My Profession is to always find God in Nature

My Profession is to always find God in Nature
What I knew was that the silence blossomed the heart. When the heart blossomed, there was a feeling of love. The romance started with me. When my romantic-mind took all my stress from me all the time, I could not know. I who I am, I am unknown, today I remembered Buddha in unknown happiness

Love relationship

Love relationship:
Love is a bond in itself!
I thought one thing very deeply, and also discovered because I had a very deep connection with my thinking. The thought was that when a boy and a girl fall in love, the whole world becomes alien to them. I used to wonder why such love does not happen again in any other relationship?
When I fell in love, today I also tell my son that let's go somewhere,
 somewhere in such a place that there is only love. 
I also tell the daughter,
 'You are my little sister, beautiful beautiful, good good, let's run somewhere'
When love fills in anyone's heart for anyone, one wants to run away with it, why?
My deepest experience:
 My heart wants me to run away with my son.
 Sometimes I should run away with my daughter.
 I always told my father, 'Let father run away from home'
first thing :
Have we never had such love with any other relationship, why?
When love is like this, why does the heart want to run away?
Very cute question, just like love and the answer is more lovely than love.
The most precious jewel of love is shyness.
Say about the time or the way of time is the same thing. There is a lot of openness in relationships from the beginning today. I have seen that time too, when not only the woman was shy, but man also shy. 
Today we are in relationships, but the depth in the dignity of relationships is not there today. Time is a matter of time and time is its own story. Every time has its own style. Not only humans, time also lives. We live in time and time lives in us.
Whatever the relationship is, it must have happened, the relationship should start with shyness (hesitate) . I remember that when the children were young, I always thought what would happen if these children did not like me? I thought, 'Everyone's thinking has a beautiful picture of every relationship, if it is not me or not in me, then what should I do?'
I have always seen that a person takes advantage of the relationship. When we take advantage of the relationship, the relationship is dead.
If we kill the beauty of the relationship, 
then there is no question of love being born.
Whenever our life moves into a new relationship, we should never consider our own status as the best. When we find something in our normal life, we are proud to walk. Our ego sits on our neck. Everything is precious. We do not live in our dignity. As I have seen the atmosphere, in this environment, new born children are fed with discrimination only.
Love can't happen When we do not know how to lay the foundation of love, how will love be? The system of this hunger of love starts appearing in the child at the age of 12-13, when their eyes are in search of a boy or a girl.
Question is:
When I find a clean and cold waterfall in my house, 
will I go to the neighbor's house to get water?
We have forgotten the feeling of natural life. If the atmosphere is natural then at the time the weather comes, at the time our life becomes as the sun comes out.
 It is said that the grass itself is produced when it rains.
I always lived in my heart that everything is very precious,
 so that it does not get spoiled by me.
 Children are very soft, if the parents are not wise, 
then how can they give them wisdom?
 My prayer has always been support. 
Prayer was my support for every step.
 And the children were a gift to me. 
Those whom I wanted to support, did not rule. 
The children were the property of God, not mine.
Whenever I see all these actions from deep,
 then I just bow down and the moisture starts floating in my eyes.
When the seed variety is good, the fruit will also be sweet and fragrant.
 So I got very good fruit. 
My life started in the blessings of God.
If we keep the relationship in a dignity, then when we allow the relationship to grow in that dignity, then the love in the relationship will be the same as between two lovers.
Now the second question, 
why does our heart want us to flee to some other place?
 Which place?
The quality of love is that love has to flourish in solitude.
 The knowledge and form of love is that love has to remain forever.
  The nature of love is that love has always been ashamed.
  The habit of love is that love did not accept any extent.
It is a love of love that love has to make others love. 
There is no other color that falls on love 
because love does not tolerate any other color.
The enemy of love is arrogance.
 Only One gets shelter of love, who have a humble mind.
So these things are needed to grow love.
 When love becomes young then when it talks of running away it is a celebration of love. Meaning that love wants to be absorbed in love 
- this absorbed spirit is called running away,
 it is called hiding.
 Because it is natural to have every action of love hidden.
 To run means to hide from everyone.
 There is pleasure in hiding love.
Love is like an intoxicant - which not only makes a person beautiful, 
also gives a person the title of God.
Because love is a positive alchemy, 
which transforms humans, 
makes ones healthy and gives the freedom.
Love is a celebration, 
in which the world itself does not become a home of happiness,
 but even a particle of body becomes a celebration, 
meaning that spiritual fitness comes.


