Let's Walk Like a Mystic

A Spiritual Traveler

Tuesday, April 26

When I stayed in me, I remembered Buddha, Why?




I was seeing and listening to the dominance of religion all around.
 But if religion was not visible in anyone's movement, 
then my eyesight ordered my walking feet to stop.
 This stop of mine took me in the right direction.

Everyone around me was taking part in the race for money 
or was preparing to take part. 
The hunger for money was understood When I saw the rich man running too.
 Something stopped in me again. 
This stay of mine gave me that richness Which never ends.

A false feeling in sweet words; Something on the tongue -
 something else in the character; Carrying out kinship with an empty mind,
 giving up one's existence for a false nose; 
Wow! Couldn't happen to me. Something stopped - 
Something stopped inside me again that 
my auspicious journey has become an auspicious time.

There has to be a very deep Stop, that is called a Pause, 
When it comes
, the person becomes a Spiritual Traveler.

Every step I stopped, always reminded me of Buddha. 
When someone's Death stopped Buddha,
 Buddha left the house in 'Quest to know Death'.
Who stopped me?
1- Understanding, 
2- Soul,
 3- God,    
 4, My past Sanskars,
 5- According to deeds, 
or 
Someone's blessings!
'Pause', How did it start to Stop?
Till date I have seen myself stop in every incident. 
That pause comes from my consciousness. 
'Consciousness' 
- That feeling, Which has been sitting silently inside me in a very deep silence.
 I have always looked towards it and that 
consciousness always gives me happiness, peace, comfort and freedom. 
I have questioned it many times with gestures, 
and consciousness has always given me the right answers for experimentation.
My Pause saved me from every incident and made me successful in living. 
Then I also asked myself that if this thing happens with all human beings,
 then Why don't all Stop then?
Then my question would be to myself that 'How do I Stop,
 And Why do I Stop?
There must be some Thought or some Emotion working behind this?
What is That?
When I ask a question with my eyes closed, 
the answer already bows its head and salutes.
 In my slight smile, love and thanks for the universe blossom.
I don't want to win two days,
 I wanted to live life, not to win any part of World. 
The race of the world was focused on winning, 
and no one would win. 
Even if someone wins for a few years, death defeats.
 I never lose, So I have to Win that Victory, 
Which never loses -
 Which even death cannot defeat. 
Which is that win or that race?
 I wanted to win myself.
 My race went with my every thought;
My competition has always been my Feeling;
I was against me,
 because my opposition was with the world within me, 
Which was imprisoned in pain, suffer, tension, suffocation, helplessness, restlessness  
and diseases.
When I got my freedom from me, I got first position in every race.
Today I am a person full of blessings that no time will defeat me 
but will take me with itself; 
No death will imprison and no bond will limit 
– because today the universe has to maintain friendship.

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जब मेरे में ठहरा आया तो बुद्धा की याद आई, क्यों?




मैं चारों तरफ धर्म का ही बोलबाला देख रही थी और सुन रही थी।  
पर किसी की चाल में धर्म दिखाई दिया ही नहीं 
तो मेरी देखनी ने मेरे चलते पैरों को रुकने का हुक्म दिया।
मेरा यह रुकना मेरे को सही दिशा की ओर ले गया।

मेरे आस-पास सब पैसे की दौड़ में हिस्सा ले रहे थे या हिस्सा लेने की त्यारी कर रहे थे।
पैसे की भूख उस वक़्त समझ में आ गई ,
जब मैंने अमीर व्यक्ति को भी दौड़ते हुए देखा।मेरे में कुछ फिर ठहर गया। 
 मेरा यह ठहरना मेरे को वो अमीरी दे दिया
 -जो कभी भी खत्म नहीं होती। 

मीठे बोलो में झूठी भावना; 
 ज़ुबान पर कुछ- किरदार में कुछ ओर;  खाली मन से रिश्तेदारी को निभाना, 
झूठी नाक केलिए खुद के अस्तित्व को हार देना ; 
वाओ ! मेरे से हो न सका. कुछ रुका - 
मेरे ही भीतर कुछ ऐसा रुका फिर से कि मेरी शुभ-यात्रा का शुभ महूर्त हो गया।

एक बहुत  ही गहरा रुक जाना होता है,उस को पॉज कहतें हैं,
जब वो आता है तो व्यक्ति अधियात्मिक-यात्री बन जाता है।

