BREAKING NEWS
latest

The Artist will always produce Art

The Artist will always produce Art
यह कॉस्मिक कला एक ऐसी कलाकारी है, जो कि खालीपन पर खाली रंग से ही की गई है। जब हम इस कलाकारी को समझने के काबिल हो जातें हैं तो हम खुद के रहस्य से जानू हो जातें हैं

Where Death Lives?

Death always played the role of mother

When my eyes were searching for the land of death where death lives,
 then I know that death is living in me


 It is also a pleasure to die when we know what 'death' is. People say that we are living, and my experience has always been death. 'Death' continued to show me 'What is life?'

I started learning to live as a child learns to walk. The parents teach the child to walk with the hand and 'Death' took my hand. The child learns to walk in two years, and I have not learned to live even in 50 years. The experience of 'death' went on to stifle 'life' in me. Whenever I thought 'spring season' is going to come, at the same time there was a thunderstorm. Seeing any storm did not cause panic, because I knew that all this game is of 'death', which is taking me into a strong and cheerful life.

Today, when the eyes opened in the morning, today the heart did not say 'death', thank you, today, a kind smile sent a gesture to life, why?


मौत ने सदा ही माँ का रोल अदा किया 

 जब मेरी आँखें मौत की ज़मीन की तलाश कर रही थी कि मौत कहाँ पर रहती है तो तब जाना कि मौत मेरे में ही जी रही है 


मरने में भी आनंद आता है ,जब हम यह जान जाते हैं कि 'मौत' है क्या।  लोग कहतें हैं कि हम जी रहे हैं , और मेरा अनुभव सदा मौत का ही रहा। 'मौत' मेरे को दिखाती चली गई कि 'ज़िंदगी क्या है ?' 

जैसे बच्चा  चलना सीखता है, वैसे ही मैंने जीना सीखना शुरू किया।  माँ-बाप बच्चे का हाथ पकड़ कर चलना सिखाते हैं और मेरा हाथ 'मौत' ने पकड़ा।  बच्चा दो साल में चलना सीख जाता है, और मैंने ५० साल में भी जीना नहीं सीखा। 'मौत' का अनुभव मेरे में 'ज़िंदगी' को पुंगेरता चला गया।  जब भी मुझे लगा कि ' बहार ऋतू ' आने वाली है, उसी वक़्त कोई न कोई आंधी ही आई।  किसी भी आंधी को देख कर घबराहट पैदा नहीं हुई, क्योंकि मैं जान चुक्की थी कि यह सब खेल 'मौत' का है, जो मेरे को मज़बूत और हौंसले भरी ज़िंदगी में ले जा रहा है। 

आज जब सुबह आँख खुली तो आज दिल ने 'मौत' को तो धन्यबाद  नहीं कहा, आज एक मन मोहनी सी मुस्कान ने इशारे से ज़िंदगी को कहा, क्यों?




« PREV
NEXT »

No comments

The best cure of the body is a quite mind:. Powered by Blogger.

Thanks you came here

Thanks you came here

Subscribe

Contact Form

Name

Email *

Message *