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Let's make life a pilgrimage together!

Let's make life a pilgrimage together!
Following the trail of colorful emotions and beautiful divine relationships. Now life Blossoms, beginning to love because it is a vibrant land of love and a beautiful feelings to wander across the heart during the journey of awakening. But here are some of the most stunning moments to witness life in full bloom with divine relationship and divine action like spring...And now thoughts are in bloom

Do you know that you have seen yourself born and dying?

Let us all go through a new path today and see who we are?
Before walking in the way, I want to tell you one thing that we are not all moments - we are all ages.

Do you think that you have never seen your death?
Do you also think that you did not see you being born?
We have all seen ourselves dying and have seen births too?
 How do we dream?
In what situation do we dream?
What is our state when the dream is passing through us?
 If you look at the idea, then life will be smiling

When I first entered a deep silence, I reached a beautiful village. First of all I heard the sound of a bell. Who reminded me of the incident of my childhood - which used to silence me. That voice was an old time flour grinding machine. Whenever I used to hear the sound of grinding machine, my dimension would change and I would reach another circle. Today I heard the same voice again in this village.
Very beautiful village - very relaxed atmosphere, my deep attention is seen all around. Then it felt like I had seen this village before. But where ? Can't remember The cascade of the waterfall, the sound of someone's chirping, did not like to come out of the village. But could not even stop. When I started coming out of the village, my awareness awakened my consciousness.
What did you see ?
This village - it was my body. The sound of the bell was heartbreaking. The waterfall was a flow of blood. The sound of chirping was my nerve-system. All the muscles of the body were trees and flowers.
When we live in the mother's womb for 9 months, how can we forget? ever thought ?
 When we have believed that the soul never dies - the soul never faints?
 Do we dream while awake?
 When thinking we are lost somewhere, what is that?
Mind fell asleep
 Consciousness never sleeps
 So what is dream?
Sleeping world
So what is the world?
Dream of awake mind
So how can we say that we did not see ourselves being born?
have seen
We have also seen ourselves dying
how ?
Because the soul never dies — and never faints.
So how did you know that experience now?
Going to the same stage, we will see.
What stage is that
Across the mind and body - which in Gurbani is called the "Nirvichaar awastha" state. It is called a state of silence - and it is called meditation.
We have to take ourselves to the position that was in our womb.
Beautiful colony of quiet
 Our body is a very unique colony, in which beats are born first of all. Temple bell. In which the first consciousness enters - consciousness means senses - wisdom, intelligence, light, candle and light is the symbol of awakening. Barefoot, means to go with the body, cannot take the worldly things to the temple, which we were in the womb.
Absolutely blank
Meditation and silence introduce us to our experience, which we have had in the womb - that we have forgotten - but remember it in consciousness - we introduce it with that memory - our meditation.
Meditation becomes our state
Silence becomes our situation
 Life is a wonderful and unique journey, which we all know - we all have experiences, we just have to remember. When we remembered this, we knew how we were born and how we died.
The most surprising thing of all is that we die just as we are born.
When we saw birth and death
We have seen the era
When we have seen our body from within - then we have seen the womb - the structure of that womb and our inner body, only we see in the world - nothing else.
 Meaning that our consciousness has seen our body from within - just the form that we are seeing outside - what we call the world. Jism and the world are our same experience, because Jism and the world are the same.
The way we see ourselves, the way we see the world
Or say that as we see the world, we are ourselves, for ourselves
We have seen our birth and have also seen death
Have forgotten
 It's just a matter of face to face




क्या आप सोचतें हैं कि आप ने कभी अपनी मौत नहीं देखी ?
क्या आप यह भी सोचतें हैं कि आप ने आप को जन्म लेते  नहीं देखा ?
हम सब ने खुद को मरते भी देखा है और जन्मते भी देखा है ?
 सपना हम कैसे देखतें हैं ?
सपना हम को किस स्थिति में आता है ?
जब सपना हम में से गुज़र रहा होता है तो हमारी अवस्था क्या होती है ?
 ज़रा विचार के देखो गए तो ज़िंदगी आगे ही खड़ी मुस्करा रही होगी