मेरे रुकते हर कदम ने सदा ही मुझे बुद्धा की याद दिलवाई। 
किसी की मौत ने बुद्धा को रोका तो बुद्धा 'मौत को जानने की तलाश' में  घर से चले गए। 
मुझे किस ने रोका?
१- समझ ने 
२- आत्मा ने, 
३- परमात्मा ने, 
४, मेरे बीत चुके संस्कारों ने, 
५- कर्मों के हिसाब ने,
 या 
किसी के आशिर्बाद ने!
'रुकना' , ठहर जाना कैसे चलने लगा?    
आज तक मैंने खुद को हर घटना में रुकते देखा है।
 वो रुकना, मेरी चेतना से आता है। 
 'चेतना'- वो एहसास, जो बहुत ही गहरी चुप में मेरे भीतर चुप कर बैठा है।  
 मैंने सदा उसी ओर देखा है और वो चेतना सदा मेरे को सुख, शांति, ख़ुशी और आज़ादी देती है। 
 मैंने इशारे से बहुत बार उस से सवाल किए हैं, 
और चेतना ने सदा ही मेरे को प्रयोग के राहीं जवाब दिए हैं।  
मेरे रुकने ने मेरे को हर घटना से बचाया 
और मेरे को जीने में सफल किया। 
फिर मैंने खुद को सवाल भी किया
 कि यह तो सब इंसानों के साथ बात घटित होती होगी 
तो सब फिर रुकते क्यों नहीं?  
फिर मेरा सवाल खुद को ही होता कि 'मैं कैसे रुक जाती हूँ,
 और क्यों रुक जाती हूँ ? 
इस के पीछे ज़रूर कोई सोच या कोई भाव काम करता होगा ?
वो क्या है?
जब आँखों को बंद करके सवाल पूछती हूँ 
तो जवाब पहले ही अपना सर झुका कर सलाम कर देता है। 
 मेरी हलकी सी मुस्कान में ब्रह्मण्ड के लिए प्यार, और धन्यवाद खिल जाता है। 
मेरे को दो दिन की जीत नहीं चाहिए, 
मैं ज़िंदगी को जीना चाहती थी, किसी भी हिस्से को जीतना नहीं। 
 संसार की दौड़ जीतने पर लगी हुई थी, और कोई जीतता भी नहीं था। 
 अगर कोई थोड़े से सालों तक जीत भी जाता तो मौत हरा देती है। 
सो मेरे को कभी हारन  नहीं दिया , सो मैंने वो जीत प्राप्त करनी है,
 जो कभी हारती नहीं- जिस को मौत भी नहीं हरा सकती।  
वो जीत  या वो दौड़ कौन सी है ?
 मैं खुद को जीतना चाहती थी। 
 मेरी दौड़ मेरी हर सोच के साथ रही;
मेरी प्रतियोगता सदा मेरी ही भावना रही ;
मैं ही मेरे विरोध में रही, 
क्योंकि मेरा विरोध मेरे भीतर के उस संसार के साथ था, 
जो दुःख-दर्द, तकलीफ, तनाव, घुटन, बेबसी, लाचारी और रोगों की क़ैद में था। 
मेरी मेरे से आज़ादी जब मिली 
तो मैंने हर दौड़ में पहली पोजीशन प्राप्त कर ली। 
आज मैं एक दुआ से भरी हुई एक शख्सियत हूँ
 कि मेरे को कोई भी वक़्त हरायेगा नहीं बलिक साथ ले कर चलेगा;
 कोई भी मौत क़ैद नहीं करेगी और कोई भी बंधन सीमत नहीं करेगा- 
क्योंकि आज ब्रह्मण्ड ने दोस्ती निभानी है।  
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Amazing Nature

Amazing Nature
When following the Trail of Colorful Emotions and Beautiful Divine Connection, Then Life blossoms, Love begins to flow because True and Pure feeling is the living land of Love and a more beautiful abode to live in the Heart during the JOURNEY OF LOVE Creating is a priceless feeling. But in Those moments there are some of the most amazing Moments too, Which become functional to see Life in full Bloom with Divine Connection and Divine Action like SPRING. When Our Thoughts also Blossom in our Life. It is these Moments that make us Aware and make OUR life an ART OF JOY...