खालीपन ही वोह बिंदु है यहाँ पर हम विराट होना शुरू होतें हैं।  यह खालीपन बर्दाश्त करना चाहे मुश्किल है, पर हम यह भी तो जानतें हैं कि ज़िंदगी में कौन सा सुख और ख़ुशी है?  अगर दुःख और दर्द ही झेलना है तो फिर वो दर्द क्यों न झेलें , जिस के बाद फिर कभी दर्द होगा ही नहीं। यह खालीपन आत्मिक खेत्र  की बुनियाद है।  अगर हम ने  ख़ालीपन  को नेगेटिव ले लिया तो हम आत्म-हत्या तीक पहंच सकतें हैं, अगर हम पॉजिटिव ले गए तो संत बन जाएंगे। 
अगर आप की ज़िंदगी, आप को इस बिंदु पर ले आई, तो कभी घबराना नहीं। गलत कदम लेने से पहले खुद को कुदरत के हवाले कर देना। अगर आप का माहौल आप को समझता नहीं और आप का साथ नहीं देता और आप को ठीक होने में मुश्किलें मिलती हैं , तो कुछ वक़्त के लिए माहौल से दूर हो जाओ।  
खालीपन ज़िंदगी की बहुत कीमती स्टेज है।  यह व्यक्ति को विराट-रूप से मिलवा देती है। 
सदा खुश रहो 

अकेलापन  वैरागय का पहला कदम है।  अकेलेपन, खालीपन का ही अहसास है। 
 खालीपन ही निर्वाणा की ज़मीन है।  इस ज़मीन से ही हम विराट होतें हैं 


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