प्यार का नाता:
प्यार खुद में ही एक नाता है !
मैंने एक बात बहुत गहरे से सोची, और खोजी भी क्योंकि मेरा अस सोच के साथ नाता बहुत गहरा रहा।
 सोच यह थी कि एक लड़का और एक लड़की जब प्यार में पड़ जातें हैं
 तो सब संसार उन के लिए पराया हो जाता है। 
मेरे में सोच आती थी कि ऐसा प्यार फिर किसी और रिश्ते में क्यों नहीं होता ?
जब मेरे को प्यार हुआ तो आज मैं आपने बेटे से भी कहती हूँ 
कि चलो कहीं भाग चलें, कहीं ऐसी जगह कि बस सिर्फ प्यार हो। 
 मैं बेटी को भी कहती हूँ, 'तू मेरी छोटी सी बहन हैं , सूंदर सूंदर, अच्छी अच्छी , चल कहीं भागें '
जब किसी के लिए भी किसी के दिल में प्यार भरता है 
तो उस के साथ कहीं भाग जाने को दिल करता है, क्यों ?
मेरा गहरा तुजर्बा :
 मेरा दिल करता है कि मैं बेटे के साथ भाग जाऊँ।
 कभी दिल करता बेटी के साथ भाग जाऊं।
 आपने बाप को मैंने सदा कहा कि, ' चलो बापू जी घर से भागें '
पहली बात :
क्या हमारा कभी किसी ओर रिश्ते से ऐसा प्यार ही नहीं , क्यों ?
जब प्यार ऐसा हो तो भाग जाने को दिल क्यों करता है ?
बहुत ही प्यारा सवाल, बिलकुल प्यार जैसा ही और जवाब प्यार से भी प्यारा।
प्यार का सब से कीमती गहना लज्जा है।
वक़्त की बात कहो या वक़्त का अंदाज़,  एक ही बात है।  आज शुरू से ही रिश्तों में बहुत खुल्दिली है। 
 मैंने तो उस वक़्त को भी बहुत गौर से देखा है, जब औरत ही नहीं, आदमी के चेहरे पर भी शर्म-हया  होती थी।
आज हम रिश्तों में हैं, पर रिश्तों की मर्यादा में जो गहराई होती थी, वो आज नहीं है। 
 वक़्त वक़्त की बात है और वक़्त वक़्त की अपनी ही कहानी है।  
हर वक़्त का खुद का अंदाज़ होता है। 
 इंसान ही नहीं , वक़्त भी जीता है।  हम वक़्त में जीते हैं और वक़्त हमारे में जीता है।
रिश्ता कोई भी हो, हया होनी ही चाहिए, शर्म से रिश्ते की शुरूआत होनी चाहिए।
 मेरे को याद है कि जब बच्चे छोटे थे, 
तो मैंने सदा सोचना कि अगर इन बच्चों ने मेरे को पसंद ना किया, तो क्या होगा ? 
 मैंने सोचना कि, 'हर एक की सोच में हर रिश्ते की एक सूंदर सी तस्वीर होती है, 
अगर वो मैं नहीं हूँ , तो मेरे को फिर क्या करना चाहिए ?'
मैंने सदा देखा है कि इंसान रिश्ते का नाजायज़ फाइदा लेता है। 
 जब हम रिश्ते का ही फाइदा लेंगे तो रिश्ता मर ही गया। 
 रिश्ते की सुंदरता को हम ने मार दिया तो प्यार पैदा होने का सवाल ही नहीं।
जब भी हमारी ज़िंदगी किसी नए रिश्ते में जाती है तो हम को खुद की औकात को कभी सर्व-उत्तम नहीं मानना चाहिए।  आम ज़िंदगी में ही जब हम को कुछ मिलता है तो हमारी चलने में ही घमंड आ जाता है।  हमारी तो गर्दन में ही अहंकार आ कर बैठ जाता है। हर चीज़ कीमती है। हम अपनी मर्यादा में नहीं रहते। जैसा मैंने माहौल देखा है, 
इस माहौल में नए जन्मे बच्चे को भेदभाव का ही मीठा खिलाते हैं।
प्यार हो नहीं सकता। जब  प्यार की बुनियाद ही  हम को रखनी नहीं आती तो प्यार होगा कैसे ?
 प्यार की इस भूख का सिस्टम १२-१३ साल की उम्र में ही बच्चे में दिखाई देने लगता है,