जब मैं पहली बार गहरी चुप में प्रवेश  हुई तो एक सूंदर गांव में पहूँच गई। सब से पहले मेरे को घंटी का आवाज़ सुनाई दी।  जिस ने मेरे को मेरे बचपन के उस हादसे की याद दिलवाई- जो मेरे को खामोश कर देता था।  वो आवाज़ थी पुराने वक़्त में आटा पीसने वाली  मशीन।  जब भी मैं आता पीसने वाली मशीन की आवाज़ सुनती , तो मेरा डायमेंशन बदल जाता और मैं किसी और ही मंडल में पहुंच जाती।  आज मुझ को इस गांव में फिर से वही आवाज़ सुनाई दी।
बहुत सुन्दर गांव- बहुत ही आरामदयिक माहौल, मेरा गहरा ध्यान चारों  तरफ़  गहरा देखता है।  फिर ऐसे लगा कि इस गांव को मैंने पहले भी देखा है।  पर कहाँ ? याद नहीं आ रहा था।  झरने की कलकल , किसी के चहचहाने की आहट ,  गांव से बाहर आने को दिल ही नहीं करता था।  पर रुक भी नहीं सकती थी  . जब गांव से बाहर निकले लगी तो ध्यान ने मेरी ही चेतना को जगा दिया।
क्या देखा ?
यह जो गांव था - यह मेरा ही जिस्म था।  घंटी की आवाज़ दिल की धड़कन थी। झरना  खून का प्रवाह था।  चहचहाने की आहट मेरा नर्व -सिस्टम था। जिस्म की मांस-पेशियाँ  सब पेड़ फूल फल ही थे।
जब हम माँ के गर्भ में ९ महीने रहतें हैं, हम कैसे भूल सकतें हैं ? कभी सोचा ?
 जब हम ने आज तक इस बात पर भरोसा किया है कि आत्मा कभी मरती नहीं - तो आत्मा कभी बेहोश भी नहीं होती ?
 क्या हम जागते हुए सपने देखतें हैं ?
 सोचते सोचते जब हम कहीं खो जातें हैं , तो वो क्या क्या है ?
मन सो गया -जिस्म आराम में चला गया
 चेतना कभी सोती नहीं
 तो सपना क्या है ?
सो रहे मन का संसार
तो संसार क्या है ?
जाग रहे मन का सपना
तो हम कैसे कह सकतें हैं कि हम ने खुद को जन्म लेते नहीं देखा ?
देखा है
हम ने खुद को मरते भी देखा है
कैसे ?
क्योंकि आत्मा कभी मरती नहीं-और ना ही कभी बेहोश होती है।
तो अब आपने उस अनुभव को कैसे जानेंगे?
उसी अवस्था में जा के हम देखेंगें।
वो कौन सी अवस्था है ?
मन और जिस्म के पार की - जिस को गुरबाणी में निर्विचार अवस्था कहा है।  उसी को चुप की अवस्था कहतीं हैं -और उसी को मैडिटेशन कहतें हैं।
हम ने खुद को उस स्थिति पर ले जाना है -जो स्थिति हमारी गर्भ में थी।
चुप की सूंदर बस्ती।
 हमारा जिस्म एक बहुत ही अनूठी बस्ती है , जिस में सब से पहले  धड़कन ही पैदा होती है।  मन्दिर  की घंटी।  जिस में पहले चेतना ही प्रवेश होती है - चेतना मतलब होश - अक्ल, समझदारी , रौशनी , कैंडल और ज्योत  जगाना  प्रतीक है। नंगे पाँव, मतलब सिर्फ जिस्म  के साथ जाना है, संसारी चीज़ को मन्दिर  में नहीं ले  सकते , जिसे गर्भ में सिर्फ हम थे।
बिलकुल कोरे
ध्यांन और चुप हम को हमारे उस अनुभव के साथ मिलवा देता है ,जो हम ने  गर्भ  में किया हुआ है - जिस को हम भूल गए - पर चेतना में उस की याद है - उस याद के साथ हम को मिलवाता है - हमारा ध्यान।
ध्यान हमारी अवस्था बन जाता है
चुप  हमारी स्थिति बन जाती है
 ज़िंदगी अद्भुत और निराली यात्रा है, जिस को हम सब जानतें है - सब के सब अनुभव हम हैं , बस याद करने हैं। जब यह याद आ गए तो हम जान गए कि हम ने कैसे जन्म लिया और हम कैसे मरे ?
सब से हैरानी की बात यह है कि जैसे हम जन्मतें हैं -वैसे ही हम मरतें हैं।
जन्म और मरन जब हम ने देख लिया तो
हम ने युग देख लिया
जब हम ने अपना भीतर से जिस्म देख लिया- तो हम ने गर्भ देख लिया - उस गर्भ का और अपने भीतर के जिस्म का ही ढांचा ,सिर्फ हम संसार में देखतें हैं- और कुछ भी नहीं।
 मतलब कि हमारी चेतना ने हमारे जिस्म को भीतर से देखा है - बस वो ही रूप हम बाहर देख रहें हैं - जिस को हम संसार कहतें हैं।  जिस्म और संसार हमारा एक ही अनुभव है, क्योंकि जिस्म और संसार एक ही है।
जैसे हम खुद को देखतें हैं, वैसे ही हम संसार को देखतें हैं
या ऐसे कहो कि जैसा हम  संसार दिखाई देता है , वैसे हम खुद हैं , खुद  के लिए
हम ने अपने जन्म को भी देखा है और मरन  को भी देखा है
भूलें हुए हैं
 सिर्फ आमना-सहमना होने की बात है 
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