 जब उन की आखें लड़का या लड़की की तलाश में हो जाती है।
सवाल है :
जब मेरे को ,मेरे घर में ही साफ़  और ठन्डे पानी का झरना मिलेगा, 
क्या मैं पानी लेने के लिए पडोसी के घर जाऊँगी ?
कुदरती ज़िंदगी के अहसास को हम भूल चुक्के हैं। 
 माहौल कुदरती होगा तो वक़्त पर जैसे मौसम आता है, 
वक़्त पर जैसे सूर्य निकलता है वैसे ही हमारा जीना हो जाता है। 
 कहतें हैं न  कि जब बरसातें होती हैं तो घास खुद ही पैदा हो जाती है।
मेरा दिल में सदा यही रहता था कि हर चीज़ बहुत कीमती है, कहीं मेरे से खराब न हो जाए। 
 बच्चे बहुत ही कोमल होतें हैं, 
अगर माँ-बाप को ही अक्ल नहीं तो वो कैसे उन को अक्ल दे सकेंगे ?
 बस मेरा सदा ही सहारा प्रार्थना रहा है। हर कदम के लिए प्रार्थना ही मेरा सहारा थी।
 और बच्चे मेरे लिए तोहफा थे। 
 जिन का मैंने साथ देना था , हकूमत नहीं करनी थी।
  बच्चे खुदा की जायदाद थे, मेरी नहीं।
जब भी मैं इन सब एक्शन को गहरे से देखती हूँ तो बस सर झुक जाता है 
और आँखों में नमी तैरने लग जाती है।
जब बीज की किस्म उत्तम होती है तो फल भी मीठा और सुगंधत ही लगेगा।  
सो मेरे को फल बहुत अच्छा मिला। 
 मेरी ज़िंदगी परमात्मा की दुआ में पलने लगी।
अगर हम रिश्ते को एक मर्यादा में रखेंगे तो जब हम रिश्ते को उस मर्यादा में बढ़ने देंगे
 तो रिश्ते में प्यार वैसा ही होगा, जैसा दो प्रेमीं  के बीच होता है। 
अब दूसरा सवाल:
कि क्यों हमारा दिल करता है कि हम कहीं ओर जगह पर भाग जाएँ ? कौन सी जगह पर ?
प्यार का गुणरूप है कि प्यार ने सदा  एकांत में ही पलना है। 
 प्यार का ज्ञान-रूप है कि प्यार ने सदा क्वारा ही रहना है।
  प्यार का स्वभाव है कि प्यार ने सदा शर्माना ही है।
  प्यार की आदत है कि प्यार ने किसी भी हद को नहीं मानना।
प्यार का गरूर है कि प्यार ने दूसरे को प्यार ही बनाना है।  प्यार पर ओर  कोई भी रंग नहीं चढ़ता  क्योंकि प्यार ने ओर कोई भी रंग को बर्दाश्त नहीं करना। 
प्यार का दुश्मन अहंकार है।  प्यार की पनाह उस को ही मिलती है, जो  इंसान नम्रतावान होता है। 
सो प्यार को पलने केलिए इन चीज़ों की ज़रुरत है।  जब प्यार जवान हो जाता है तो फिर जब यह भागने की बात करता है तो यह भागना प्यार का जश्न है।  मतलब कि प्यार प्यार में ही लीन हो जाना चाहता है - इस लीन -भाव को भागना कहतें हैं, छुप जाना कहतें हैं। क्योंकि प्यार के हर एक्शन छुप के ही होना कुदरती सुभाव है।  भागना मतलब सब से छुप जाना।  प्यार को छुपने में ही आनंद मिलता है।  
प्यार एक नशे की तरह है- जो इंसान को सूंदर ही नहीं बनाता , इंसान को खुदा की पदवी भी देता है।  
क्यों ?
क्योंकि प्यार एक सकारात्मिक कीमिया है, जो इंसान को बदलता है , तंदरुस्त करता है और  आज़ादी दिलवाता है। 
प्यार एक जश्न है,जिस में संसार ही ख़ुशी का घर नहीं बनता, बलिक जिस्म का कण कण भी जश्न बन जाता है ,मतलब कि   आत्मिक  तंदरुस्ती आ जाती है। 


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